Tag: प्रदर्शनी

  • प्रदर्शनी ‘भारत: लोकतंत्र की जननी’ भारतीय लोकतांत्रिक लोकाचार के सार को दर्शाती है

    प्रदर्शनी ‘भारत: लोकतंत्र की जननी’ भारतीय लोकतांत्रिक लोकाचार के सार को दर्शाती है

    समग्र समाचार सेवा
    नई दिल्ली, 12 सिंतबर। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने 8-10 सितंबर 2023 के दौरान जी-20 शिखर सम्मेलन के लिए आईटीपीओ के हॉल नं. 14 (फोयर एरिया) में ‘भारत: लोकतंत्र की जननी’ विषय पर एक प्रदर्शनी का आयोजन किया। यह प्रदर्शनी हमारे देश की लोकतांत्रिक परंपराओं को प्रदर्शित करती है।

    केंद्र में सिंधु-सरस्वती संस्कृति की एक लड़की की मूर्ति है। वह आत्मविश्वास से खड़ी है और दुनिया को देख रही है। वह स्वतंत्र, मुक्त, आश्वस्त, आत्मविश्वास से परिपूर्ण है और दुनिया को आंखों से आंखें मिलाकर देख रही है। वह अपने शरीर पर आभूषण पहनती है, जो पश्चिमी भारत की महिलाओं द्वारा प्रतिदिन पहने जाने वाले आभूषणों से काफी मिलते-जुलते हैं। कलाकृति की वास्तविक ऊंचाई 10.5 सेमी है लेकिन प्रतिकृति 5 फीट ऊंचाई और 120 किलोग्राम वजन के साथ कांस्य में बनाई गई थी।

    यहां भारत के लोकतांत्रिक इतिहास को विभिन्न भाषाओं में 26 इंटरैक्टिव पैनलों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया है, जहां आगंतुक 16 विभिन्न भाषाओं में सामग्री पढ़ सकते हैं और ऑडियो द्वारा सुन सकते हैं। पैनल में स्थानीय स्वशासन, आधुनिक भारत में चुनाव, कृष्ण देव राय, जैन धर्म सहित अन्य चीजें शामिल हैं। प्रदर्शनी को जी-20 एप्लिकेशन पर डिजिटल रूप से एक्सेस किया जा सकता है।

    भारत में लोकतंत्र एक सदियों पुरानी अवधारणा है। भारतीय लोकाचार के अनुसार, लोकतंत्र में समाज में स्वतंत्रता, स्वीकार्यता, समानता और समावेशिता के मूल्य शामिल होते हैं और यह अपने आम नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण और सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर देता है। सबसे पहले उपलब्ध पवित्र ग्रंथ – ऋग्वेद और अथर्ववेद की पंक्तियों में सभा, समिति और संसद जैसी सहभागी संस्थाओं का उल्लेख किया गया है। अंतिम शब्द ‘संसद’ हमारे देश की संसद को दर्शाते हुए प्रचलित है। इस भूमि के महान महाकाव्य रामायण और महाभारत भी निर्णय प्रक्रिया में लोगों को समावेशित करने की बात करते हैं। भारतीय लिखित उदाहरणों में यह भी पाया जाता है कि शासन करने का अधिकार योग्यता या आम सहमति के माध्यम से अर्जित किया जाता है और यह वंशानुगत नहीं है। परिषद और समिति जैसी विभिन्न लोकतांत्रिक संस्थाओं में मतदाता की वैधता पर लगातार चर्चा होती रही है। भारतीय लोकतंत्र वास्तव में लोगों की सत्यता, सहयोग, समन्वय, शांति, सहानुभूति और सामूहिक शक्ति का उत्सवपूर्ण उद्घोष है।

  • भारतीय मार्ग ही आगे बढ़ने का मार्ग है और वह मार्ग है ‘वसुधैव कुटुंबकम’ – मीनाक्षी लेखी

    भारतीय मार्ग ही आगे बढ़ने का मार्ग है और वह मार्ग है ‘वसुधैव कुटुंबकम’ – मीनाक्षी लेखी

    समग्र समाचार सेवा
    नई दिल्ली, 01जुलाई। संस्कृति और विदेश मंत्री मीनाक्षी लेखी ने आईजीएनसीए, नई दिल्ली में अपनी तरह की पहली प्रदर्शनी ‘बैंकिंग ऑन वर्ल्ड हेरिटेज’ का उद्घाटन किया। शुक्रवार 30 जून को मीनाक्षी लेखी ने प्रदर्शनी में G20 सदस्य देशों के बैंकनोट प्रदर्शित किए। जिनमें यूनेस्को द्वारा सूचीबद्ध विश्व धरोहर स्थलों को अनोखे तरीके से दर्शाया गया है। प्रदर्शनी रविवार, 9 जुलाई 2023 तक प्रदर्शित रहेगी। प्रदर्शनी का संचालन विद्वान  रुक्मिणी दहानुकर द्वारा किया गया है। उद्घाटन में जी20 देशों के उच्चायुक्तों और राजदूतों ने भाग लिया।

    इस अवसर पर संस्कृति एवं विदेश मंत्री मीनाक्षी लेखी ने कहा कि अगर दुनिया को आगे बढ़ना है और मानवता को जीवित रखना है तो भारतीय रास्ता ही आगे बढ़ने का रास्ता है और वह रास्ता है ‘वसुधैव कुटुंबकम’। प्रदर्शनी का आयोजन वसुदैव कुटुंबकम की भावना से किया गया है।

    मंत्री ने कहा कि प्रदर्शनी युवाओं को, जो ज्यादातर डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लगे हुए हैं, भौतिक मुद्रा नोटों के माध्यम से अपनी विरासत से जोड़ने में मदद करेगी। उन्होंने कहा कि विरासत स्थलों का चित्रण करेंसी नोटों के आंतरिक मूल्य को बढ़ाता है।

    उन्होंने आगे टिप्पणी की कि जी20 देशों के पास दुनिया की घोषित विरासतों का 70 प्रतिशत हिस्सा है और प्रदर्शनी विरासत को संरक्षित करने और वर्तमान पीढ़ी को उनके अतीत की महानता से जोड़ने के लिए इन देशों के सामूहिक प्रयास को सामने लाती है।

