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  • प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पंचायतों के कामकाज को नई दिशा दी है: गिरिराज सिंह

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने पंचायतों के कामकाज को नई दिशा दी है: गिरिराज सिंह

    समग्र समाचार सेवा
    नई दिल्ली, 22अगस्त। केंद्रीय ग्रामीण विकास और पंचायती राज मंत्री गिरिराज सिंह ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और केंद्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री कपिल मोरेश्वर पाटिल की उपस्थिति में श्रीनगर में ‘पंचायतों में सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण (एलएसडीजी) पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय विषयगत कार्यशाला’ का उद्घाटन किया।

    अपने ई-संबोधन के दौरान गिरिराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भारत में पंचायतों के कामकाज को एक नई दिशा दी है और उन्हें आदर्श और समान रूप से टिकाऊ बनाया है जो पिछले कई दशकों से नहीं हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि भारत को समृद्ध बनाने के लिए, पंचायतों को सभी स्तरों पर पारदर्शिता सुनिश्चित करते हुए केंद्र, राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा बनाई गई नीतियों और कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में आगे बढ़कर नेतृत्व करना होगा।

    गिरिराज सिंह ने कहा कि चूंकि भारत ने 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों को प्राप्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है, इसलिए देश द्वारा निर्धारित इस लक्ष्य को प्राप्त करना न केवल नीति निर्माताओं की जिम्मेदारी है, बल्कि 2030 तक सतत विकास लक्ष्य प्राप्त करने में निर्वाचित प्रतिनिधियों की भी बड़ी भूमिका है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एसडीजी के तहत 17 लक्ष्यों और 169 गंतव्यों को देश भर में पंचायतों के अधिक योगदान से ही हासिल किया जा सकता है।

    गिरिराज सिंह ने कहा कि पीएम नरेन्द्र मोदी द्वारा दिया गया मंत्र ‘सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन’ अपरिहार्य है क्योंकि अब पंचायतों को टिकाऊ, न्यायसंगत, पारदर्शी और जिम्मेदार होने के साथ-साथ सुशासन में भी बड़ी भूमिका निभानी होगी।

    कार्यशाला के दौरान, गिरिराज सिंह ने पंचायती राज मंत्रालय द्वारा विकसित ‘मेरी पंचायत मोबाइल ऐप’ के साथ एनसीबीएफ के संचालन दिशानिर्देश, सेवा-स्तरीय बेंचमार्क, स्व-मूल्यांकन और मॉडल अनुबंध भी जारी किया।

    कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण के संदर्भ में सर्वोत्तम रणनीतियों, दृष्टिकोण, अभिसरण कार्यों और अभिनव मॉडल; सर्वोत्तम प्रथाएं; ग्राम पंचायत विकास योजना (जीपीडीपी) में एसडीजी के विषयों की निगरानी, प्रोत्साहन और प्रतिबिंब का प्रदर्शन करना है।

    इस अवसर पर केन्द्रीय पंचायती राज राज्य मंत्री कपिल मोरेश्वर पाटिल ने भी सभा को संबोधित किया। उन्होंने कार्यशाला में सभी प्रतिभागियों का स्वागत किया और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा और राज्य प्रशासन को धरती के स्वर्ग यानी श्रीनगर में कार्यशाला के आयोजन के लिए हर प्रकार की सहायता प्रदान करने के लिए धन्यवाद दिया।

    मोरेश्वर पाटिल ने एसडीजी के बारे में जनता के बीच जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया और सरकारी विभागों और व्यक्तियों सहित सभी संबंधित लोगों से वर्ष 2030 तक एसडीजी प्राप्त करने के लिए निर्धारित लक्ष्यों को साकार करने के लिए पूर्ण प्रयास करने का अनुरोध किया। उन्होंने प्रधानमंत्री के रुख को दोहराया कि देश तब तक प्रगति नहीं कर सकता जब तक गांवों का विकास न हो रहा हो।

    उन्होंने कहा कि हाल ही में लॉन्च किया गया पंचायत विकास सूचकांक देश भर में पंचायतों के विकास के लिए किए जा रहे कार्यों को प्रतिबिंबित करने का काम करेगा।

    जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि जब विकास की बात आती है तो जम्मू-कश्मीर में पिछले चार वर्षों के दौरान एक बड़ा बदलाव देखा गया है और केंद्रशासित प्रदेश के ग्रामीण इलाके शहरी इलाकों से अलग नहीं हैं। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के संस्थापकों ने कहा था कि पंचायतें भारत की आत्मा हैं और देश के कामकाज और प्रगति में सबसे आगे हैं।

