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Global Governance News- Asia's First Bilingual News portal for Global News and UpdatesBlogभारतकेंद्र सरकारकेंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी ने आज इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र-आईजीएनसीए में तीन दिवसीय उत्तर पूर्वी उत्सव ‘ईशान मंथन’ का किया उद्घाटन

केंद्रीय मंत्री किशन रेड्डी ने आज इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र-आईजीएनसीए में तीन दिवसीय उत्तर पूर्वी उत्सव ‘ईशान मंथन’ का किया उद्घाटन

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 25मार्च। केंद्रीय संस्कृति, पर्यटन और उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी ने आज नई दिल्ली में इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र में ‘ईशान मंथन’ नामक तीन दिवसीय उत्तर पूर्वी उत्सव का उद्घाटन किया। आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी, जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय-जेएनयू के कुलपति प्रो. शांतिश्री धुलीपुडी पंडित और प्रज्ञा प्रवाह के राष्ट्रीय संयोजक श्री जे नंदकुमार भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए। तीन दिवसीय कार्यक्रम 25 से 27 मार्च तक पश्चिमी न्यायालय के पास कला केंद्र के परिसर में उत्तर पूर्वी भारत की संस्कृति, कला, संगीत, लोक नृत्य, हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों से परिचित होने का अवसर प्रदान करेगा। कार्यक्रम सवेरे 10 बजे से रात्रि 10 बजे तक चलेगा। दर्शक-श्रोता विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आनंद उठा सकेंगे और साथ ही हस्तशिल्प, वस्त्र और अन्य सामान सीधे पूर्वोत्तर के कारीगरों से खरीद सकेंगे।

इस अवसर पर अपने सम्बोधन में श्री जी. किशन रेड्डी ने कहा, “ईशान मंथन कार्यक्रम पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध जातीयता और रंगों का उत्सव मनाने के लिए तीन दिवसीय उत्सव है और यह एक भारत श्रेष्ठ भारत के संकल्प को पूरा करने में मदद करेगा। पूर्वोत्तर क्षेत्र में लगभग 400 समुदाय रहते हैं जो 200 से अधिक भाषाएं बोलते हैं। उत्तर-पूर्व के लोगों की सादगी और विनम्रता उन्हें एक विशिष्ट पहचान प्रदान करती है।”

श्री रेड्डी ने कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की सरकार उत्तर पूर्व क्षेत्र के कल्याण और विकास के लिए काम कर रही है। हमने रेल, सड़क, वायुमार्ग और जलमार्ग के सभी चार माध्यमों के माध्यम से सम्पर्क सुविधा को प्राथमिकता दी है। पिछले साढ़े सात वर्षों में इस क्षेत्र के बजट में 110 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि हुई है, जो इस क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने की हमारी प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है।”
उद्घाटन सत्र के बाद पूर्वोत्तर भारत की स्वदेशी आस्था, असम और मिथिलांचल के विवाह गीतों पर प्रदर्शन, पूर्वोत्तर के गुमनाम स्वतंत्रता सेनानियों पर चर्चा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों पर बातचीत हुई। यह आयोजन पूर्वोत्तर की फिल्मों, कला और हस्तशिल्प के बारे में भी जानकारी प्रदान करेगा। हर दिन विभिन्न राज्यों के लोक नृत्य और संगीत की प्रस्तुति भी होगी। पहले दिन सिक्किम के सोफियम बैंड ने अपनी प्रस्तुति दी और दूसरे दिन अरुणाचल के ‘करपाक करदांग’ और तीसरे दिन नागालैंड के ‘टेटेसियो सिस्टर्स बैंड’ के संगीतमय प्रदर्शन का आनंद लिया जा सकता है। कोहिमा का टेटेसियो सिस्टर्स का बैंड अब देश-दुनिया में मशहूर है। मुत्सेवेलु, अज़ीन, कुवेलु और अलुने नाम की इन बहनों को मर्सी, अजी, कुकू और लुलु के नाम से भी जाना जाता है। परंपरागत रूप से, लोक गीत ‘ली’ के इन गायकों ने चोकरी बोली में देश के अलावा थाईलैंड, म्यांमार, चीन, कोरिया और अमेरिका आदि देशों में प्रदर्शन किया है।

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