विश्व जनसंख्या दिवस 2025 पर जनसंख्या प्रबंधन पर पुनर्विचार
प्रो. मदन मोहन गोयल, नीडोनॉमिक्स के प्रवर्तक एवं पूर्व कुलपति विश्व जनसंख्या दिवस (11जलाई) के अवसर पर जनसंख्या वृद्धि, उसकी चुनौतियों, प्रभावों और नवाचारपूर्ण समाधानों पर पुनर्विचार का उपयुक्त समय आ गया है। वर्ष 2025 में विश्व की कुल वर्तमान जनसंख्या 8,191,988,453 है, जो 2024 की तुलना में 0.9% की वृद्धि है। इस वर्ष की थीम—"युवाओं को सशक्त बनाना ताकि वे एक न्यायपूर्ण और आशावादी दुनिया में अपनी इच्छित परिवार संरचना बना सकें"—युवाओं को समस्या और समाधान दोनों रूपों में केंद्र में रखती है। यह विषय नीडोनॉमिक्स स्कूल ऑफ थॉट ( एनएसटी) के दृष्टिकोण से पूर्णतः मेल खाता है—जो एक "ज़रूरत आधारित अर्थव्यवस्था" की अवधारणा है, जिसे प्रो. एम.एम. गोयल नीडोनॉमिक्स फाउंडेशन (पंजीकृत ट्रस्ट) द्वारा प्रचारित किया गया है। जनसंख्या: समस्या नहीं, अवसर एनएसटी जनसंख्या को केवल समस्या नहीं, बल्कि एक संभावित वरदान मानता है, यदि उसका प्रबंधन बुद्धिमत्ता और नैतिकता से किया जाए। एनएसटी का मानना है कि जनसंख्या की गुणवत्ता ही नीति निर्धारण का केंद्र बिंदु होनी चाहिए, न कि मात्र संख्या। माल्थसियन सोच का पुनरावलोकन: नीडोनॉमिक्स दृष्टिकोण इतिहास में जनसंख्या वृद्धि पर बहस माल्थस के सिद्धांत से प्रभावित रही है, जिसमें कहा गया कि अनियंत्रित जनसंख्या संसाधनों से आगे निकल जाएगी और अकाल, गरीबी व सामाजिक संकट उत्पन्न होंगे। यद्यपि इसने चेतना उत्पन्न की, परंतु यह मानवीय समाधान नहीं दे पाया और शिक्षित व कुशल जनसंख्या को संसाधन के रूप में नहीं देख पाया। एनएसटी इस सोच को पूरी तरह खारिज नहीं करता, लेकिन डर या निराशावाद को भी नहीं अपनाता। यह नैतिकता, समानता और अर्थशास्त्र पर आधारित रचनात्मक विकल्प प्रस्तुत करता है। एक प्रमुख सुझाव है भारत में विवाह की न्यूनतम आयु की समीक्षा करना। वर्तमान में पुरुषों के लिए 21 वर्ष और महिलाओं के लिए 18 वर्ष की आयु निर्धारित है—जो आज के दौर में असमान और अप्रासंगिक प्रतीत होती है। बाल विवाह निषेध (संशोधन) विधेयक 2021 महिलाओं की न्यूनतम विवाह आयु को 21 वर्ष करने का प्रस्ताव करता है, परंतु जुलाई 2025 तक यह संसद में लंबित है। एनएसटी का सुझाव है कि पुरुषों और महिलाओं दोनों के लिए विवाह की आयु 25 वर्ष होनी चाहिए—जिससे कम उम्र की गर्भावस्था कम हो, मातृ-शिशु स्वास्थ्य बेहतर हो और महिलाएं शिक्षा व कौशल विकास द्वारा सशक्त हो सकें।...
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