    उद्घाटन समारोह के दौरान सुनील कुमार, सचिव, पंचायती राज मंत्रालय (एमओपीआर), अरुण कुमार मेहता, मुख्य सचिव, जम्मू और कश्मीर सरकार, डॉ. चंद्र शेखर कुमार, अपर सचिव, एमओपीआर, मनदीप कौर, आयुक्त एवं सचिव, आरडी एवं पीआर विभाग, जम्मू और कश्मीर सरकार, विकास आनंद, संयुक्त सचिव, एमओपीआर, डॉ. बिजय कुमार बेहरा, आर्थिक सलाहकार, एमओपीआर और अन्य प्रतिष्ठित गणमान्य व्यक्ति और स्थानीय जन प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

    भारत सरकार और राज्य सरकारों के कई वरिष्ठ अधिकारी, संयुक्त राष्ट्र/अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों के प्रतिनिधि और देश भर से पंचायती राज संस्थानों के लगभग 1000 निर्वाचित प्रतिनिधि भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

    देशभर और केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर से पंचायती राज संस्थाओं के निर्वाचित प्रतिनिधियों और पदाधिकारियों ने भी राष्ट्रीय कार्यशाला में भाग लिया। साथ ही, विषयगत क्षेत्रों में पहल करने वाली पंचायतों ने भी कार्यशाला में भाग लिया।

  • युवा सामर्थ्य और प्रतिभा के स्वर्णिम प्रतिनिधि हैं और युवा ही समाज को नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं:माननीय उपराष्ट्रपति

    युवा सामर्थ्य और प्रतिभा के स्वर्णिम प्रतिनिधि हैं और युवा ही समाज को नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं:माननीय उपराष्ट्रपति

    समग्र समाचार सेवा
    नई दिल्ली, 20नवंबर। माननीय उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़ जी ने आज राजस्थान के खेतड़ी (झुंझनू) में विवेकानंद संदेश यात्रा राजस्थान का शुभारंभ किया। 7 जनवरी 2023 तक चलने वाली यह यात्रा स्वामी विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी, राजस्थान प्रांत तथा भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के सौजन्य से आयोजित की जा रही है। इन पचास दिनों में यह यात्रा, राजस्थान के सभी 33 जिलों में जायेगी तथा स्वामी विवेकानंद के विचारों का व्यापक प्रचार प्रसार करेगी।

    इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए माननीय उपराष्ट्रपति जी ने कहा कि स्वामी विवेकानंद भारत की युवा सामर्थ्य और प्रतिभा के स्वर्णिम प्रतिनिधि हैं और युवा ही समाज को नई दिशा देने की क्षमता रखते हैं। स्वामी जी के संदेश को समाज के लिए सदैव प्रासंगिक बताते हुए उन्होंने कहा कि आजादी के अमृत महोत्सव में इस यात्रा का खास महत्व है।

    इस अवसर पर उपराष्ट्रपति जी खेतड़ी स्थित रामकृष्ण मिशन में गये और स्वामी विवेकानंद की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। तत्पश्चात उन्होंने विवेकानंद गैलरी का भ्रमण किया और स्वामी जी की प्रतिमा के समक्ष प्रार्थना भी की।

    11 सितंबर, 1893 को शिकागो धर्म संसद में दिये गये स्वामी विवेकानंद के ओजपूर्ण भाषण को याद करते हुए उपराष्ट्रपति जी ने कहा कि स्वामी जी ने विश्व को भारत के वेदान्तिक अध्यात्म से परिचित कराया।

    उन्होंने इस बात पर प्रसन्नता व्यक्त की कि आज भारत स्वामी विवेकानंद के सपनों को साकार कर रहा है और निरंतर प्रगति के मार्ग पर बढ़ रहा है।

    विवेकानंद संदेश यात्रा की सफलता हेतु शुभकामनाएं देते हुए श्री धनखड़ ने देशवासियों को स्वामी जी के उस आह्वान को याद करने को कहा जिसमें उन्होंने कहा था-

    “उठो, जागो और तब तक न रुको जब तक लक्ष्य सिद्ध न हो जाय।”

    इस अवसर पर श्री भंवर सिंह भाटी, मंत्री, राजस्थान सरकार, श्री ए. बालकृष्णन, अध्यक्ष विवेकानंद केंद्र कन्याकुमारी, स्वामी आत्मनिष्ठानंद जी महाराज, सचिव रामकृष्ण मिशन, खेतड़ी एवं अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

