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  • लोकतंत्र को मिले मजबूती और देश संविधान अनुसार चले, यही हमारी सोचः मुख्यमंत्री

    लोकतंत्र को मिले मजबूती और देश संविधान अनुसार चले, यही हमारी सोचः मुख्यमंत्री

    समग्र समाचार सेवा
    नई दिल्ली, 30 मई।राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने सोमवार शाम नई दिल्ली के पृथ्वीराज रोड़ स्थित राजस्थान हाउस के पुनर्निर्माण कार्य की आधारशिला रखी। उन्होंने वैदिक मंत्रोच्चारण के साथ पूजा-अर्चना करते हुए शिलान्यास किया।
    गहलोत ने इस अवसर पर कहा कि ऐतिहासिक राजस्थान हाउस का पुनर्निर्माण कार्य हमारी प्राथमिकता रही है। राजस्थान से दिल्ली आने वाले आगंतुकों को नए हाउस में उच्च स्तरीय सुविधाएं मिलेंगी। इस राजकीय गेस्ट हाउस के पुनर्निर्माण में राजस्थान की कलात्मक स्थापत्य शैली का खूबसूरत तरीके से समन्वय किया जाएगा।
    मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार दिल्ली के राजस्थान व बीकानेर हाउस सहित प्रदेश के सर्किट हाउस तथा डाक बंगलों जैसे ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण भवनों को मजबूती प्रदान कर रही है।
    गहलोत ने कहा कि लोकतंत्र को मजबूती मिले और देश संविधान के अनुसार चले, यही हमारी सोच रही है। इसी अनुरूप प्रदेश में गरीब-अमीर के बीच की खाई को दूर करने के लिए बजट घोषणाएं की गई है। महंगाई राहत कैंपों के जरिए महंगाई से राहत दिलाने की संकल्पना साकार हो रही है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने पानी, शिक्षा, सड़क, स्वास्थ्य सहित राज्य के चहुमुंखी विकास में रिकाॅर्ड कायम किए हैं। मुख्यमंत्री चिरंजीवी स्वास्थ्य बीमा योजना में 25 लाख रुपए के निःशुल्क इलाज जैसी सुविधा अन्य किसी भी राज्य में नहीं है।
    आवासीय आयुक्त  धीरज श्रीवास्तव ने बताया कि भवन के निर्माण की योजना में राजस्थान शैली के मूल तत्वों तथा वास्तुकला सामग्री के साथ प्रदेश की भावना, संस्कृति एवं परंपरा को प्रमुखता से समन्वित किया गया है। उन्होंने बताया कि नवीन राजस्थान हाउस की निर्माण योजना में ग्रीन काॅन्सेप्ट, वाटर हार्वेसिं्टग, सोलर सिस्टम, वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम का भी ध्यान रखा गया है।
    ऐसा होगा नवीन राजस्थान हाउस
    नई दिल्ली के ‘लुटियंस जोन’ में 7050 वर्ग मीटर में बनने वाला नवीन राजस्थान हाउस, राजस्थान सरकार का एक राजकीय गेस्ट हाउस है। नवीन राजस्थान हाउस में दो बेसमेंट, भूतल और 6 फ्लोर का प्रावधान रखा गया है। भवन के बेसमेंट में पार्किंग भी बनाई जाएगी। मुख्य भवन में लॉबी, कैफेटेरिया, वेटिंग एरिया, डाईनिंग एरिया, फव्वारा, हैंगिंग झूमर, एट्रियम आदि का निर्माण किया जाएगा। भवन की बाहरी दीवार पर धौलपुर सैण्ड स्टोन क्लेडिंग का कार्य किया जाएगा। प्रथम तल पर काॅन्फ्रंेस हाॅल, पुस्तकालय और जिम का भी निर्माण किया जाना प्रस्तावित है। छत पर टैरेस गार्डन, पार्टी हॉल, योग कक्ष आदि का भी निर्माण होना है।
    नेहरू यूथ ट्रांजिट हाॅस्टल का भी निर्माण
    आवासीय आयुक्त  धीरज श्रीवास्तव ने बताया कि राजस्थान के विभिन्न प्रान्तों से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए दिल्ली आने वाले विद्यार्थियों की सुविधा के लिए नेहरू यूथ ट्रांजिट हाॅस्टल एवं सुविधा केन्द्र बनाया जा रहा है। इसके लिए 256.91 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी जा चुकी है। जिससे उनको होने वाली समय एवं धन की हानि को न्यूनतम किया जा सकेगा तथा उनको एक ही स्थान पर रहने, खाने एवं पढ़ने की सुविधा मिल सकेगी। नई दिल्ली स्थित बीकानेर हाउस को भी अन्तर्राष्ट्रीय स्तर के कला एवं सांस्कृतिक केन्द्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसके लिए 42.89 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी जा चुकी है। इसके अंतर्गत एम्फीथिएटर, आर्ट गैलेरी, आॅफिस ब्लाॅक, इन्डोर थिएटर, स्टाॅफ क्वार्टर्स, सुरक्षा स्टाॅफ क्वार्टर्स सहित विभिन्न निर्माण कार्य किए जाएंगे।
    शिलान्यास समारोह में सार्वजनिक निर्माण मंत्री  भजन लाल जाटव, विधायक वाजिब अली, मुख्य सचिव  उषा शर्मा, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की अतिरिक्त मुख्य सचिव  शुभ्रा सिंह, वित्त विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव अखिल अरोड़ा, प्रमुख शासन सचिव  कुलदीप रांका, सार्वजनिक निर्माण विभाग के प्रमुख सचिव  वैभव गालरिया, सामान्य प्रशासन विभाग के प्रमुख सचिव दिनेश कुमार, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग के संयुक्त सचिव राजेश यादव सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी एवं आमजन उपस्थित रहे।

  • फिल्में पूरे विश्व में कहानी कहने के क्षेत्र में भारत की मजबूती को दिखाती हैं: डॉ. एल मुरूगन

    फिल्में पूरे विश्व में कहानी कहने के क्षेत्र में भारत की मजबूती को दिखाती हैं: डॉ. एल मुरूगन

    समग्र समाचार सेवा
    नई दिल्ली, 18मई। केंद्रीय सूचना और प्रसारण राज्य मंत्री डॉ. एल मुरूगन ने कान्स फिल्म महोत्सव में भारत पवेलियन का उद्घाटन किया। इस अवसर पर फ्रांस में भारत के राजदूत जावेद अशरफ, सूचना और प्रसारण मंत्रालय में संयुक्त सचिव पृथुल कुमार व भारतीय फिल्म उद्योग के प्रमुख चेहरे उपस्थित थे।

    इस अवसर पर राज्य मंत्री ने फिल्मी सितारों और अधिकारियों सहित भारत के प्रतिनिधियों की एक सभा को संबोधित किया। डॉ. मुरूगन ने कहा कि आज भारत 50 से अधिक भाषाओं में 3,000 से अधिक फिल्मों के निर्माण के साथ विश्व का सबसे बड़ा फिल्म निर्माता है। ये फिल्में कहानी कहने को लेकर पूरे विश्व में भारत की मजबूत स्थिति का एक संदेश देती हैं।

