कब आजाद होंगे गुलाम ख्यालातों से?
[caption id="attachment_76032" align="alignleft" width="140"] त्रिदीब रमण [/caption] त्रिदीब रमण ’बरसों तेरे दर पर इस कदर गुलाम आस्थाओं की चाकरी की है कि आज आज़ाद का तखलुस भी मेरे कुछ काम नहीं...
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