    इस समारोह के पश्चात माननीय उपराष्ट्रपति जी हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड, खेतड़ी कॉपर कॉम्प्लेक्स के पदाधिकारियों से मिले और उनसे विचार-विमर्श किया। इस दौरान खान मंत्रालय, भारत सरकार के सचिव, श्री विवेक भारद्वाज भी उपस्थित रहे।

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  • डॉ बाबा साहब आंबेडकर ने सामाजिक पुनर्गठन के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन को नई दिशा दी–श्री अर्जुन डांगले

    डॉ बाबा साहब आंबेडकर ने सामाजिक पुनर्गठन के माध्यम से सामाजिक परिवर्तन को नई दिशा दी–श्री अर्जुन डांगले

    समग्र समाचार सेवा

    नई दिल्ली, 15अप्रैल।

    समाज ने बनाए हुए जाति के नियम, असमानता तथा भेदभाव को दूर करते हुए डा बाबा साहेब आंबेडकर ने सामाजिक पुनर्गठन की संकल्पना रखी तथा वंचित समाज को मानसिक गुलामी से मुक्त करते हुए समाज परिवर्तन को नई दिशा दी, यह प्रतिपादन जेष्ठ आंबेडकरवादी विचारक अर्जुन डांगले ने आज किया.

    महाराष्ट्र सूचना केंद्र (एम आई सी) की ओर से आयोजित महाराष्ट्र हीरक महोत्सव व्याख्यान श्रृंखला में आज ‘डा बाबासाहेब आंबेडकर और सामाजिक परिवर्तन की दिशा’ इस विषय पर 27 वे में व्याख्यान में वे बोल रहे थे. उन्होंने आगे कहां कि समाज व्यवस्था ने सत्ता, संपत्ति, प्रतिष्ठा से वंचित रख कर जीवन व्यतीत करने वाले लोगों को सिर पर छत भी मुहिया नहीं होने दी ना ही  उन्हें रहने को जगह दी. ऐसे लोगों को डा आंबेडकर ने स्वाभिमान तथा अधिकार से परिचित कराया. इन वंचित, उपेक्षित सामाजिक घटकों को मानसिक गुलामी से बाहर निकालने के लिए तथा स्वावलंबी बनाने के लिए उन्होंने सामाजिक पुनर्गठन की संकल्पना रखी और उसे वास्तविक रूप दिया.

    श्री डांगले ने आगे बताया कि डा आंबेडकर के सामाजिक पुनर्गठन की लड़ाई में 1927 का रायगढ़ जिला के महाड का प्रसिद्ध ‘चवदार तल्याचा सत्याग्रह’ (जिसे महाड सत्याग्रह के नाम से भी जाना जाता है), 1930 में नासिक में काला राम मंदिर प्रवेश जैसी कई लड़ाइयां बाबा साहब ने लड़ी. वंचितों को स्वावलंबी जीवन दिलाने हेतु 1924 में उन्होंने बहिष्कृत हितकारिणी सभा गठित की तथा ‘सीखो, संगठित हो जाओ और संघर्ष करो’ नारा दिया।

    उन्होंने पुराने रीति- रिवाज, मानदंडों का त्याग करके स्वावलंबी शिक्षा प्राप्त करने और इस तरह से अपने स्वयं के पैरों पर खड़े रहने का संदेश दिया. वंचित तथा उपेक्षित सामाजिक घटकों के लिए शिक्षा के द्वार खोलने के उद्देश्य से उन्होंने पीपल्स एजुकेशन सोसाइटी की स्थापना की. इस सोसाइटी के माध्यम से मुंबई में सिद्धार्थ महाविद्यालय तथा औरंगाबाद में मिलिंद महाविद्यालय की स्थापना की.

    डा आंबेडकर का दृष्टिकोण काफी व्यापक था. दलितों के साथ ही उन्होंने श्रम मंत्री के रूप में काम करते हुए कर्मचारियों के लिए आठ घंटों का दिन निर्धारित किया. साथ ही महिलाओं को मातृत्व अवकाश दिलाने के भरसक प्रयास किए. उन्होंने सभी को कुशल  शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए एंप्लॉयमेंट एक्सचेंज की स्थापना की. किसानों के लिए पूरक व्यवसाय उपलब्ध करवाने का विचार भी उन्होंने रखा और साथ ही जल प्रबंधन को लेकर भी महत्वपूर्ण विचार रखें.

