आद्य गुरु शंकराचार्य की 108 फ़ीट ऊंची अदभुत प्रतिमा का लोकार्पण, धरा से नभ तक…”अद्वेत”
नितिनमोहन शर्मा। धन्य हो गई धरा। धन्य धन्य हुआ नील गगन। धन्य हुई मांधाता नगरी। धन्य धन्य हुई मेकल सुता माई नर्मदा। धन्य हुआ ओंकार पर्वत। धन्य धन्य हई ज्योतिर्लिंग...
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