    जी-20 शिखर सम्मेलन की भारत की अध्यक्षता में चल रहे समारोहों को मनाने के लिए, प्रदर्शनी सदस्य देशों के बैंकनोटों पर केंद्रित है। यह एक विशेष अवसर भी है जो यूनेस्को के विश्व धरोहर सम्मेलन के 50वें वर्ष के साथ-साथ भारत की स्वतंत्रता के 75वें वर्ष के जश्न के साथ मेल खाता है। प्रस्तावित थीम, “वसुधैव कुटुंबकम” या “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” पूरी तरह से “विश्व विरासत के उत्कृष्ट सार्वभौमिक मूल्यों” से मेल खाती है।

    इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र भी एक स्मारिका प्रकाशित करने की योजना बना रहा है। यह स्मारिका विद्वानों और प्रदर्शनी में आने वाले आगंतुकों के लिए उपयोगी होगी। इसके अलावा यह विभिन्न सभ्यताओं के विश्व धरोहर स्थलों के बारे में जागरूकता भी पैदा करेगा। यह विभिन्न देशों के विद्वानों और शोधकर्ताओं के बीच विचारों के आदान-प्रदान का अवसर प्रदान करेगा। यह पहली बार है कि दुनिया भर के यूनेस्को विश्व धरोहर स्थलों को दर्शाने वाले बैंक नोटों को इतने अनोखे तरीके से प्रस्तुत और स्मरण किया गया है।

    प्रदर्शनी की क्यूरेटर रुक्मिणी दहानुकर ने कहा कि यह प्रदर्शनी सहस्त्राब्दी और युवाओं को बैंक नोटों के माध्यम से उनकी संस्कृति और विरासत के बारे में शिक्षित करेगी। हमारे देश के बैंक नोटों में भारत की 17 भाषाएँ हैं, जो समावेशिता और विविधता में एकता को दर्शाती हैं। उन्होंने इस संदर्भ में आगे कहा कि सब कुछ मेक इन इंडिया है और सब कुछ भारत का प्रक्षेपण है जो इस प्रदर्शनी में प्रतिबिंबित हो रहा है। उन्होंने टिप्पणी की कि यह प्रदर्शनी बैंक नोटों के माध्यम से मानवता और संस्कृति के संबंध को प्रदर्शित करती है।

    दिलचस्प बात यह है कि सदस्य देशों ने मुद्राएँ जारी की हैं जो समाज को उनके महत्व के बारे में शिक्षित करने के लिए हमारे इतिहास के भव्य स्मारकों को चित्रित करने के सबसे प्रभावी तरीकों में से एक हैं।

    सिक्के प्राचीन भारतीय इतिहास के पुनर्निर्माण का अमूल्य स्रोत हैं। ये हमारे अतीत के गौरवशाली इतिहास को दर्शाते हैं। कई मामलों में, वे हमें राजाओं के शासनकाल, राज्यों की अर्थव्यवस्था, साम्राज्यों की सीमा और उस अवधि के दौरान व्यापार के बारे में बताते हैं। वे उस काल की कला और धर्म पर भी प्रकाश डालते हैं जिससे वे संबंधित हैं। प्रदर्शनी को पूरक बनाने के लिए आईजीएनसीए ने इस विषय पर एक पैनल चर्चा का भी आयोजन किया।

  • प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ प्रदर्शनी की प्रशंसा की

    प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ प्रदर्शनी की प्रशंसा की

    समग्र समाचार सेवा
    नई दिल्ली, 24अप्रैल।प्रधानमंत्री ने ‘मन की बात’ के प्रमुख पहलुओं को दिखाने वाली रचनात्मक प्रदर्शनी की सराहना की है।

    वड़ोदरा से संसद सदस्य सुश्री रंजन भट्ट के एक ट्वीट का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री ने ट्वीट किया:
    “रचनात्मक प्रयास!”

  • 21वीं सदी की वैश्विक आकांक्षाओं को पूरा करने में भारत अग्रणी भूमिका निभाने जा रहा है- धर्मेंद्र प्रधान

    21वीं सदी की वैश्विक आकांक्षाओं को पूरा करने में भारत अग्रणी भूमिका निभाने जा रहा है- धर्मेंद्र प्रधान

    समग्र समाचार सेवा
    नई दिल्ली, 24अप्रैल। केंद्रीय शिक्षा और कौशल विकास तथा उद्यमिता मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने तीसरी शैक्षिक कार्य समूह की बैठक के अंतर्गत भविष्य के कार्य के बारे में अपनी तरह की एक अनूठी प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। उद्घाटन समारोह में कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय के सचिव, अतुल कुमार तिवारी; राजदूत अतुल केशप, अमेरिका-भारत व्यापार परिषद (यूएसआईबीसी) के अध्यक्ष और दक्षिण एशिया में अमेरिका के वाणिज्यिक मण्डल वरिष्ठ उपाध्यक्ष चंद्रजीत बनर्जी; भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के महानिदेशक विपिन सोंढ़ी, भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के प्रौद्योगिकी मिशन; नवाचार और अनुसंधान तथा भविष्य के परिवहन फ्यूचर मोबिलिटी पर सीआईआई मिशन के अध्यक्ष और अशोक लेलैंड और जेसीबी इंडिया के पूर्व प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी और एक्सेंचर रिसर्च के प्रबंध निदेशक राघव नरसाले उपस्थित थे।

    माननीय शिक्षा मंत्री महोदय ने गहरी रुचि के साथ लगभग 70 प्रदर्शकों की प्रदर्शनियों का अवलोकन किया और उनके प्रयासों की सराहना की। प्रदर्शकों में राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) राउरकेला, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भुबनेश्वर, भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) संबलपुर, माइक्रोसॉफ्ट, मेटा, संयुक्त राष्ट्र अंतराष्ट्रीय बाल आपातकालीन कोष (यूनिसेफ), राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) और कई अन्य जैसे विभिन्न क्षेत्रों के प्रमुख संस्थान और संगठन शामिल थे, जो आधुनिक कार्यस्थल, भविष्य के कौशल में निरंतर नवाचारों के साथ काम के भविष्य को संचालित करने वाली तकनीकों और अभिनव वितरण मॉडल को प्रदर्शित करते हैं। प्रदर्शनी को सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और पहले दिन 10,000 दर्शकों ने इन प्रदर्शनियों का अवलोकन किया।

