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गौतम अदाणी का संदेश: हिंडनबर्ग रिपोर्ट ने भारत और अदाणी समूह दोनों को चुनौती दी

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 24 सितंबर: अदाणी समूह के मुखिया गौतम अदाणी ने बुधवार को अपने शेयरधारकों को लिखे पत्र में कहा कि हिंडनबर्ग रिसर्च की रिपोर्ट केवल अदाणी समूह की आलोचना नहीं थी, बल्कि यह पूरे भारत के सपनों और महत्वाकांक्षा की परीक्षा थी। उन्होंने कहा कि यह परीक्षण समूह की लचीलेपन और शासन प्रणाली की कसौटी साबित हुआ।

अदाणी समूह को मिली सेबी से राहत

गौतम अदाणी ने पत्र में भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) से मिली राहत की भी सराहना की। 18 सितंबर को सेबी ने अदाणी समूह और उनके व्यक्तित्व को 2023 की शुरुआत में अब बंद हो चुकी अमेरिकी शॉर्ट सेलर हिंडनबर्ग रिसर्च द्वारा लगाए गए अनियमितताओं के आरोपों से मुक्त कर दिया। समूह को स्टॉक में हेराफेरी और संबंधित पक्ष के लेन-देन का खुलासा न करने से जुड़े दो मामलों में बरी किया गया।

अदाणी ने कहा, “सेबी के स्पष्ट और अंतिम वचन के साथ सत्य की जीत हुई है, या जैसा कि हम हमेशा कहते आए हैं, ‘सत्यमेव जयते’। जिसका उद्देश्य हमें कमजोर करना था, उसने हमारी नींव को और मजबूत कर दिया।”

हिंडनबर्ग रिपोर्ट और भारतीय उद्यमिता

गौतम अदाणी ने स्पष्ट किया कि हिंडनबर्ग रिपोर्ट का उद्देश्य सिर्फ अदाणी समूह पर सवाल उठाना नहीं था। उन्होंने कहा, “यह वैश्विक स्तर पर सपने देखने के भारतीय उद्यमों के साहस को सीधी चुनौती थी। इसने हमारे शासन, उद्देश्य और इस विचार पर भी सवाल उठाया कि भारतीय कंपनियां पैमाने और महत्वाकांक्षा के मामले में दुनिया का नेतृत्व करने का साहस कर सकती हैं।”

आरोप और समूह की प्रतिक्रिया

इन मामलों में अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड, अदाणी पोर्ट्स लिमिटेड, अदाणी एनर्जी लिमिटेड और अदाणी पावर लिमिटेड पर कुछ शेयरधारकों को गलत तरीके से सार्वजनिक शेयरधारकों के रूप में वर्गीकृत करने का आरोप लगाया गया था। अदाणी समूह ने अपने नवीनतम वित्तीय विवरणों में स्पष्ट किया कि सेबी इस वर्गीकरण की जांच कर रहा है।

गौतम अदाणी ने कहा, “हिंडनबर्ग रिपोर्ट का उद्देश्य हमें चोट पहुंचाना था, लेकिन वह हमारी नींव को मजबूत करने में निर्णायक मोड़ साबित हुई। यह आपका विश्वास और धैर्य था जिसने हमें स्थिर और साहसी बनाया। इस असाधारण समर्थन के लिए मैं आपका तहे दिल से आभारी हूं।”

अदाणी समूह का यह पत्र न केवल निवेशकों को विश्वास दिलाने का प्रयास है, बल्कि यह भारत की उद्यमिता और वैश्विक महत्वाकांक्षा को लेकर एक संदेश भी है। हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बावजूद समूह ने अपने मूल्यों और रणनीति को मजबूती से कायम रखा है।

 

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