    उन्होंने मुदुमलाई के प्रसिद्ध एलीफेंट व्हिस्परर्स का उदाहरण देकर यह रेखांकित किया कि आज अच्छी सामग्री की कोई सीमा नहीं है और हम एक ऐसा युग देख रहे हैं, जहां भारतीय सामग्री की प्रकृति स्थानीय से वैश्विक हो रही है।

    डॉ. मुरुगन ने वैश्विक स्तर पर भारतीय फिल्मों और फिल्म निर्माताओं की हालिया शानदार सफलता का उल्लेख किया। उन्होंने आगे कहा कि आज एनीमेशन या वीएफएक्स के क्रेडिट में भारतीय नाम के बिना एक फिल्म ढूंढना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि हालिया वर्षों में भारतीय फिल्म उद्योग में नई प्रौद्योगिकियों को अपनाने और डिजिटल व स्ट्रीमिंग प्लेटफार्मों के उभरने के साथ महत्वपूर्ण परिवर्तन हुए हैं।

    डॉ. मुरुगन ने बताया कि भारतीय मीडिया और मनोरंजन क्षेत्र साल 2023 में 11.4 फीसदी की असाधारण वृद्धि दर को प्राप्त करने के लिए तैयार है और इसका राजस्व 2.36 लाख करोड़ रुपये के चौंकाने वाले स्तर पर पहुंच गया है। यह उल्लेखनीय बढ़ोतरी तेजी से विकसित हो रहे डिजिटल परिदृश्य में भारत के मीडिया और मनोरंजन उद्योग की मजबूती व नए अवसर उत्पन्न करने की क्षमता का एक साक्ष्य है। उन्होंने आगे कहा कि कोविड महामारी के बाद भारत में कुल बॉक्स ऑफिस राजस्व साल 2021 के राजस्व की तुलना में 2022 में लगभग तीन गुना बढ़कर 1.3 बिलियन अमेरीकी डॉलर हो गया और इस आंकड़े की 2025 तक 3 बिलियन अमेरीकी डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।

    डॉ. मुरुगन ने भारत में फिल्म इकोसिस्टम को मजबूत करने की दिशा में मंत्रालय के किए गए उपायों का उल्लेख किया। डॉ. मुरूगन ने कहा कि डिजिटल इंडिया, स्टार्ट अप इंडिया, ग्रामीण टेलीकॉम कनेक्टिविटी और डेटा की वहनीयता व उपलब्धता के लिए सकारात्मक वातावरण का निर्माण करने वाले नीतिगत सुधारों के माध्यम से विभिन्न पहल एक रचनात्मक अर्थव्यवस्था की मजबूत नींव तैयार कर रही हैं। उन्होंने आगे कहा, “आईटी क्षेत्र की हमारी विशेष तकनीकी क्षमता प्रतिभाशाली कलाकारों की बड़ी संख्या के साथ मिल गई है, जो भारत को वैश्विक सिनेमा के लिए सामग्री निर्माता के रूप में सेवा करने के लिए सबसे उपयुक्त बनाती है। हमारी सरकार ने इस क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए एक कार्य बल का गठन किया था। इसके अलावा एवीजीसी के लिए एक राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र भी प्रस्तावित है।”

    डॉ. मुरूगन ने भारत को विदेशी फिल्मों के लिए एक आकर्षक फिल्म स्थल के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि सरकार भारत को शूटिंग, सह-निर्माण, एनीमेशन और कम लागत वाले पोस्ट-प्रोडक्शन के संबंध में अंतरराष्ट्रीय फिल्म उद्योग के लिए एक आकर्षक स्थल के रूप में विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

    डॉ. मुरुगन ने आशा व्यक्त की कि पिछले साल कान्स में केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर द्वारा फिल्म प्रोत्साहन की घोषणा के बाद कान्स- 2023 में भारत की शानदार उपस्थिति इस प्रगति को और आगे ले जाएगी। भारत की जी-20 अध्यक्षता की तैयारियों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “हम संस्कृति और पर्यटन के महत्व पर विशेष जोर दे रहे हैं। हमारा उद्देश्य संस्कृति को समावेशी, स्थायी सामाजिक- आर्थिक सुधार और विकास के लिए एक प्रेरक शक्ति के रूप में स्थापित करने को लेकर मीडिया और मनोरंजन की शक्ति का लाभ उठाना है, जो सभी के लिए उज्जवल भविष्य का मार्ग तैयार करता है। एक पृथ्वी- एक परिवार- एक भविष्य ही आगे बढ़ने का निश्चित रास्ता है।”

    केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने एक वीडियो संदेश के माध्यम से सभा को संबोधित किया। अपने संदेश में मंत्री ने कहा कि ‘कान्स फिल्म महोत्सव’ ने न केवल हमारी सिनेमाई उत्कृष्टता को बढ़ावा दिया है बल्कि, भारत-फ्रांस संबंधों को मजबूत करने में भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

    उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस साल पहली बार हमने कान्स फिल्म महोत्सव में भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों के प्रतिभाशाली फिल्म निर्माताओं के एक आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल को भेजा है। उन्होंने बताया कि हम देश के भीतर फिल्म निर्माण में क्षेत्रीय विविधता को मान्यता और बढ़ावा देते हैं, ऐसी स्थिति में यह विचार कान्स में भारत की समृद्ध सिनेमाई संस्कृति की गहराई व विविधता लाने के लिए है। उन्होंने श्रोताओं को सूचित किया कि भारतीय राष्ट्रीय फिल्म संग्रहालय ने इस साल कान्स क्लासिक श्रेणी में चुनी गई मणिपुरी भाषा की फिल्म ‘ईशानौ’ के नेगेटिव का डिजिटलीकरण कर दिया है।

    अनुराग ठाकुर ने आगे कहा कि 3 अलग-अलग श्रेणियों में 3 फिल्मों को शॉर्टलिस्ट किया गया और उनमें से 2 को ऑस्कर प्राप्त हुआ- इससे विश्व ने भारतीय फिल्म उद्योग की रचनात्मकता, सामग्री और तकनीकी क्षमताओं को देखा है। उन्होंने आगे कहा कि दमदार कहानी, उच्चस्तरीय कौशल-आधारित सामग्री निर्माण व पोस्ट-प्रोडक्शन क्षमताओं और 16 देशों के साथ सह-निर्माण संधियों के साथ, भारत पूरे विश्व में फिल्म निर्माताओं के लिए एक आकर्षक स्थल के रूप में उभरा है।

    इससे पहले फ्रांस में भारत के राजदूत जावेद अशरफ ने सभा को संबोधित किया। उन्होंने कान्स और अन्य महोत्सवों में एक बड़ी व अधिक संगठित उपस्थिति के साथ भारतीय फिल्मों को बढ़ावा देने के लिए अधिक उत्साहजनक दृष्टिकोण का आह्वाहन किया। जावेद अशरफ ने आगे कहा कि लोगों की बड़ी संख्या में उपस्थिति भारतीय सिनेमा के स्तर और मजबूती के साथ न्याय करेगी।