    मेहमानों और आगंतुकों ने 3 क्षेत्रों- कृषि, गतिशीलता और स्वास्थ्य देखभाल, मेटावर्स, रिवर्स इंजीनियरिंग और स्वचालित डिजाइन समाधान, ड्रोन प्रौद्योगिकी, एआर/वीआर का लाभ उठाने वाले एड-टेक समाधान, उद्योग 4.0 कौशल, स्थानीय भाषा सीखने में कई आकर्षण, भविष्य का कार्य प्रदर्शनी- आधारित तकनीकी समाधान, वर्चुअल इंटर्नशिप समाधान और सहायक प्रौद्योगिकी और सहायक प्रौद्योगिकी नवाचार के समावेश और सजीवा प्रदर्शन के लिए स्पर्शनीय प्रदर्शन देखे। यह विशेष प्रदर्शनी वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर)-खनिज और सामग्री प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएमएमटी), भुबनेश्वर, ओडिशा में 23 से 28 अप्रैल तक जी-20 अध्यक्षता के अंतर्गत तीसरी शिक्षा कार्य समूह (एडडब्ल्यूजी) की बैठक के दौरान एक साथ आयोजित की जा रही है।

    शिक्षा मंत्री प्रधान ने उद्घाटन के बाद भुबनेश्वर में खनिज और सामग्री प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएमएमटी) सभागार में भविष्य के कार्य में उन्नत प्रौद्योगिकी पर ध्यान देने के साथ गहन प्रौद्योगिकी पर एक संगोष्ठी, तीसरी शैक्षिक कार्य समूह की बैठक के पहले अग्रदूत कार्यक्रम को संबोधित किया। इस अवसर पर बोलते हुए शिक्षा मंत्री प्रधान ने कहा कि ओडिशा कौशल की भूमि है। इसकी कला और स्थापत्य उत्कृष्टता और प्राचीन व्यापार संबंध इसका एक ज्वलंत प्रमाण है। उन्होंने कहा कि 21वीं सदी ज्ञान आधारित और प्रौद्योगिकी आधारित होगी। शिक्षा मंत्री प्रधान ने कहा कि भारत अपने सभ्यतागत लोकाचार से प्रेरित और प्रतिभा, कैप्टिव बाजार और संसाधनों के एक प्राकृतिक केंद्र के रूप में 21वीं सदी की वैश्विक आकांक्षाओं को पूरा करने में अग्रणी भूमिका निभाने जा रहा है। उन्होंने कहा कि डिग्री के बजाय कौशल और दक्षता भविष्य को उज्ज्वल बनाएगी।

    शिक्षा मंत्री प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत की युवा शक्ति को नौकरी की मांग करने वालों की जगह नौकरी प्रदान करने वालों में बदलने की परिकल्पना की है। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकियों के कारण आने वाली बाधाओं के साथ ही हमें युवाओं को नौकरियों के भविष्य के लिए तैयार करने के लिए कौशल के नए तरीकों पर विचार करना चाहिए। शिक्षा मंत्री प्रधान ने कहा कि इंटरनेट, गतिशीलता और वैश्विक कनेक्टिविटी हमें वैश्विक आवश्यकताओं के बारे में सोचने का अवसर प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि हमें भारत के युवाओं के साथ-साथ ग्लोबल साउथ से जुड़े लोगों के लिए इस अवसर को बदलने के लिए एक साथ आना चाहिए। शिक्षा मंत्री महोदय ने यह कहते हुए अपनी प्रसन्नता व्यक्त की कि आज अक्षय तृतीया के शुभ अवसर पर, उद्योग, शिक्षा, स्टार्टअप ईकोसिस्टम और सभी हितधारक कौशल ईकोसिस्टम की फिर से परिकल्पना करने, भविष्य के लिए तैयार वैश्विक नागरिक बनाने के लिए जी-20 भविष्य की कार्य रूपरेखा के अंतर्गत भुबनेश्वर में एक साथ आए हैं। शिक्षा मंत्री प्रधान ने कहा कि भारत कुशल जनशक्ति का वैश्विक केंद्र है। उन्होंने ओडिशा के लोगों की जनभागीदारी की भावना की भी सराहना और प्रशंसा की।

    शिक्षा मंत्री महोदय ने बताया कि 1 लाख से अधिक युवाओं ने भारत की जी-20 अध्यक्षता के साथ-साथ भुबनेश्वर में तीसरी शिक्षा कार्य समूह की बैठक के बारे में जिज्ञासा उत्पन्न करने और इसे बढ़ाने के लिए महीने भर चलने वाले जी-20 से संबंधित कार्यक्रमों में भाग लिया है।

    कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय (एमएसडीई) और शिक्षा मंत्रालय (एमओई) 23 और 24 अप्रैल को पूर्ववर्ती कार्यक्रमों की मेजबानी कर रहे हैं। कार्यक्रम के पहले दिन के लिए विषय ‘काम के भविष्य में उन्नत तकनीक पर केन्द्रित करने के बारे में गहन प्रौद्योगिकी’ है। गहन प्रौद्योगिकी के आगमन और काम के भविष्य पर इसके प्रभाव के विषय में गहराई से विचार करने के लिए, आज वैश्विक सेमीकंडक्टर ईकोसिस्टम में भारत की संभावनाओं, डिजिटलीकरण की दुनिया और नए युग के स्टार्टअप सहित कई पैनल चर्चाएँ आयोजित की गईं। पैनल के वक्ताओं में डॉ. चरण गुरुमूर्ति, फैब्रिकेशन (सेमीकंडक्टर) के मुख्य कार्यकारी अधिकारी, टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स; किशोर बलालजी, कार्यकारी निदेशक, सरकार और नियामक मामले, आईबीएम दक्षिण एशिया; प्रोफेसर श्रीपद कर्मालकर, निदेशक, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) भुवनेश्वर, कर्नल अमित वर्मा, मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम अहमदाबाद); निशित गुप्ता, वैज्ञानिक-ई, इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, भारत सरकार; डॉ. आशुतोष चड्ढा, डायरेक्टर और कंट्री हेड, पब्लिक पॉलिसी एंड गवर्नमेंट अफेयर्स, माइक्रोसॉफ्ट इंडिया; अभिषेक गुप्ता, मुख्य संचालन अधिकारी, युवा, (जेनरेशन अनलिमिटेड) यूनिसेफ; डॉ जी नरहरि शास्त्री, निदेशक, सीएसआईआर-खनिज और सामग्री प्रौद्योगिकी संस्थान (आईएमएमटी) और रोहित गुप्ता, कार्यक्रम निदेशक, अटल इनोवेशन मिशन, नीति आयोग शामिल हुए।

