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  • स्वच्छोत्सव-2023-1,000 शहरों को अक्टूबर 2024 तक 3 सितारा कचरा मुक्त शहर बनाने का लक्ष्यः हरदीप एस. पुरी

    स्वच्छोत्सव-2023-1,000 शहरों को अक्टूबर 2024 तक 3 सितारा कचरा मुक्त शहर बनाने का लक्ष्यः हरदीप एस. पुरी

    समग्र समाचार सेवा
    नई दिल्ली, 30मार्च। केन्द्रीय शहरी आवास और शहरी कार्य मंत्री हरदीप एस. पुरी ने कहा है कि अक्तूबर 2024 तक देश के 1,000 शहरों को 3 सितारा कचरा मुक्त शहर बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। हरदीप पुरी नई दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय शून्य अपशिष्ट दिवस 2023 के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। शहरी स्थानीय निकायों में स्पर्धा भाव और मिशन मोड की भावना को प्रोत्साहित करने के लिए जनवरी 2018 में प्रारंभ किए गए जीएफसी- स्टार रेटिंग प्रोटोकॉल की प्रगति की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इसके प्रारंभ होने के समय से ही प्रमाणीकरण में काफी तेजी आई है। देशभर के स्वच्छता दूतों से बातचीत करते हुए मंत्री महोदय ने उन्हें अपने समुदाय में परिवर्तनकारी बनने तथा नेता होने के लिए और चुनौतियों को आजीविका अवसरों में बदलने के लिए उन्हें बधाई दी।

    मंत्री महोदय ने मिशन की उपलब्धियों के बारे में कहा कि शहरी भारत खुले में शौच से मुक्त (ओडीएफ) हो गया है। सभी 4,715 शहरी, स्थानीय निकाय (यूएलबी) पूरी तरह ओडीएफ हैं, 3,547 से भी यूएलबी ओडीएफ+संचालनरत और स्वच्छ सामुदायिक और सार्वजनिक शौचालयों के साथ ओडीएफ हैं तथा 1,191 यूएलबी संपूर्ण मल कीचड़ प्रबंधन के साथ ओडीएफ++ हैं। इसके अतिरिक्त भारत ने अपशिष्ट प्रसंस्करण 2014 के 17 प्रतिशत की तुलना में चार गुणा बढ़कर आज 75 प्रतिशत हो गया है। इसे 97 प्रतिशत वार्डों में 100 प्रतिशत डोर टू डोर कचरा संग्रहण तथा देश के सभी यूएलबी में लगभग 90 प्रतिशत वार्डों में नागरिकों द्वारा कचरे के स्रोत को अलग-अलग करने से हुआ है।

    हरदीप पुरी ने विश्वास व्यक्त किया कि एसबीएम-यू के लक्ष्यों को प्राप्त करने में दिखाए गए संकल्प तथा दृढ़ संकल्प मिशन के दूसरे चरण में (एसबीएम-यू 2.0) में कई गुणा बढ़ जाएंगे। जहां भारत का लक्ष्य कचरा मुक्त देश बनना है। उन्होंने देश में कचरा प्रबंधन के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए आज की “कचरा मुक्त शहर” रैली के महत्व को बताया, क्योंकि उपभोग पैटर्न में बदलाव तथा तेजी से शहरीकरण अपशिष्ट उत्पादन को बढ़ाता है।

    स्वच्छता एक जन-आंदोलन है जिसे नागरिकों को जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। मिशन ने शहरों के स्वच्छ, हरित तथा कचरा मुक्त बनाने के लक्ष्य की दिशा में देश भर के लाखों नागरिकों को सक्रिय किया है। अभियानों में युवा और महिला नेताओं की बड़े पैमाने पर भागीदारी देखी गई है, जिन्होंने शहरी स्वच्छता की दिशा में सकारात्मक कदम उठाए हैं। शहरों को कचरा मुक्त बनाने के प्रयासों को केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी द्वारा स्वच्छोत्सव 2023 के शुभारंभ से नया प्रोत्साहन मिला है।

     

    अभियान ने कचरा मुक्त शहरों के लक्ष्यों को साकार करने के लिए महिलाओं की भागीदारी तथा नेतृत्व को बढावा देने का प्रयास किया है। 8 मार्च, 2023 से शहरों में कार्यक्रमों और गतिविधियों की श्रृंखला आयोजित की गई है ताकि महिलाओं को जीवन के विभिन्न भागों से कचरा मुक्त शहरो के निर्माण की ओर ले जाया जा सके। स्वच्छोत्सव अभियान शहरी स्वच्छता में नेतृत्व की भूमिका निभाने वाली 400,000 से अधिक महिला उद्यमियों के लिए एक मंच था। अनूठी यात्रा और मसाल मार्च में भाग लेकर महिलाओं ने शहरीकरण की जिम्मेदारी ली और शहरी परिदृश्य को बदलने के लिए अग्रणी रूप में नेतृत्व किया।