    कान्स फिल्म महोत्सव के कार्यकारी निदेशक गुइलौम एस्मिओल ने कहा कि एक मजबूत बाजार होने के साथ फिल्म उद्योग के स्तर को देखते हुए भारत वैश्विक फिल्म उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण देश है।

    इसके अलावा इस कार्यक्रम के दौरान नवंबर, 2023 में गोवा में आयोजित होने वाले 54वें भारतीय फिल्म महोत्सव के पोस्टर और ट्रेलर का अनावरण भी किया गया।

  • भारत ने विभिन्न चर्चाओं में अपना पक्ष बड़ी मजबूती से रखा: भूपेंद्र यादव

    भारत ने विभिन्न चर्चाओं में अपना पक्ष बड़ी मजबूती से रखा: भूपेंद्र यादव

    समग्र समाचार सेवा
    नई दिल्ली, 04मई। केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि पीटर्सबर्ग जलवायु संवाद बर्लिन में संपन्न हुआ। इस सम्मेलन में प्रतिनिधियों ने सीओपी28 के दौरान किये जाने वाले सम्मिलित फैसलों के लिए आधार तैयार करने की दिशा में कार्रवाई को पूरा किया। भूपेंद्र यादव ने कई ट्वीट्स करते हुए यह जानकारी दी है कि वैश्विक उत्सर्जन में भारी कटौती और नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के लिए पीटर्सबर्ग जलवायु संवाद में वैश्विक तथा आवश्यक लक्ष्य निर्धारित करने के उद्देश्य से व्यापक सहमति बनी थी।

    केंद्रीय मंत्री यादव ने कहा कि भारत ने विभिन्न चर्चाओं में अपना पक्ष बड़ी मजबूती से रखा। उन्होंने बताया, जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इन मुद्दों पर ध्यान दिया गया है, तो इस कार्यक्रम में उन्हें दोहराया गया था कि किसी को भी पीछे न छोड़ने की भावना से न्यायोचित, सस्ती और समावेशी ऊर्जा पारेषण की दिशा में सहयोग की आवश्यकता को समझना काफी महत्वपूर्ण है।

    केंद्रीय मंत्री यादव ने कहा कि स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराने के मार्ग का अनुसरण करते हुए स्थानीय आबादी और सार्वजनिक अर्थव्यवस्था में आजीविका के अवसरों को बनाए रखने के लिए अर्थव्यवस्था में विविधता लाने और रोजगार के नये मौके तैयार करने पर ध्यान देने की जरूरत है। विशेषकर उन पर, जो मौजूदा ऊर्जा प्रणाली पर निर्भर रहते हैं।

    इससे पहले केंद्रीय मंत्री यादव ने ‘सार्वभौमिक बदलाव के लिए वैश्विक स्टॉकटेक और रोडमैप पर रणनीतिक संवाद’ पर आयोजित सत्र को संबोधित किया।

    केंद्रीय मंत्री ने कई मुद्दों के साथ इस तथ्य का उल्लेख भी किया कि वैश्विक स्टॉकटेक परिणाम को इन बातों पर ध्यान देना चाहिए, जलवायु परिवर्तन के प्रभाव, कार्रवाईयों और प्रतिक्रियाओं का गरीबी उन्मूलन सहित विकासशील देशों की विकासात्मक प्राथमिकताओं पर क्या प्रभाव पड़ता है। उन्होंने कहा कि पहले वैश्विक स्टॉकटेक के परिणाम को राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) के अगले दौर ले जाना चाहिए और फिर अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ाने के उद्देश्य से टिकाऊ जीवन शैली के साथ-साथ स्थायी खपत के मुद्दे पर एक संदेश प्रसारित होना चाहिए।

    https://twitter.com/byadavbjp/status/1653810411119214593?ref_src=twsrc%5Etfw%7Ctwcamp%5Etweetembed%7Ctwterm%5E1653810411119214593%7Ctwgr%5Ea758a51ac6109ab4f1a1851d489143306d8eb92c%7Ctwcon%5Es1_&ref_url=https%3A%2F%2Fpib.gov.in%2FPressReleasePage.aspx%3FPRID%3D1921955

  • “तुर्किए और सीरिया में भूकंप के बाद पूरी दुनिया ने भारत के आपदा प्रबंधन प्रयासों की भूमिका को समझा एवं सराहा है”:प्रधानमंत्री

    “तुर्किए और सीरिया में भूकंप के बाद पूरी दुनिया ने भारत के आपदा प्रबंधन प्रयासों की भूमिका को समझा एवं सराहा है”:प्रधानमंत्री

    समग्र समाचार सेवा
    नई दिल्ली ,11 मार्च। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने नई दिल्‍ली में आपदा जोखिम न्‍यूनीकरण के लिए राष्‍ट्रीय मंच (एनपीडीआरआर) के तीसरे सत्र का उद्घाटन किया। इस मंच के तीसरे सत्र की मुख्य थीम ‘बदलती जलवायु में स्थानीय स्‍तर पर मजबूती सुनिश्चित करना’ है।

    इस आयोजन के दौरान प्रधानमंत्री ने सुभाष चंद्र बोस आपदा प्रबंधन पुरस्कार विजेताओं को सम्मानित भी किया। 2023 पुरस्कार के विजेता ओडिशा राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ओएसडीएमए) और लुंगलेई फायर स्टेशन, मिजोरम हैं। प्रधानमंत्री ने आपदा जोखिम न्यूनीकरण के क्षेत्र में अभिनव विचारों, पहलों, उपकरणों और प्रौद्योगिकियों को प्रदर्शित करने के लिए एक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह, गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय सहित अनेक गणमान्‍य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।

    इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने हाल ही में तुर्कि‍ए और सीरिया में भारतीय बचाव दल के उत्‍कृष्‍ट कार्यों की वैश्विक प्रशंसा का उल्लेख किया, जिसने हर भारतीय को गौरवान्वित किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने जिस तरह से आपदा प्रबंधन से जुड़ी तकनीक और मानव संसाधन का विस्तार किया है, उससे देश में भी अनेक जीवन बचाने में मदद मिली है। उन्होंने कहा कि ये पुरस्कार आपदा प्रबंधन प्रणाली को मजबूत करने और बढ़ावा देने और स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए शुरू किए गए हैं। प्रधानमंत्री ने इन दोनों ही पुरस्कार विजेताओं की सराहना की।