    कार्य अनुभव क्षेत्र का एक ऐसा अनूठा भविष्य स्थापित किया गया है, जिसका उद्देश्य युवाओं को यह प्रदर्शित करना है कि बाजार प्रासंगिक बने रहने के लिए इस अनुभव क्षेत्र में आवश्यक उन्नत तकनीकी कौशल और आसान हस्तांतरणीय कौशल का पूर्वावलोकन प्राप्त करके काम का भविष्य किस प्रकार से विकसित होगा।

  • वर्तमान में भारत की कुल उद्यमिता में महिलाओं का हिस्सा 14 प्रतिशत :एस आर इंगले

    वर्तमान में भारत की कुल उद्यमिता में महिलाओं का हिस्सा 14 प्रतिशत :एस आर इंगले

    समग्र समाचार सेवा
    नई दिल्ली, 29 मार्च। कृषि एवं किसान कल्‍याण मंत्रालय, भारत सरकार और राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंध संस्थान (मैनेज) हैदराबाद ने पमेती लुधियाना और कृषि एवं किसान कल्याण विभाग, पंजाब सरकार के सहयोग से पमेती लुधियाना, पीएयू कैंपस में एक दिवसीय ‘महिलाओं के लिए कृषि उद्यमिता पर जागरुकता एवं प्रदर्शनी’ का आयोजन किया। आयोजन का उद्देश्य कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में उद्यमशीलता के अवसरों के बारे में कृषि क्षेत्र से जुड़ी महिलाओं और महिला उद्यमियों के बीच जागरूकता पैदा करना और उनके उद्यमों को उन्नत करने और बढ़ावा देने के लिए डिजिटल मीडिया का उपयोग करना था। इस कार्यक्रम में पंजाब के सभी 23 जिलों से कृषि से जुड़ी 350 से अधिक महिलाओं, महिला कृषि उद्यमियों ने भाग लिया।

    पंजाब के विभिन्न जिलों की लगभग 20 महिला कृषि उद्यमियों द्वारा एक प्रदर्शनी भी लगाई गई। कार्यक्रम की शुरुआत महिला उद्यमियों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी के उद्घाटन के साथ हुई। महिलाओं ने अचार, मसाले, शहद, हाथ से बनी ज्वैलरी और कांथा परिधान, क्रोशिया बैग, मफिन, केक, प्रिंटेड सूट, कैंडी, आंवला उत्पाद, रंगाई किए सूट, फुलकारी दुपट्टे, जैम, स्क्वैश, मुरब्बा, चटनी, साबुन, मोमबत्ती, केश तेल, बाजरे से बनी कुकीज और अन्य बाजरा उत्पाद, मोरिंगा पाउडर, कोकोपीट, वर्मीकम्पोस्ट, प्लांटर्स और नर्सरी उत्पाद, जूट बैग आदि जैसे विभिन्न उत्पादों का प्रदर्शन किया। बातचीत के दौरान, प्रदर्शनी में शामिल उद्यमियों को बताया गया कि वे कैसे केंद्र और राज्य सरकार की मदद से और डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करके अपने कारोबार को उन्नत कर सकते हैं और बढ़ावा दे सकते हैं।

    सुश्री भारती मदान, उप निदेशक, पमेती, लुधियाना ने कार्यक्रम का विवरण दिया। डॉ. विनीता कुमारी, उप निदेशक (जेंडर स्टडीज), मैनेज, हैदराबाद ने स्वागत भाषण दिया।

    कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, एस आर इंगले, ज्वाइंट डायरेक्टर (एक्सटेंशन), कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने अपने संबोधन में जी 20 के मुख्य एवं सहायक कार्यक्रमों के महत्व को रेखांकित किया और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के द्वारा आयोजित जी 20 कार्यक्रमों का विवरण दिया। उन्होंने आगे उल्लेख किया कि वर्तमान में भारत की कुल उद्यमिता में महिलाओं का हिस्सा 14 प्रतिशत है। उन्होने उचित विपणन रणनीति, उत्पादों की लेबलिंग और बुनियादी ढांचे को उन्नत बनाने की आवश्यकता पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होने इस पर भी चर्चा की कि कैसे एमओए एंड एफडब्लू, भारत सरकार की एग्री इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (एआईएफ) स्कीम महिला उद्यमियों को उनकी प्राथमिक और द्वितीयक प्रसंस्करण इकाइयों को स्थापित करने और बढ़ाने में मदद कर सकती है। इसके साथ ही उन्होने इन महिला उद्यमियों को उनके उद्यम को बढ़ाने के लिए एफपीओ गठन के लाभों पर जोर दिया।

    श्री दविंदर सिंह, क्लस्टर हेड, लुधियाना ने महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए नाबार्ड की पहल के बारे में बात की। डॉ. रमनदीप सिंह, प्रोफेसर और प्रमुख,स्कूल ऑफ बिजनेस स्टडीज ने महिला उद्यमियों के लिए प्रभावी विपणन रणनीतियों पर जानकारियां साझा की। डॉ. विनीता कुमारी, उप निदेशक (जेंडर स्टडीज), मैनेज, हैदराबाद ने अपने उद्यम की ब्रांडिंग और प्रचार के लिए डिजिटल मार्केटिंग पर प्रतिभागियों के बीच जागरूकता बढ़ाई और महिलाओं के लिए कृषि उद्यमिता कार्यक्रम के बारे में जानकारी दी।