    माननीय प्रधानमंत्री ने समग्र स्वच्छता तथा अपशिष्ट प्रबंधन के ईको-सिस्टम की दिशा में भारत को एक नए मार्ग पर लाकर कचरा मुक्त शहर (जीएफसी) बनाने के विजन के साथ स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 का शुभारंभ किया था। डोर टू डोर संग्रहण, स्रोत पृथकीकरण, अपशिष्ट प्रसंस्करण तथा डंप साइट उपचार, आईईसी, क्षमता निर्माण, डिजिटल ट्रेकिंग आदि को प्रोत्साहित करना जीएफसी बनाने के घटक हैं। भारत शून्य अपशिष्ट दृष्टिकोण को भी बढ़ावा दे रहा है, जो एक बंद सर्कुलर प्रणाली में जिम्मेदार उत्पादन उपभोग तथा और उत्पादों के निपटान पर बल देता है। मंत्री महोदय ने कचरा मुक्त शहरों के लिए इस रैली की सराहना की, जिसमें लाखों नागरिकों ने अपनी सड़कों, पास-पड़ोस के स्थानों तथा पार्कों की साफ-सफाई की जिम्मेदारी ली है।

    आवास और शहरी कार्य मंत्रालय के सचिव मनोज जोशी ने अपशिष्ट प्रबंधन का चक्रीय रूप सुनिश्चित करने और कचरे के मूल्यवान संसाधनों के रूप में बदलने के लिए शून्य अपशिष्ट दृष्टिकोण को क्रियान्वित करने में महिला भूमिका के नेतृत्व की सराहना की। उन्होंने स्वयं सहायता समूहों को पेशेवर स्तर पर लाने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि इन समूहों के लिए उच्च आय सृजन सुनिश्चित किया जा सके। इसके अतिरिक्त महिलाओं के कचरा प्रबंधन से लेकर महिला नेतृत्व वाले कचरा मुक्त शहरों तक हमारे माननीय प्रधानमंत्री के विजन के अनुरूप वांछित परिणाम दिखा रहे हैं।

    केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी की उपस्थिति में कार्यक्रम में विभिन्न शहरों के महापौर, आयुक्त तथा मिशन निदेशकों ने भाग लिया और कचरा मुक्त शहरों में सर्कुलरिटी जीएफसी के लिए महिलाओं और युवाओं, जीएफसी के लिए बिजनेस एंड टेक पर चर्चा की। कार्यक्रम में फायरसाइड चैट भी देखी गई जहां बिहार, झारखंड, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में अपने श्रेष्ठ व्यवहारों औ सफलता की गाथाओं को साझा किया।

  • अंतर्राष्ट्रीय शून्य अपशिष्ट दिवस पर कचरा मुक्त शहरों के लिए रैली का आयोजन

    अंतर्राष्ट्रीय शून्य अपशिष्ट दिवस पर कचरा मुक्त शहरों के लिए रैली का आयोजन

    समग्र समाचार सेवा
    नई दिल्ली, 28 मार्च।आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय नई दिल्ली में अंतर्राष्ट्रीय शून्य अपशिष्ट दिवस 2023 के विषय – ‘कचरे को कम करने और उसके प्रबंधन के लिए टिकाऊ और पर्यावरणीय रूप से मजबूत प्रथाओं को प्राप्त करना’ के अनुरूप स्वच्छोत्सव- अंतर्राष्ट्रीय शून्य अपशिष्ट दिवस: कचरा मुक्त शहरों के लिए रैली का आयोजन कर रहा है। माननीय केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी और श्री शोम्बी शार्प, संयुक्त राष्ट्र के रेजिडेंट को-ऑर्डिनेटर की उपस्थिति में, 350 से अधिक प्रतिनिधियों के इस कार्यक्रम में भाग लेने की आशा है। इनमें मेयर, आयुक्त, मिशन निदेशक, व्यवसाय और तकनीकी विशेषज्ञ, महिला और युवा स्वच्छता के अग्रणी भागीदार, तकनीकी संस्थानों, विकास भागीदारों आदि के इस कार्यक्रम में भाग लेने की उम्मीद है।