    प्रधानमंत्री ने कहा कि कार्यक्रम की थीम ‘बदलती जलवायु में स्थानीय स्‍तर पर मजबूती सुनिश्चित करना’ भारतीय परंपरा से परिचित है क्योंकि यह कुओं, वास्तुकला और पुराने शहरों में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने कहा, भारत में आपदा प्रबंधन की व्यवस्था, समाधान और रणनीति हमेशा स्थानीय रही है। उन्होंने कच्छ के भुंगा घरों का उदाहरण दिया जो काफी हद तक भूकंप से बचे रहे। प्रधानमंत्री ने नई तकनीकों के अनुसार आवास और नगर नियोजन के स्थानीय मॉडल विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘नई तकनीक के साथ स्थानीय प्रौद्योगिकी और सामग्री को समृद्ध करना समय की आवश्यकता है। जब हम स्थानीय मजबूती के उदाहरणों को भविष्य की तकनीक से जोड़ेंगे, तभी हम आपदा प्रतिरोधक क्षमता की दिशा में बेहतर कर पाएंगे।’

    प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि बीते वर्षों की जीवनशैली बहुत आरामदायक थी और यह हमारा अनुभव ही था, जिसने हमें सूखे, बाढ़ और लगातार बारिश, जैसी प्राकृतिक आपदाओं से निपटना सिखाया। उन्होंने बताया कि पिछली सरकारों के लिए यह स्वाभाविक था कि उन्होंने आपदा राहत को कृषि विभाग के अंतर्गत रखा। उन्होंने याद किया कि जब भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदा आती थी, तो उससे स्थानीय स्तर पर स्थानीय संसाधनों की मदद से निपटा जाता है। प्रधानमंत्री ने कहा, हालांकि, यह एक छोटी-सी दुनिया है, जिसमें हम आज रहते हैं, जहां एक दूसरे के अनुभवों और प्रयोगों से सीखना एक नियम बन गया है। उन्होंने कहा कि दूसरी ओर, प्राकृतिक आपदाओं के शुरू होने की संख्या में भी वृद्धि हुई है। गांव का एकमात्र चिकित्सक, जो सभी का इलाज करता है– इस बात की तुलना करते हुए प्रधानमंत्री ने इस तथ्य पर प्रकाश डाला कि हमारे पास आज हर बीमारी के लिए विशेषज्ञ डॉक्टर हैं। इसी तरह, प्रधानमंत्री ने प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए एक गतिशील प्रणाली विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि पिछली शताब्दी की प्राकृतिक आपदाओं का अध्ययन करके एक सटीक अनुमान लगाया जा सकता है। उन्होंने इन विधियों- चाहे अध्ययन सामग्री हो या प्रणाली, को समय रहते संशोधित करने पर जोर दिया।

    प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया, “मान्यता और सुधार आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के दो प्रमुख घटक हैं।“ उन्होंने स्पष्ट किया कि मान्यता, प्राकृतिक आपदाओं से उत्पन्न संभावित खतरों की पहचान करने में मदद करेगी और इस बात का पता लगाने कि यह भविष्य में कब आ सकती है, में भी सहायता करेगी; जबकि सुधार एक ऐसी प्रणाली है, जहां संभावित प्राकृतिक आपदा के खतरों को कम किया जाता है। उन्होंने व्यवस्था को समयबद्ध तरीके से और अधिक सक्षम बनाने और इसमें सुधार करने का सुझाव दिया व शॉर्ट-कट के बजाय दीर्घकालिक सोच के दृष्टिकोण पर बल दिया। उन्होंने पिछले वर्षों में पश्चिम बंगाल और ओडिशा में आए चक्रवातों के कारण हुई सैकड़ों मौतों को याद करते हुए कहा कि समय और रणनीतियों में बदलाव के साथ, भारत अब चक्रवातों से निपटने में सक्षम है, जिसमें जीवन और संपत्ति का नुकसान कम से कम हो। प्रधानमंत्री ने प्रतिक्रियात्मक होने के बजाय एक सक्रिय दृष्टिकोण अपनाने पर जोर दिया और कहा, “हम प्राकृतिक आपदाओं को रोक नहीं सकते हैं, लेकिन हम निश्चित रूप से बेहतर रणनीतियों और प्रणालियों के उपयोग से इसके प्रभावों को कम कर सकते हैं।“

    प्रधानमंत्री ने आजादी के बाद के वर्षों में आपदा प्रबंधन की खराब स्थिति के बारे में बात की। उन्होंने बताया कि पांच दशक बीत जाने के बाद भी आपदा प्रबंधन को लेकर कोई कानून नहीं था। गुजरात पहला ऐसा राज्य था, जो 2001 में राज्य आपदा प्रबंधन अधिनियम लेकर आया। तत्कालीन केंद्र सरकार ने इस अधिनियम के आधार पर आपदा प्रबंधन अधिनियम लागू किया। इसके बाद, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण अस्तित्व में आया।

    प्रधानमंत्री ने स्थानीय निकायों में आपदा प्रबंधन प्रशासन को मजबूत बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। “हमें योजना को संस्थागत रूप प्रदान करना होगा और स्थानीय योजना की समीक्षा करनी होगी। पूरी व्यवस्था में आमूल-चूल बदलाव की आवश्‍यकता को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने दो स्तरों पर काम करने का आह्वान किया। पहला, आपदा प्रबंधन विशेषज्ञों को जनभागीदारी पर ज्यादा ध्यान देना होगा। उन्होंने भूकंप, चक्रवात, आग और अन्य आपदाओं के खतरों के बारे में लोगों को जागरूक करने की निरंतर प्रक्रिया पर बल दिया। इस संबंध में उचित प्रक्रिया, अभ्‍यास और नियमों के बारे में जागरूकता प्रदान करना महत्वपूर्ण है। उन्होंने हितधारकों से गांव और पड़ोस के स्तर पर प्रशिक्षित ‘युवक मंडलों’ और ‘सखी मंडलों’ का उपयोग करने का अनुरोध करते हुए कहा, “स्थानीय भागीदारी से स्थानीय स्तर पर मजबूती के मंत्र का पालन करने से ही आपको सफलता मिलेगी।” उन्होंने आपदा मित्र, एनएसएस-एनसीसी, सेवानिवृत्‍त सैनिकों के तंत्रों को और मजबूत बनाने व सामुदायिक केंद्रों में पहली प्रतिक्रिया के लिए उपकरण सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया, क्योंकि बचाव कार्य समय पर शुरू होने से कई लोगों की जान बचाई जा सकती है।

    दूसरे स्तर पर, प्रधानमंत्री ने प्रौद्योगिकी का उपयोग करते हुए वास्तविक समय में पंजीकरण और निगरानी प्रणाली की बात कही। उन्होंने कहा, “घरों के टिकाऊपन, जल निकासी, बिजली और पानी के बुनियादी ढांचे के लचीलेपन जैसे पहलुओं के संबंध में जानकारी सक्रिय कदम उठाने में मदद करेगी।” प्रधानमंत्री ने हीटवेव के बारे में आयोजित की गई अपनी हाल की समीक्षा बैठक के दौरान अस्पताल में आग की घटनाओं के संबंध में हुई चर्चा के बारे में बताया कि कैसे अस्पताल में आग की घटना से निपटने की तैयारी की नियमित समीक्षा करने से जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।