    पमेती, लुधियाना के निदेशक डॉ एमआईएस गिल ने इस अवसर पर प्रतिभागियों को संबोधित किया और कहा कि महिलाओं की निर्णय लेने की क्षमता बढ़ाने के लिए महिलाओं का सशक्तिकरण महत्वपूर्ण है। उन्होंने प्रदर्शनी में महिला उद्यमियों द्वारा प्रदर्शित उत्पादों की भी सराहना की और सुझाव दिया कि बेहतर कीमत के लिए उनके उत्पादों की पैकेजिंग और लेबलिंग विश्व स्तर की होनी चाहिए।

    डॉ. आर के धालीवाल, डीन, कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर, ने अपने संबोधन में उल्लेख किया कि कृषि क्षेत्र से जुड़ी महिलाओं और महिला कृषि उद्यमियों को धन, शिक्षा और कौशल के साथ आत्म-सशक्तिकरण के माध्यम से अपनी निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि उन्हें अपने अनुभवों का उपयोग करना चाहिए और अपनी उद्यमशीलता कौशल को बढ़ाना चाहिए।

    विषय के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने कृषि क्षेत्र से जुड़ी महिलाओं और महिला उद्यमियों के बीच जागरूकता पैदा करने के लिए इस अवसर पर व्याख्यान दिया। डॉ. पूनम सचदेव, प्रमुख, खाद्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, पीएयू ने चर्चा की कि महिलाएं खाद्य क्षेत्र में अपने उद्यम को कैसे बढ़ावा दे सकती हैं।

    कुछ प्रगतिशील महिला उद्यमी – ग्लोबल एसएचजी से श्रीमती गुरदेव कौर देओल, नीटनिट से श्रीमती पूजा रिखी और जीत एसएचजी से सुश्री सुखविंदर कौर ने उद्यमशीलता की यात्रा पर अपने अनुभव साझा किए और अपने व्यवसाय को बढ़ाने के लिए डिजिटल और सोशल मीडिया के उपयोग पर अन्य महिला प्रतिभागियों को भी प्रेरित किया।

    बलविंदर सिंह, उप निदेशक, एग्रीकल्चर एक्सटेंशन, पमेती ने धन्यवाद प्रस्ताव दिया।

  • ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त ने राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय में आयोजित ऑस्ट्रेलियाई वस्त्रों की ‘जर्राचार्रा: शुष्क मौसम की हवा’ प्रदर्शनी का दौरा किया

    ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त ने राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय में आयोजित ऑस्ट्रेलियाई वस्त्रों की ‘जर्राचार्रा: शुष्क मौसम की हवा’ प्रदर्शनी का दौरा किया

    समग्र समाचार सेवा
    नई दिल्ली, 17मार्च। ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त माननीय बैरी ओ’फारेल एओ और वस्त्र मंत्रालय में व्यापार सलाहकार तथा विकास आयुक्त हस्तशिल्प एवं हथकरघा श्रीमती शुभ्रा ने ऑस्ट्रेलियाई वस्त्रों की जर्राचार्रा प्रदर्शनी देखने के लिए राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय का दौरा किया।

    यह प्रदर्शनी पहली बार भारत आई है और कोलकाता एवं मुंबई में तथा वर्तमान में 1-17 मार्च के दौरान राष्ट्रीय शिल्प संग्रहालय एवं हस्तकला अकादमी में प्रदर्शित की गई थी। इसका आयोजन जी20 सचिवालय, वस्त्र मंत्रालय, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद के सहयोग से किया गया है और राष्ट्रीय फैशन डिजाइन संस्थान द्वारा क्यूरेट किया गया है। यह प्रदर्शनी चेन्नई और बेंगलुरु भी जाएगी।

    ‘जर्राचार्रा: शुष्क मौसम की हवा’ प्रदर्शनी अर्नहेम लैंड (उत्तरी क्षेत्र, ऑस्ट्रेलिया), जोकि दुनिया के सबसे दूरदराज इलाके में स्थित कला केंद्रों में से एक है, के बब्बर्रा महिला केंद्र से लाए गए आदिवासी महिलाओं की वस्त्र कला का एक शानदार संग्रह प्रस्तुत करती है। इस प्रदर्शनी में समकालीन माध्यमों का उपयोग करते हुए प्राचीन कहानियों का चित्रण करने वाली महिलाओं को दिखाया गया है और इस प्रदर्शनी से गुजरते हुए आपको ऐसा अनुभव होता है कि आप उत्तरी ऑस्ट्रेलिया के प्राचीन देश की यात्रा कर रहे हैं।

    मैनिंग्रिडा के नौ भाषा समूहों से संबद्ध 16 महिला कलाकारों के कार्यों को प्रदर्शित करके यह प्रदर्शनी इस इलाके की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता का उत्सव मनाती है। इस प्रदर्शनी में अधिकांश कलाकार कुनिंजकु हैं। हालांकि, इसमें गुर्र-गोनी, एनजेब्बना, मावंग, बुरार्रा, जंबर्रपुएंगु, जिनांग, रेमबर्रंगा, क्रियोल और कुने भाषाओं के कलाकार भी हैं। ऑस्ट्रेलिया में आज भी लगभग 120 देशी भाषाएं बोली जाती हैं। आज, बब्बर्रा महिला केंद्र 30 से अधिक महिला कलाकारों की सहायता करता है और इसने अर्नहेम लैंड देश एवं विविध संस्कृतियों को दर्शाते हुए 100 से अधिक स्क्रीन डिजाइन तैयार किए हैं।

    हजारों आगंतुकों ने इस प्रदर्शनी को न केवल देखा, बल्कि इसमें गहरी रूचि भी दिखाई।

  • राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय और नई दिल्ली स्थित श्रीलंकाई उच्चायोग 17 मार्च को ‘जेफ्री बावा: इट्स एसेंशियल टू बी देयर’ प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे

    राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय और नई दिल्ली स्थित श्रीलंकाई उच्चायोग 17 मार्च को ‘जेफ्री बावा: इट्स एसेंशियल टू बी देयर’ प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे

    समग्र समाचार सेवा
    नई दिल्ली ,17मार्च। संस्कृति मंत्रालय के राष्ट्रीय आधुनिक कला संग्रहालय और नई दिल्ली स्थित श्रीलंकाई उच्चायोग जेफ्री बावा ट्रस्ट कोलंबो के साथ ‘जेफ्री बावा: इट इज एसेंशियल टू बी देयर’ प्रदर्शनी का उद्घाटन करेंगे।

    प्रदर्शनी सोमवार को छोड़कर 17 मार्च से 7 मई, 2023 तक सुबह 11 बजे से शाम 6.30 बजे तक खुली रहेगी।

    यह पहली ऐसी बड़ी प्रदर्शनी है जो श्रीलंकाई वास्तुकार जेफ्री बावा के पेशे को दर्शाने के लिए अभिलेखागार से खींची गई है। भारत-श्रीलंका राजनयिक संबंधों की 75वीं वर्षगांठ पर यह आयोजन भारत और श्रीलंका के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम का उत्सव मनाता है।

    विचारों, चित्रों, इमारतों और स्थानों के बीच संबंधों की खोज करते हुए, प्रदर्शनी उन विभिन्न तरीकों की पड़ताल करती है जिनमें बावा के पेशे में छवियों का उपयोग किया गया था। बावा अभिलेखागार से 120 से अधिक दस्तावेज देखे जा सकते हैं, जिसमें बिना निर्मित कार्य पर एक खंड और बावा की अपनी यात्राओं की तस्वीरें शामिल हैं। यह प्रदर्शनी पहली बार फरवरी-अप्रैल 2022 से श्रीलंका के कोलंबो में प्रस्तुत की गई थी।

    बावा के काम को श्रीलंका, यूनाइटेड किंगडम, उत्तरी अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, भारत, ब्राजील, सिंगापुर और जर्मनी में कई स्थानों पर प्रदर्शित किया गया है। किंतु यह संग्रह पर ध्यान केंद्रित करने वाली पहली प्रदर्शनी है, और उनके कार्य को 2004 से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दर्शाई जाने वाली पहली पूर्वव्यापी प्रदर्शनी होने वाली है।

    जेफ्री बावा ट्रस्ट को इस प्रदर्शनी को तैयार करने हेतु पहल के भागीदार के रूप में कोहलर इंडिया से वित्तीय सहायता मिली।

  • यह प्रदर्शनी राष्ट्र निर्माण एवं स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करती है और उनके योगदान के अज्ञात पहलुओं पर प्रकाश डालती है: अर्जुन राम मेघवाल

    यह प्रदर्शनी राष्ट्र निर्माण एवं स्वतंत्रता संग्राम में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित करती है और उनके योगदान के अज्ञात पहलुओं पर प्रकाश डालती है: अर्जुन राम मेघवाल

    समग्र समाचार सेवा
    नई दिल्ली,11 मार्च।राष्ट्रीय अभिलेखागार के 133वें स्थापना दिवस के अवसर पर अर्जुन राम मेघवाल ने आज नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय अभिलेखागार में “महिलाएं और राष्ट्र निर्माण: 1857 से गणतंत्र तक” प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।

    इस अवसर पर अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम, जिसमें महिलाओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, के गुमनाम नायकों के योगदानों को सामने लाने का विचार प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का था। उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शनी में राष्ट्र निर्माण और 1857 से लेकर स्वतंत्रता संग्राम तक में महिलाओं के योगदान को रोचक तरीके से दर्शाया गया है। दुर्गावती देवी और कस्तूरबा गांधी का उदाहरण देते हुए,अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि यह प्रदर्शनी उनके योगदान के महत्वपूर्ण एवं अज्ञात पहलुओं पर प्रकाश डालती है।

    यह प्रदर्शनी राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में महिलाओं के योगदान को प्रदर्शित करने का एक प्रयास है। चाहे वह दमनकारी औपनिवेशिक शासन से आजादी के लिए भारत का संघर्ष हो, बाल-विवाह एवं अस्पृश्यता जैसी सामाजिक बुराइयों का उन्मूलन हो, महिलाओं की शिक्षा को सुविधाजनक बनाना हो या स्वतंत्र भारत के लिए संविधान का निर्माण हो – महिलाएं हमेशा सबसे आगे रहीं और उन्होंने भारतीय स्वतंत्रता की पहली लड़ाई से लेकर भारतीय गणतंत्र की घोषणा तक की राह में अपनी अमिट छाप छोड़ी।

    यह प्रदर्शनी अभिलेखीय भंडार के पिटारे यानी सरकार की आधिकारिक फाइलों, प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों के निजी कागजातों और साथ ही एनएआई पुस्तकालय में रखी दुर्लभ पुस्तकों के समृद्ध संग्रह से निकाले गए मूल दस्तावेजों का एक संग्रह प्रस्तुत करती है।

    इस प्रदर्शनी में भारत के राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में जानी-मानी, अपेक्षाकृत कम ज्ञात के साथ-साथ अनजान एवं गुमनाम महिलाओं के योगदान शामिल हैं। इसमें 1857 से लेकर 1950 तक की 93 से अधिक वर्षों की यात्रा शामिल है। इन महिला हस्तियों का संबंध विविध पृष्ठभूमि से था और वे विविध पेशे से जुड़ी हुई थीं। उनकी पहचान स्वतंत्रता सेनानी, सैनिक (आईएनए), समाज सुधारक, शिक्षाविद और साहित्यकार के रूप में की गई थी।

    यह प्रदर्शनी 30 अप्रैल 2023 तक शनिवार, रविवार और राष्ट्रीय अवकाश सहित प्रत्येक दिन सुबह 10:30 बजे से शाम 5:00 बजे तक जनता के देखने के लिए खुली रहेगी।