    श्री डांगले ने आगे कहा कि समाजशास्त्रज्ञ, शिक्षाशास्त्र, समाज सुधारक, विद्वान पंडित, राजनेता जैसे विभिन्न पहेलु डा आंबेडकर के व्यक्तिमत्व से निखरते थे. समाज के आखिरी घटक को आत्मनिर्भर जीवन दिलाने के उद्देश्य से उन्होंने समानता, बंधुभाव और स्वाधीनता पर आधारित जीवन पद्धति को कार्यान्वित करने अथक संघर्ष किया तथा इन सभी विषयों पर डा आंबेडकर ने लेखन भी किया. इन्हींलेशन ऑफ कास्ट नामक पुस्तक के माध्यम से उन्होंने भारत में धर्म व्यवस्था का विश्लेषण किया, प्रॉब्लम ऑफ रूपी, बुद्ध एंड हिस धम्मा, रानाडे, गांधी एंड जीना जैसे पुस्तक भी उन्होंने लिखी जिसके माध्यम से भारतीय प्रजातंत्र तथा सुधारनावादी परंपरा बताई. उन्होंने कास्ट इन इंडिया शीर्षक तहत लिखे हुए निबंध में जाति व्यवस्था की समीक्षा की.

    उन्होंने यह भी बताया कि ‘सबके लिए शिक्षा’ इस महात्मा फुले के विचार को डा आंबेडकर ने गति दी. छत्रपति शाहू महाराज ने 1920 के मानगांव परिषद में डा आंबेडकर को समर्थन घोषित किया. आगे चलकर फुले -शाहू के विचारों की परंपरा सशक्त हुई. जनता को जागृत करने के लिए राज दल, संघटना स्थापित किए और समाचार पत्र भी प्रकाशित किए. उन्होंने ब्रिटिश द्वारा 1938 में लाए हुए श्रमिक विरोधी काले कानून के खिलाफ मोर्चा खोला. स्वतंत्र मजूर पक्ष, शेड्यूल कास्ट फेडरेशन, रिपब्लिकन पक्ष स्थापित किया और व्यापक काम किया. उनके समाचार पत्रों में मुकनायक, जनता, बहिष्कृत भारत का समावेश है, जिससे उन्होंने जनता में प्रबोधन किया और पुराने रीति-रिवाजों को छोड़कर आधुनिक मूल्य स्वीकार करने की सीख दी.

    श्री डांगले ने यह भी कहा कि तत्कालीन द्विभाषी मुंबई राज्य को समाप्त कर मुंबई सहित संयुक्त महाराष्ट्र निर्माण करने के लिए संघर्ष में विचारक प्रबोधनकार ठाकरे ने बाबा साहब से मुलाकात की. इस भेंट में संयुक्त महाराष्ट्र के लड़ाई को डा अंबेडकर ने समर्थन देने की बात घोषित की, साथ ही इस लड़ाई के लिए सभी राज दलों को साथ आने का आव्हान भी उन्होंने किया.

     भारतीय संविधान राष्ट्रभक्ति का प्रतीक

    बाबा साहब ने भारत को दिया हुआ संविधान राष्ट्रप्रेम तथा राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है. अभिव्यक्ति स्वतंत्रता, समानता, बंधुभाव जैसे मूल्यों को शामिल कर समाज के आखिरी घटक तक आर्थिक और सामाजिक न्याय दिलाने के उद्देश्य से संविधान में अनेक प्रावधान किए गए हैं. बाबा साहब के राष्ट्र निर्माण का स्वप्न और उन्हें अपेक्षित भारत संविधान से झलकता है.

    श्री डांगले ने आगे कहा कि डा आंबेडकर को एक जातीय पद्धति पर आधारित राजनीतिक दल स्वीकार नहीं था इसलिए उन्होंने प्रजातंत्र को बनाए रखने के लिए सभी जाति धर्मों के लोगों को इकट्ठा कर ‘रिपब्लिकन पार्टी’ की स्थापना की. इस दल के माध्यम से प्रजातंत्र को बनाए रखने के लिए सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ी. उन्होंने आधुनिक मूल्यों से मेल खाने वाले बौद्ध धर्म को स्वीकारा. आधुनिक विचार का अधिष्ठान तथा विद्न्यान में विश्वास रखने वाले तथा महिलाओं को समानता देने वाले धम्म को उन्होंने आगे प्रोत्साहित किया.

    डा आंबेडकर ने अनिष्ट प्रथाओं के विरुद्ध आवाज उठाई तथा देश पर प्रेम किया. उन्होंने आखिरी व्यक्ति को न्याय दिलवाने के लिए सदा प्रयास किया. प्रजातंत्र का सामाजिकीकरण करके आम लोगों को उनके अधिकार दिलाए. डा आंबेडकर के विचार यदि आचरण में लाए जाते हैं और यह अगली पीढ़ी तक पहुंचाए जाते हैं, तो यह बाबा साहब के लिए सही श्रद्धांजलि होगी, ऐसा भी श्री डांगले ने कहा.