    स्वच्छ मशाल मार्च ‘महिला-नेतृत्व स्वच्छोत्सव’ के लिए माहौल तैयार करेगी, जहां नागरिक 29, 30, 31 मार्च, 2023 को कचरा मुक्त शहरों के लिए रैली करेंगे। इसके बाद भाग लेने वाले शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) के प्रत्येक वार्ड में जल निकाय, रेलवे ट्रैक, सार्वजनिक शौचालय, सार्वजनिक स्थानों, खुली जगहों पर स्वच्छता अभियान चलाए जाएंगे। मशाल मार्च के लिए 2000 से अधिक शहर पहले ही अपनी सहमति दे चुके हैं।

    स्वच्छोत्सव – अंतर्राष्ट्रीय शून्य अपशिष्ट दिवस: कचरा मुक्त शहरों के लिए रैली में कचरा मुक्त शहरों में सर्कुलरिटी, कचरा मुक्त शहरों के लिए महिला और युवा, कचरा मुक्त शहरों के लिए व्यवसाय और तकनीक और महापौर के साथ फायरसाइड चैट पर चर्चा और सर्वोत्तम अभ्यास प्रस्तुतियां दिखाई देंगी। इस कार्यक्रम का आयोजन आवासन और शहरी कार्य मंत्रालाया द्वारा जीआईज़ेड, संघीय पर्यावरण मंत्रालय, प्रकृति संरक्षण, परमाणु सुरक्षा और उपभोक्ता संरक्षण, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी)के सहयोग से किया जाएगा।

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वच्छता कवरेज और पहल पर ध्यान केंद्रित करने के लिए, स्वच्छता में दुनिया के सबसे बड़े व्यवहार परिवर्तन कार्यक्रम के रूप में 2 अक्टूबर, 2014 को स्वच्छ भारत मिशन की शुरुआत की थी। 1 अक्टूबर, 2021 को माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा शुरू किए गए स्वच्छ भारत मिशन – शहरी 2.0 द्वारा वैज्ञानिक ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के उद्देश्य से ‘कचरा मुक्त शहरों’ की दृष्टि से आंदोलन को बल मिला। ‘लाइफस्टाइल फॉर द एनवायरनमेंट (एलआईएफ़ई)’ यानी पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली की अवधारणा संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (यूएनईपी) के सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप 1 नवंबर, 2021 को ग्लासगो में सीओपी 26 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा पेश किया गया था। उन्होंने व्यक्तियों और संस्थानों के वैश्विक समुदाय से आह्वान किया कि वे पर्यावरण की रक्षा और संरक्षण के लिए “बिना सोचे-समझे और विनाशकारी उपभोग के बजाय सचेत और समझ बूझकर उपयोग” की दिशा में एक अंतरराष्ट्रीय जन आंदोलन के रूप में एलआईएफ़ई यानी पर्यावरण अनुकूल जीवन शैली को अपनाएं।

    आवासन और शहरी कार्य मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 08 मार्च, 2023 से 3-सप्ताह का महिला-नेतृत्व वाला स्वच्छता अभियान-स्वच्छोत्सव शुरू किया था। कचरा मुक्त शहर के मिशन को सफल बनाने में नेतृत्व प्रदान करने वाली सभी क्षेत्रों की महिलाओं का यह उत्सव मनाने के लिए शहरों में कार्यक्रमों और गतिविधियों की एक श्रृंखला आयोजित की गई। 3-सप्ताह का यह अभियान 29 मार्च, 2023 को एक स्वच्छोत्सव कार्यक्रम के रन-अप के रूप में, और 30 मार्च, 2023 को अंतर्राष्ट्रीय शून्य अपशिष्ट दिवस के अवसर पर समाप्त होगा।

    अभियान के अंतर्गत, शहरी स्वच्छता के लिए काम करने वाली महिला उद्यमियों या महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को मान्यता देने के लिए नेतृत्व करने वाली महिला हस्तियों (डबल्यूआईएनएस) के लिए स्वच्छता पुरस्कार 2023 के पहले संस्करण की घोषणा की गई थी। एक अनूठी सहकर्मी शिक्षा पहल, स्वच्छता यात्रा शुरू की गई है, जिसमें अपशिष्ट उद्यमियों के रूप में लगे स्वयं सहायता समूहों के सदस्यों को अंतर-राज्यीय यात्रा का रोमांचक अवसर मिल रहा है। स्वच्छता दूत के रूप में काम करते हुए, इनमें से कई महिलाएं पहली बार यात्रा कर रही हैं और यह समृद्ध अनुभव उन्हें देखने, बातचीत करने और सीखने के लिए एक मंच प्रदान कर रहा है।