    राष्ट्रीय अभिलेखागार संस्कृति मंत्रालय के अधीन एक संबद्ध कार्यालय है। वर्तमान में राष्ट्रीय अभिलेखागार में सार्वजनिक अभिलेखों के 18.00 करोड़ से अधिक पृष्ठों का संग्रह उपलब्ध है जिनमें फाइलें, खंड, मानचित्र, भारत के राष्ट्रपति द्वारा स्वीकृत विधेयक, संधियां, दुर्लभ पांडुलिपियां, प्राच्य अभिलेख, निजी कागजात, मानचित्र अभिलेख (कार्टोग्राफिक रिकॉर्ड), राजपत्रों एवं विवरणिकाओं का महत्वपूर्ण संग्रह, जनगणना के रिकॉर्ड, विधानसभा एवं संसद की बहसें, निषिद्ध साहित्य, यात्रा वृत्तांत आदि शामिल हैं। प्राच्य अभिलेखों का एक बड़ा हिस्सा संस्कृत, फारसी, ओडिया आदि भाषाओँ में है।

  • अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष पर सीबीसी गोवा की मल्टीमीडिया प्रदर्शनी का समापन

    अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष पर सीबीसी गोवा की मल्टीमीडिया प्रदर्शनी का समापन

    समग्र समाचार सेवा
    नई दिल्ली, 4मार्च। केंद्रीय संचार ब्यूरो, गोवा की अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष पर आधारित मल्टीमीडिया प्रदर्शनी कल समाप्त हो गई। इस 4 दिवसीय प्रदर्शनी को खासी उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली क्योंकि कार्यक्रम स्थल पर सैकड़ों की तादाद में लोगों की उपस्थिति देखी गई। यहां पर जो प्रमुख आकर्षण थे उनमें मिलेट्स पर जानकारीपरक वीडियो और चित्र, आईसीएआर-केंद्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान द्वारा लगाया एक स्टॉल और मिलेट्स के व्यंजनों की प्रतियोगिता शामिल थी।

    गोवा को राज्य में अपनी शत प्रतिश नवीकरणीय ऊर्जा योजना को लागू करने के लिए 2050 तक 1.30 लाख करोड़ रुपये (लगभग) के निवेश की आवश्यकता होगी और गोवा राज्य ऊर्जा कार्य योजना के अनुसार इसमें प्रत्यक्ष रूप से 15,000 नौकरियां पैदा करने की क्षमता है साथ ही अप्रत्यक्ष रूप से इससे कई अधिक संख्या में रोजगार सृजित हो सकता है।

    ये व्यंजन प्रतियोगिता यहां का एक प्रमुख आकर्षण साबित हुई क्योंकि इसमें गोवा कॉलेज ऑफ एग्रीकल्चर के 40 से अधिक छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। प्रीति नाइक ने अपने ग्लूटन फ्री ज्वार केक के साथ पहला पुरस्कार जीता। रिया वाज़ अपने व्यंजन टिज़ान के कारण दूसरे स्थान पर रहीं, जो कि फिंगर मिलेट से बना गोवा का नाश्ता दलिया है। प्रतिभागियों और आगंतुकों के लिए यहां मिलेट्स के व्यंजनों की इतनी विस्तृत श्रंखला एक उत्साहजनक चीज साबित हुई।

    गोवा सरकार के कृषि निदेशालय के निदेशक नेविल अल्फोंसो ने अपनी मौजूदगी से इस प्रदर्शनी की शोभा बढ़ाई और मिलेट्स को हमारे दैनिक आहार में शामिल करने के महत्व के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने मिलेट्स की खेती का विस्तार करने के लिए गोवा कृषि विभाग द्वारा उठाए जा रहे कदमों के बारे में भी विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि जनता के बीच जागरूकता पैदा करना उनके विभाग के लिए एक प्राथमिकता का क्षेत्र है क्योंकि राज्य सरकार की योजना बड़े पैमाने पर अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष मनाने की है।

    इस प्रदर्शनी का उद्घाटन उत्तरी गोवा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) निधिन वलसन द्वारा किया गया, जो खुद एक ट्रायथलॉन एथलीट और कैंसर सरवायवर हैं। एसपी निधिन वलसन ने सभी से आग्रह किया कि एक स्वस्थ कल के लिए अपने आहार में मिलेट्स को शामिल करें, जैसा कि उन्होंने भी किया और रोजाना रागी माल्ट डिनर उनके स्वास्थ्य में बदलाव का अभिन्न अंग था। आईसीएआर-केंद्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. प्रवीण कुमार ने इस अवसर पर समझाया कि मिलेट्स कितना मजबूत और उगाने में आसान अन्न है।

    इस चार दिवसीय प्रदर्शनी का आयोजन भारत सरकार द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष के साल भर चलने वाले उत्सव के हिस्से के रूप में किया गया था।

    मिलेट्स एक पारंपरिक अनाज है, जिसे भारतीय उपमहाद्वीप में उगाया और खाया जाता है। मिलेट्स घास परिवार से संबंधित छोटे दाने वाले, साल भर के, गर्म मौसम वाले अनाज हैं। अन्य लोकप्रिय अनाजों की तुलना में वे वर्षा आधारित, कठोर अनाज होते हैं जिनमें पानी और उर्वरता की कम आवश्यकता होती है। वर्तमान में 130 से अधिक देशों में उगाए जाने वाले मिलेट्स को पूरे एशिया और अफ्रीका में आधे अरब से अधिक लोगों के लिए पारंपरिक भोजन माना जाता है। भारत के एक प्रस्ताव के बाद संयुक्त राष्ट्र द्वारा 2023 को अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष घोषित किया गया है। ऐसे वक्त में जब वैश्विक कृषि खाद्य प्रणाली लगातार बढ़ती वैश्विक आबादी का पेट भरने में चुनौतियों का सामना कर रही है, तब मिलेट्स जैसा मजबूत अनाज एक किफायती और पौष्टिक विकल्प प्रदान करता है, और इसकी खेती को बढ़ावा देने के प्रयासों को बढ़ाने की आवश्यकता है। अप्रैल 2018 में मिलेट्स को “न्यूट्री अनाज” के रूप में फिर से ब्रांड किया गया, इसके बाद 2018 को राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष घोषित किया गया, जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर इसका प्रचार करना और इसकी मांग पैदा करना था। 2021-2026 के बीच की पूर्वानुमान अवधि के दौरान वैश्विक मिलेट्स बाजार में 4.5% का सीएजीआर दर्ज होने का अनुमान है।