    प्रधानमंत्री ने पिछले कुछ वर्षों में विशेष रूप से बढ़ती गर्मी के साथ अस्पताल, कारखाने, होटल या बहुमंजिला आवासीय भवन जैसे गहन शहरी क्षेत्रों में आग लगने की घटनाओं में वृद्धि होने का उल्लेख किया। उन्होंने घनी आबादी वाले उन इलाकों में, जहां वाहन से पहुंचना मुश्किल है, वहां बहुत व्यवस्थित तरीके से काम करने की चुनौतियों को रेखांकित करते हुए इसका समाधान तलाशने पर जोर दिया। प्रधानमंत्री ने औद्योगिक आग बुझाने के लिए पर्याप्त संसाधन सुनिश्चित करते हुए ऊंची इमारतों में लगी आग को बुझाने के लिए हमारे अग्निशामकों के कौशलों को लगातार बढ़ाने पर भी बल दिया।

    प्रधानमंत्री ने स्थानीय कौशल और उपकरणों के निरंतर आधुनिकीकरण की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने कहां कि स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को, वन ईंधन को जैव ईंधन में बदलने वाले उपकरण उपलब्ध कराने की संभावनाएं तलाशी जाएं। ताकि उनकी आय बढ़े और आग लगने की घटनाएं कम हों। उन्होंने ऐसे उद्योगों और अस्पतालों के लिए विशेषज्ञों का एक दल बनाने की भी बात की, जहां गैस रिसाव की संभावना अधिक हैं। इसी तरह, एम्बुलेंस नेटवर्कों को भविष्य के लिए तैयार करने की जरूरत पर बल देते हुए प्रधानमंत्री ने इस संबंध में एआई, 5जी और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी) के इस्तेमाल की संभावनाओं को तलाशने को कहा। उन्होंने हितधारकों से कहा कि वे ऐसे ड्रोन, अलर्ट करने वाले गैजेट्स और व्यक्तिगत गैजेट्स के उपयोग के बारे में पता लगाएं जो मलबे के नीचे दबे लोगों का पता लगाने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने विशेषज्ञों से अनुरोध किया कि वे ऐसे वैश्विक सामाजिक निकायों के कार्यों का अध्ययन करें जो नई प्रणाली और प्रौद्योगिकियों का निर्माण कर रहे हैं और सर्वोत्तम प्रथाओं को अपना रहे हैं।

    अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि भारत दुनिया भर में होने वाली आपदाओं पर तुरंत प्रतिक्रिया देता है और मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए पहल करता है। उन्होंने बताया कि दुनिया के 100 से अधिक देश भारत के नेतृत्व में गठित हुए ‘कोयलेशन फॉर डिजास्टर रज़ीलियंट इंफ्रास्ट्रक्चर’ में शामिल हो गए हैं। प्रधानमंत्री ने भरोसा व्यक्त किया कि आज की चर्चाओं से बहुत सारे सुझाव और समाधान निकलेंगे तथा इससे भविष्य के लिए कई कार्रवाई योग्य बिंदु सामने आएंगे। उन्होंने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा, “परंपरा और प्रौद्योगिकी हमारी ताकत हैं, और इस ताकत के साथ हम न केवल भारत के लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए आपदा प्रतिरोध से संबंधित सर्वश्रेष्ठ मॉडल तैयार कर सकते हैं।”

    केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अपने संबोधन में कहा कि NPDRR का ये तीसरा सत्र बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इस क्षेत्र में अब स्केल और स्पीड, दोनों बढ़ाने का समय आ गया है। उन्होंने कहा कि 1999 से लेकर आज तक के परिदृश्य में बहुत बड़ा बदलाव आया है क्योंकि साझा प्रयासों के कारण हमने न सिर्फ आपदाओं से होने वाली क्षति को कम करने में सफलता हासिल की है बल्कि अच्छी व्यवस्था के साथ पड़ोसियों को मदद करने और पूरे क्षेत्र में अर्ली वॉर्निंग सिस्टम स्थापित करने की दिशा में भी अनुकरणीय काम किया है। श्री शाह ने कहा कि भारत आपदा से सर्वाधिक प्रभावित होने वाले देशों में से एक है और 36 राज्यों और संघशासित प्रदेशों में से 27 राज्य और संघशासित प्रदेश आपदा-संभावित हैं। भारत की लगभग 50 प्रतिशत से अधिक आबादी भूकंप, बाढ़, समुद्रीय और तटीय चक्रवात, सूखे और सूनामी से प्रभावित है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए एक होलिस्टिक अप्रोच के साथ आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण को बदलने का काम किया है।

    श्री अमित शाह ने कहा कि पहले सरकार का दृष्टिकोष राहत-केन्द्रित होता था, लेकिन पिछले 9 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी के इनीशिएटिव के कारण अर्ली वॉर्निंग, सक्रिय निवारण, मिटिगेशन और पूर्वतैयारी-आधारित डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन के साथ अप्रोच में बदलाव आया है और इसके अच्छे परिणाम मिले हैं। आज NDMA और SDMA बहुत सुचारू रूप से आपसी संवाद और समन्वय के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि फरवरी, 2021 में नेश्नल डिज़ास्टर मिटिगेशन फंड का गठन किया गया और इसके अंतर्गत 13 हज़ार 700 करोड़ रूपए केन्द्र और 32 हज़ार करोड़ रूपए राज्यों द्वारा रखे गए हैं।

    केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि मोबाइल एप- मौसम, मेघदूत, दामिनी और क्राउड सोर्सिंग बहुत अच्छे तरीके से काम कर रहे हैं। श्री शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में पिछले 4 वर्षों में शीतलहर, भूकंप से सुरक्षा, छत को ठंडा रखने के लिए हाउसओनर्स के लिए, ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड, हीटवेव, भूस्ख्लन के जोखिम को कम करने, विकलांगता समावेशी आपदा जोखिम न्यूनीकरण, और, आपदा प्रभावित परिवारों के स्थायी आश्रय बनाने के लिए गाइडलाइन बनाई गई हैं। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी द्वारा दिए गए 10-सूत्रीय एजेंडा को गंतव्य तक पहुंचाने के लिए ये दो दिवसीय विचार-विमर्श और चिंतन बहुत उपयोगी सिद्ध होगा।

    उद्घाटन सत्र के बाद केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने ‘राज्यों में आपदा प्रबंधन प्रणाली को मजबूत बनाने’ पर मंत्रिस्तरीय सत्र की अध्यक्षता की। बैठक के पहले दिन ‘जलवायु परिवर्तन अनुकूलन और आपदा जोखिम में कमी: प्रकृति आधारित समाधान’ और ‘आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए स्थानीय प्रतिरोधी क्षमता निर्माण’ पर विषयगत सत्र भी आयोजित किए गए।

