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बड़ा सोचें और समाज की आकांक्षाओं के साथ-साथ वैश्विक उत्तरदायित्वों को पूरा करने के विज़न के साथ आगे बढ़ें – धर्मेंद्र प्रधान

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 8अक्टूबर। केंद्रीय शिक्षा और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को पुणे में गोखले इंस्टीट्यूट ऑफ पॉलिटिक्स एंड इकोनॉमिक्स (जीआईपीई) के 29वें दीक्षांत समारोह को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित किया। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री चंद्रकांत पाटिल, जीआईपीई के कुलपति डॉ. अजीत रानाडे, अन्य गणमान्य व्यक्ति, शिक्षाविद्, प्रोफेसर और छात्र भी उपस्थित थे।

प्रधान ने दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए डिग्री प्राप्त करने वाले छात्रों को बधाई दी और उन्हें दक्षताओं और जीवन कौशल के निर्माण पर बल देने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि जीआईपीई विचारों का मिश्रण स्थल है और अनुभवमूलक शिक्षा का केंद्र रहा है।

उन्होंने उल्लेख किया कि देश की प्रतिभाशाली युवा शक्ति के कारण भारत अगले पच्चीस वर्षों में सबसे अधिक विकास वाला स्थान बनने जा रहा है। उन्होंने उनसे बड़ा सोचने और समाज की आकांक्षाओं के साथ-साथ वैश्विक उत्तरदायित्वों को पूरा करने के विज़न के साथ आगे बढ़ने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि इक्कीसवीं सदी एक ज्ञान-आधारित समाज होने जा रही है जहां विकास, वृद्धि, अर्थव्यवस्था और समाज के लिए प्राथमिक स्रोत ज्ञान होगा। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारतीयों पर अब वैश्विक जिम्मेदारियां हैं और उनके विज़न और कार्य पूरे विश्व की ओर निर्देशित होने चाहिए।

प्रधान ने भारत के संविधान के निर्माण के दौरान संस्थान के महत्वपूर्ण योगदान के साथ-साथ स्वतंत्रता के बाद के कई महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णयों को रेखांकित किया, जिनमें कृषि, शिक्षा, कृषि वस्तुओं की कीमत, परिवार नियोजन, बैंकिंग और यहां चलाए गए सहकारी आंदोलन पर आर्थिक अनुसंधान शामिल हैं।

बाद में,धर्मेंद्र प्रधान ने पुणे के सावित्रीबाई फुले विश्वविद्यालय में विद्यार्थी सम्मान समारोह में भाग लिया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री प्रधान ने पुणे शहर के महत्व पर बल दिया। उन्होंने उल्लेख किया कि कैसे इस शहर ने भारतीय सभ्यता को दिशा दिखाने में अग्रणी भूमिका निभाई है और सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय इसके केंद्रों में से एक रहा है। उन्होंने कहा कि आज उभरती अर्थव्यवस्थाओं को भारत के नेतृत्व वाले मॉडलों से बहुत उम्मीदें हैं और पुणे में इन उम्मीदों को पूरा करने की क्षमता है।

उन्होंने शिक्षा, नीतिगत निर्णय, अकादमिक क्षेत्र पर अनुसंधान, कल्याण-केंद्रित शासन और महिलाओं के नेतृत्व वाले विकास, वैज्ञानिक अनुसंधान तथा अन्य के विचार को शामिल करने सहित और कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में पुणे के योगदान पर जोर दिया।

उन्होंने वैश्विक पर्यावरण स्वास्थ्य के प्रसिद्ध प्रोफेसर किर्क आर स्मिथ, जिन्होंने पुणे में कुछ समय तक काम किया, द्वारा दिए गए महत्वपूर्ण सुझावों का भी उल्लेख किया। प्रधान ने कहा कि समाज के आर्थिक रूप से निर्बल वर्गों के लिए एलपीजी सब्सिडी के उनके सुझावों के कारण उज्ज्वला योजना की शुरुआत हुई।

प्रधान ने पुणे के सिम्बायोसिस अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय में सिम्बायोसिस ईशान्य भवन का उद्घाटन किया।

आज के कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्तियों को सम्मानित किया गया जिनमें प्राज इंडस्ट्रीज के डॉ. प्रमोद चौधरी; सिम्बायोसिस इंटरनेशनल (डीम्ड यूनिवर्सिटी) के चांसलर प्रोफेसर डॉ. एस.बी. मुजुमदार; प्रसिद्ध आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. के.एच. संचेती; कथक प्रतिपादक शमा भाटे और प्रसिद्ध लेखिका  अरुणा धेरे शामिल थीं।

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