  • केंद्रीय संचार ब्यूरो गोवा ने अंतर्राष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष पर मल्टीमीडिया प्रदर्शनी का आयोजन किया

    केंद्रीय संचार ब्यूरो गोवा ने अंतर्राष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष पर मल्टीमीडिया प्रदर्शनी का आयोजन किया

    समग्र समाचार सेवा
    नई दिल्ली, 28 फरवरी।केंद्रीय संचार ब्यूरो, गोवा ने पणजी में कदम्बा परिवहन निगम बस स्टैंड पर अंतर्राष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष पर एक मल्टीमीडिया प्रदर्शनी का आयोजन किया है। इस प्रदर्शनी का उद्घाटन आज उत्तरी गोवा के पुलिस अधीक्षक (एसपी) निधिन वलसन ने किया। 3 मार्च तक जनता के लिए खुली इस प्रदर्शनी का उद्देश्य यहां आने वालों को मोटे अनाज के महत्व के बारे में शिक्षित करना और उसे दैनिक आहार में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित करना है।

    आईसीएआर-केंद्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान ने भी इस कार्यक्रम में एक स्टॉल लगाया है जहां लोग मोटे अनाज पर विशेषज्ञों के साथ बातचीत कर सकते हैं और इसके वास्तविक नमूने देख सकते हैं। इस प्रदर्शनी के लिए ज्ञान भागीदारों के रूप में भी ये संस्थान ऐतिहासिक और वर्तमान स्थिति के अवलोकन के साथ-साथ गोवा के संदर्भ में बाजरा पर विशेषज्ञ सलाह प्रदान कर रहा है।

    एसपी निधिन वलसन जो कि एक कैंसर सरवाइवर और ट्रायथलॉन एथलीट हैं, उन्होंने उद्घाटन के अवसर पर कहा कि मोटा अनाज उनके स्वास्थ्य में बदलाव का एक बड़ा हिस्सा था। बाजरे के उपयोग के अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे हाल की आयरनमैन ट्रायथलॉन के लिए मोटा अनाज उनके प्रशिक्षण में महत्वपूर्ण था। उस ट्रायथलॉन को उन्होंने सफलतापूर्वक पूरा किया। अपने स्वस्थ कल के लिए आहार में मोटा अनाज शामिल करने का आह्वान करते हुए एसपी महोदय ने कहा, “पिछले 10 महीनों से मेरे रात के खाने और नाश्ते में बाजरा शामिल है। जब से मैंने पहली बार खान-पान बदला तब से रागी माल्ट हर दिन मेरा डिनर रहा है और बिना वजन बढ़े मेरी ताकत और धैर्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।”

    आईसीएआर-केंद्रीय तटीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक डॉ. प्रवीण कुमार ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में मोटा अनाज के उत्पादन में केवल मामूली बढ़ोतरी देखी गई है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे मोटा अनाज को बहुत कम लागत की आवश्यकता होती है और इसमें बहुत कम पानी की खपत होती है, जिससे किसानों के लिए इसे उगाना आसान हो जाता है। उन्होंने ये भी कहा कि मोटा अनाज शरीर को बड़ी मात्रा में पोषण प्रदान करते हुए जीवनशैली से जुड़ी कई तरह की बीमारियों से लड़ने में मदद कर सकता है। डॉ. प्रवीण कुमार अपना वजन घटाने और ब्लड शुगर लेवल में बेहतर नियंत्रण के लिए अपने आहार में शामिल मोटा अनाज को श्रेय देते हैं।

    इस कार्यक्रम में मोटे अनाज से बने स्नैक्स वितरित किए गए और साथ ही स्थानीय कलाकारों द्वारा एक लघु सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुआ। इस प्रदर्शनी में प्रवेश नि:शुल्क है और ये सभी के लिए खुली है।

    ‘अंतर्राष्ट्रीय मोटे अनाज’ के बारे में
    मोटा अनाज पारंपरिक अनाज है, जिसे भारतीय उपमहाद्वीप में उगाया और खाया जाता है। मोटा अनाज घास परिवार से संबंधित छोटे दाने वाले, वार्षिक, गर्म मौसम वाले अनाज हैं। अन्य लोकप्रिय अनाजों की तुलना में इन्हें पानी और उर्वरता की कम आवश्यकता होती है। वर्तमान में 130 से अधिक देशों में उगाए जाने वाले मोटे अनाजों को पूरे एशिया और अफ्रीका में आधे अरब से अधिक लोगों के लिए पारंपरिक भोजन माना जाता है। भारत के एक प्रस्ताव के बाद 2023 को संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष घोषित किया गया है। ऐसे वक्त में जब वैश्विक कृषि खाद्य प्रणाली लगातार बढ़ती वैश्विक आबादी को भोजन देने में चुनौतियों का सामना कर रही है, ऐसे में मोटे अनाज जैसे लचीला अनाज एक किफायती और पौष्टिक विकल्प प्रदान करता है, और उसकी खेती को बढ़ावा देने के प्रयासों को बढ़ाने की आवश्यकता है। अप्रैल 2018 में मोटे अनाज को “न्यूट्री अनाज” के रूप में फिर से ब्रांड किया गया, इसके बाद वर्ष 2018 को राष्ट्रीय मोटा अनाज वर्ष घोषित किया गया, जिसका उद्देश्य बड़े पैमाने पर प्रचार और मांग पैदा करना था। 2021-2026 के बीच पूर्वानुमान अवधि के दौरान वैश्विक मोटा अनाज बाजार में 4.5 प्रतिशत का सीएजीआर दर्ज करने का अनुमान है।