    एनपीडीआरआर आपदा जोखिम न्यूनीकरण के क्षेत्र में संवाद, अनुभवों, विचारों, कार्रवाई उन्मुख अनुसंधान को साझा करने और अवसरों का पता लगाने के लिए भारत सरकार द्वारा गठित एक बहु-हितधारक मंच है। राष्ट्रीय मंच के तीसरे सत्र का मुख्य विषय “बदलते माहौल में स्थानीय प्रतिरोधी क्षमता का निर्माण” है, जो स्थानीय क्षमताओं का निर्माण करने के लिए, विशेष रूप से तेजी से बदलते आपदा जोखिम परिदृश्य के संदर्भ में, प्रधानमंत्री के 10-सूत्रीय एजेंडे पर धारित है। इस कार्यक्रम में चार पूर्ण सत्र, एक मंत्रिस्तरीय सत्र और आठ विषयगत सत्र शामिल होंगे।

    यह बैठक अमृत काल के दौरान हो रही है और एनपीडीआरआर के तीसरे सत्र के विचार-विमर्श से सरकार को प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी के विज़न-2047 के तहत 2030 तक भारत को आपदा प्रतिरोधी बनाने में मदद मिलेगी।

  • भारत तुर्की के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है: प्रधानमंत्री

    भारत तुर्की के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है: प्रधानमंत्री

    समग्र समाचार सेवा
    नई दिल्ली, 11फरवरी। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि भारत ‘ऑपरेशन दोस्त’ के तहत अधिक से अधिक लोगों की जान बचाने का प्रयास करता रहेगा।

    तुर्की में भारतीय टीम द्वारा निभाई जा रही भूमिका के संबंध में विदेश मंत्रालय के एक ट्वीट का जवाब देते हुए, प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया:
    “हमारी टीमें ‘ऑपरेशन दोस्त’ के एक हिस्से के रूप में दिन-रात काम कर रही हैं। वे अधिक से अधिक लोगों का जीवन और संपत्ति को बचाने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ देना जारी रखेंगी। इस संकटपूर्ण घड़ी में, भारत तुर्की के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा है।”

  • “सबका प्रयास और जन-भागीदारी ने मुश्किल समय में सहायता की है”:श्रीमती निर्मला सीतारमण

    “सबका प्रयास और जन-भागीदारी ने मुश्किल समय में सहायता की है”:श्रीमती निर्मला सीतारमण

    ​​समग्र समाचार सेवा
    नई दिल्ली, 1 फ़रवरी। केन्द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज 01 फरवरी, 2023 को संसद में केन्द्रीय बजट 2023-24 पेश करते हुए अनेक संकटों के बीच भारत ने हासिल की गई मजबूती का श्रेय व्यापक सुधारों और ठोस नीतियों को दिया। उन्होंने कहा कि सबका प्रयास के माध्यम से जन भागीदारी प्राप्त हुई और जरूरतमंद लोगों को लक्षित समर्थन मिल सकता है। इससे हमें मुश्किल वक्त में अच्छा करने में मदद मिलेगी।

    भारत का दुनिया में बढ़ता कद
    संसद में आज केन्द्रीय बजट 2023-24 प्रस्तुत करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि दुनिया में भारत का कद कई शानदार उपलब्धियों के कारण बढ़ा है। जिसमें निम्न शामिल हैं-

    1.अद्वितीय विश्वस्तरीय डिजिटल जन अवसंरचना, यानि आधार, को-विन और यूपीआई
    2.अभूतपूर्व पैमाने और तेज कोविड टीकाकरण अभियान
    3.अग्रिम क्षेत्रों जैसे कि जलवायु संबंधी लक्ष्यों को प्राप्त करना, मिशन लाइफ
    4.राष्ट्रीय हाइड्रोजन मिशन

    प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई)
    कोविड-19 महामारी के दौरान की गई कोशिशों पर प्रकाश डालते हुए, श्रीमती सीतारमण ने कहा कि महामारी के दौरान हमने 80 करोड़ से अधिक लोगों के लिए 28 महीनों के लिए मुफ्त खाद्यान्न की आपूर्ति करने की योजना के साथ सुनिश्चित किया कि कोई भूखा न सोए। खाद्य एवं पोषणगत सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को जारी रखते हुए हम प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (पीएमजीकेएवाई) के अंतर्गत अगले एक वर्ष के लिए सभी अन्त्योदय और प्राथमिकता प्राप्त परिवारों को मुफ्त खाद्यान्न की आपूर्ति करने की योजना 1 जनवरी, 2023 से लागू कर रहे हैं। लगभग 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक के संपूर्ण व्यय का वहन केन्द्र सरकार द्वारा किया जाएगा।

  • स्टील और स्टेनलेस स्टील पर निर्यात शुल्क हटाने से अर्थव्यवस्था के इस क्षेत्र को मिलेगी मजबूती: ज्योतिरादित्य सिंधिया

    स्टील और स्टेनलेस स्टील पर निर्यात शुल्क हटाने से अर्थव्यवस्था के इस क्षेत्र को मिलेगी मजबूती: ज्योतिरादित्य सिंधिया

    समग्र समाचार सेवा
    नई दिल्ली, 22नवंबर। केंद्रीय इस्पात और नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा कि सरकार द्वारा स्टील और स्टेनलेस स्टील पर निर्यात शुल्क हटाने से देश के इस्पात क्षेत्र के लिए एक नए युग की शुरुआत होगी, और इसे वैश्विक बाजार में मजबूती से अपनी स्थिति स्थापित करने में भी मदद मिलेगी।

    सरकार ने पिछले शनिवार को लौह अयस्क लंप और 58 प्रतिशत लौह सामग्री से कम लौह अयस्क पेलेट्स और पिग आयरन सहित निर्दिष्ट इस्पात उत्पादों पर निर्यात शुल्क वापस ले लिया था। एन्थ्रेसाइट/पीसीआई कोयला, कोकिंग कोल, कोक और सेमी कोक और फेरोनिकेल पर आयात शुल्क रियायतें भी वापस ले ली गईं थीं। आज भारतीय इस्पात संघ (आईएसए) के तीसरे सम्मेलन में मुख्य भाषण देते हुए श्री सिंधिया ने कहा कि इस्पात क्षेत्र न केवल अपनी अंतर्राष्ट्रीय उपस्थिति को बहाल करेगा बल्कि घरेलू बाजार में अपेक्षाकृत कम समय में नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा।

    सिंधिया ने कहा कि प्रधानमंत्री ने प्रति वर्ष लगभग 17 लाख करोड़ रुपये पूंजीगत बुनियादी ढांचे को बढ़ाने के लिए जनादेश दिया है, इस प्रकार इस्पात की मांग लगभग दो अंकों (लगभग 10 प्रतिशत प्रति वर्ष) तक बढ़ रही है। इसके अलावा, उन्होंने कहा कि इस्पात क्षेत्र न केवल कोविड-19 के चरम पर होने के दौरान एक कठिन समय से उभरा है, बल्कि यह और मजबूत, अधिक लचीला, वैश्विक, केंद्रित और प्रतिबद्ध क्षेत्र के रूप भी उभरा है। हमारे क्षेत्र ने पिछले आठ वर्षों के दौरान एक बड़ा परिवर्तन देखा है और यह विश्व स्तर पर चौथे सबसे बड़े उत्पादक से अब दूसरे सबसे बड़े उत्पादक और स्टील के दूसरे सबसे बड़े उपभोक्ता के रूप में उभरा है।

    उन्होंने कहा कि इस परिवर्तनकारी विकास पथ की कल्पना प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 2047 में शताब्दी काल द्वारा एक आत्मनिर्भर भारत के रूप में की थी। आत्मनिर्भरता प्राप्त करने के इस मिशन में बुनियादी ढांचे और विनिर्माण को बढ़ावा देना शामिल होगा जिनमें से स्टील एक महत्वपूर्ण आधारभूत अंश है। इसके लिए उन्होंने “मेड इन इंडिया” स्टील ब्रांड स्थापित करने पर भी जोर दिया।

    मंत्री के अनुसार घरेलू स्टील के उपयोग की नीति से इस्पात आयात पर 22,400 करोड़ रुपए की बचत हुई है। उन्होंने उद्योग से सर्कुलर इकोनॉमी दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह किया, जिसमें स्क्रैप से स्टील उत्पादन की दिशा में धीरे-धीरे आंदोलन शामिल होगा। घरेलू उत्पादन बढ़ाने के लिए श्री सिंधिया ने कहा कि विशिष्ट इस्पात के लिए पीएलआई योजना (उत्पादकता से जुड़ा प्रोत्साहन) को 35 कंपनियों से 79 आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिसके परिणामस्वरूप लगभग 46,020 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है और लगभग 26 मिलियन टन की क्षमता में वृद्धि हुई है, और लगभग 70,000 लोगों के रोजगार सृजन की क्षमता विकसित हुई है। उन्होंने कहा कि यह पीएलआई योजना आने वाले महीनों में घरेलू इस्पात मांग को नई गति प्रदान करेगी।

    आईएसए के अध्यक्ष श्री दिलीप ओमेन; सेल की अध्यक्ष श्रीमती सोमा मंडल; कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में टाटा स्टील के प्रबंध निदेशक श्री टी. वी. नरेंद्रन और भारतीय इस्पात उद्योग के अन्य हितधारकों ने अपने विचार व्यक्त किए। इन सभी ने स्टील और स्टेनलेस स्टील पर निर्यात शुल्क हटाने के सरकार के फैसले का स्वागत किया और इसे भारतीय इस्पात क्षेत्र के लिए एक बूस्टर बताया। इस अवसर पर इस्पात बिरादरी के विभिन्न सदस्यों को आईएसए स्टील पुरस्कार प्रदान किए गए, जिनमें धातु और खनन के उपाध्यक्ष श्री जतिंदर मेहरा शामिल थे, जिन्हें इस क्षेत्र में उनके अनुकरणीय कार्य और योगदान के लिए लाइफटाइम अचीवमेंट पुरस्कार से सम्मानित किया गया। कॉन्क्लेव के उद्घाटन सत्र में ‘पाथवेज टू लो कार्बन एमिशन स्टील’ पर एक नॉलेज पेपर भी जारी किया गया।

  • राजमार्ग, रेलवे, वायुमार्ग और जलमार्ग की विभिन्‍न नई परियोजनाओं के साथ पूर्वोत्तर विकास क्षेत्र के विकास को नई गति मिल रही है : राष्ट्रपति मुर्मु

    राजमार्ग, रेलवे, वायुमार्ग और जलमार्ग की विभिन्‍न नई परियोजनाओं के साथ पूर्वोत्तर विकास क्षेत्र के विकास को नई गति मिल रही है : राष्ट्रपति मुर्मु

    समग्र समाचार सेवा
    नई दिल्ली, 13अक्टूबर।राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (12 अक्टूबर, 2022) को नरसिंहगढ़, अगरतला में त्रिपुरा राज्य न्यायिक अकादमी का उद्घाटन किया और त्रिपुरा राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय का शिलान्यास किया।

    एक अन्य कार्यक्रम के दौरान, राष्ट्रपति ने रबिंद्र सतबार्षिकी भवन अगरतला से वर्चुअल माध्यम से कैपिटल कॉम्पलेक्स, अगरतला में एमएलए हॉस्टल का उद्घाटन किया और महाराजा बीरेंद्र किशोर माणिक्य संग्रहालय तथा सांस्कृतिक केंद्र, आईआईआईटी-अगरतला एवं सड़क, स्कूल और छात्रों के लिए छात्रावास से संबंधित त्रिपुरा सरकार की विभिन्न परियोजनाओं का शिलान्यास किया।

    रबिंद्र सतबार्षिकी भवन में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि आज शुरू की गईं परियोजनाओं से त्रिपुरा में न सिर्फ कनेक्टिविटी, शिक्षा, न्यायिक प्रणाली और विधायिका को मजबूती मिलेगी, बल्कि राज्य की समृद्ध संस्कृति को भी बढ़ावा मिलेगा।

    राष्ट्रपति ने कहा कि व राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय, त्रिपुरा की आधारशिला रखते हुए बहुत खुशी महसूस कर रही हैं। उन्होंने कहा कि पिछले तीन दशकों में, एनएलयू ने विधि शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। आज अर्थव्यवस्था के विकास के साथ कानूनी पेशे का भी कई आयामों में विस्तार हुआ है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि एनएलयू त्रिपुरा न केवल पूर्वोत्तर में, बल्कि पूरे देश में कानूनी शिक्षा के एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभरेगा।

    राष्ट्रपति ने कहा कि भारत के युवाओं ने दुनिया भर में सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में एक विशेष पहचान बनाई है। उन्हें विश्वास जताया कि इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी, अगरतला का स्थायी परिसर सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नए मानक स्थापित करेगा।

    राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्र के विकास और हमारे युवाओं की प्रगति के लिए एक समग्र शिक्षा प्रणाली आवश्यक है। उच्च शिक्षा के साथ-साथ हमें प्राथमिक शिक्षा पर ज्यादा जोर देना चाहिए। उन्होंने यह देखकर खुशी व्यक्त की कि त्रिपुरा की राज्य सरकार के साथ मिलकर उत्तर पूर्व क्षेत्र विकास मंत्रालय ने ‘विद्या-ज्योति मिशन 100’ का शुभारम्भ किया है। इसके तहत मौजूदा 100 उच्च माध्यमिक विद्यालयों को अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ गुणवत्ता वाले शैक्षणिक संस्थानों में परिवर्तित किया जाएगा।

    राष्ट्रपति ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं हैं। आज, राजमार्ग, रेलवे, वायुमार्ग और जलमार्ग की विभिन्न नई परियोजनाओं के साथ क्षेत्र के विकास को एक नई गति मिल रही है।

    राष्ट्रपति ने कहा कि भारत दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है। त्रिपुरा सहित पूर्वोत्तर क्षेत्र 2025 तक भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि त्रिपुरा के प्रतिभाशाली और मेहनती लोगों, विशेष रूप से युवाओं की आकांक्षाएं, नवाचार और उद्यमिता के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी।

  • सोनिया गांधी ने गुटबाजों को दिया सख्त संदेश, कहा- कांग्रेस की मजबूती लोकतंत्र में जरूरी

    सोनिया गांधी ने गुटबाजों को दिया सख्त संदेश, कहा- कांग्रेस की मजबूती लोकतंत्र में जरूरी

    समग्र समाचार सेवा

    नई दिल्ली, 5 अप्रैल। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि हमारा एक बार फिर मजबूती से उभरना सिर्फ हमारे लिए ही नहीं बल्कि लोकतंत्र और समाज के लिए भी अहम है। पार्टी सांसदों के साथ मीटिंग में सोनिया गांधी ने एनडीए सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वह ज्यादा से ज्यादा डर फैलाने और धमकाने की कोशिश कर रही है।

    छात्रों के करियर की चिंता सरकार को करनी चाहिए

    उन्होंने कहा कि यूक्रेन से जिन छात्रों को भारत लाया गया है, उनका करियर कैसे सुरक्षित रहे इस बात की चिंता भी सरकार को करनी चाहिए। सोनिया गांधी का यह बयान पार्टी की ओर से आयोजित होने वाले चिंतन शिविर से पहले आया है। इस शिविर में यूपी, पंजाब समेत 5 राज्यों में पार्टी की करारी हार को लेकर मंथन किया जाएगा।

    5 राज्यों में हार को शॉकिंग और दर्द भरा बताया

    सोनिया गांधी ने 5 राज्यों में हार को शॉकिंग और दर्द भरा बताते हुए कहा था कि वह निजी तौर पर इसे देखेंगी और हर स्तर पर संगठन को मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा। सोनिया गांधी ने सांसदों से कहा, ‘हमारे आगे जो रास्ता है, वह बेहद चुनौतीपूर्ण है, जितना कभी नहीं था। हमारा समर्पण, संकल्प और फिर से उभरने की भावना का परीक्षण होना है। संगठन में हर स्तर पर एकजुटता बेहद अहम है।

    गुटबाजी कर रहे नेताओं को संख्त संदेश

    पार्टी के आंतरिक सूत्रों ने सोनिया गांधी की स्पीच को लेकर कहा कि हर स्तर पर एकजुटता जरूरी होने की बात कहकर उन्होंने कुछ लोगों को संदेश दिया है, जो राज्यों में गुटबाजी कर रहे हैं। इसके अलावा राष्ट्रीय स्तर पर जी-23 के नेताओं के लिए भी यह एक संदेश माना जा रहा है। बता दें कि 5 राज्यों में करारी हार के पीछे आपसी कलह और नेताओं का असहयोग भी एक वजह माना जा रहा है।

    पार्टी में एकजुटता बेहद जरूरी

    5 राज्यों में हार को सोनिया गांधी ने शॉकिंग और दर्दभरा बताया था। उन्होंने कांग्रेस वर्किंग कमिटी में भी इस मुद्दे पर बात की थी और कहा था कि एकजुटता बेहद जरूरी है। पूरी चर्चा में कई नेताओं ने कहा था कि पंजाब समेत सभी राज्यों में पार्टी गुटबाजी का शिकार हुई।

    सोनिया बोलीं- चिंतिन शिविर का आयोजन है जरूरी

    सोनिया गांधी ने यह भी कहा था कि यदि जी-23 के नेताओं के सुझावों में कुछ दम होगा तो वे उन्हें स्वीकार करेंगी। सोनिया गांधी ने मंगलवार को कहा, ‘शिविर का आयोजन बेहद जरूरी है। वहां पार्टी के लोगों की राय को सुना जा सकेगा। वे एक क्लियर रोडमैप दे सकेंगे। इससे हम यह तय कर पाएंगे कि भविष्य में चुनौतियों से निपटने के लिए हमें किस तरह से काम को आगे बढ़ाना है।

  • iTV Network ने अपनी सेल्स टीम को कुछ यूं दी मजबूती

    iTV Network ने अपनी सेल्स टीम को कुछ यूं दी मजबूती

    समग्र समाचार सेवा
    नई दिल्ली, 6मई। देश के बड़े न्यूज ब्रॉडकास्टर्स में शुमार ‘आईटीवी नेटवर्क’ (iTV Network) ने अपनी सेल्स टीम को मजबूती दी है। इसके तहत मीनाक्षी सिंह को नेटवर्क के हिंदी न्यूज चैनल ‘इंडिया न्यूज’ के प्रेजिडेंट (Govt Sales & Retail) के पद पर प्रमोट किया गया है। मीनाक्षी सिंह को इंडस्ट्री में काम करने का करीब 21 साल का अनुभव है। वह तमाम बहुराष्ट्रीय कंपनियों जैसे Gecis (GE), Dell, Neoteric में अपनी जिम्मेदारी निभा चुकी हैं। उन्होंने कई सारे अवार्ड भी अपने नाम किए हैं। वह आईटीवी नेटवर्क के वाइस प्रेजिडेंट ( सेल्स एंड मार्केटिंग) के रूप में वर्ष 2020 से इंडिया न्यूज से जुड़ी हैं।

    नेटवर्क ने संजय सिंघल को भी प्रेजिडेंट के पद पर पदोन्नत किया है। वह इंडिया न्यूज के लिए गवर्नमेंट, नॉर्थ जोन हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और आज समाज, चंडीगढ़ और दिल्ली की जिम्मेदारी संभालेंगे। संजय सिंघल को मीडिया के क्षेत्र में काम करने का करीब तीन दशक का अनुभव है। वह वर्ष 2010 से इंडिया न्यूज के साथ जुड़े हुए हैं। प्रमोशन से पहले वह आईटीवी नेटवर्क में सीनियर वाइस प्रेजिडेंट के तौर पर आज समाज और इंडिया न्यूज (हरियाणा, पंजाब और हिमाचल) की कमान संभाल रहे थे। वहीं, इससे पहले वह वर्ष 2000 से 2010 तक हिंदुस्तान टाइम्स की चंडीगढ़ यूनिट में डिप्टी जनरल मैनेजर के तौर पर अपनी जिम्मेदारी संभाल रहे थे। गवर्नमेंट हेड के तौर पर वह वर्ष 1990 से 2000 तक इंडियन एक्सप्रेस और जनसत्ता में भी काम कर चुके हैं।

    इसके अलावा सुमन सिंह को भी डिप्टी जनरल मैनेजर (सेल्स) के पद पर पदोन्नत किया गया है। सुमन सिंह को मीडिया इंडस्ट्री में काम करने का 11 साल से भी अधिक का अनुभव है। वह वर्ष 2016 से ही इंडिया न्यूज के साथ जुड़े हुए हैं। इससे पहले वह गवर्नमेंट सेल्स टीम,दिल्ली के साथ काम कर रहे थे। इस बारे में आईटीवी नेटवर्क के सीईओ वरुण कोहली का कहना है, ‘मीनाक्षी, संजय और सुमन की नई जिम्मेदारी को लेकर हम काफी खुश है।, iTV नेटवर्क को उनके कौशल और विशाल अनुभव का काफी लाभ मिलेगा और आने वाले समय में यह और ऊंचाइयों को छुएगा।’
    साभार- समाचार4मीडिया