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मतदाताओं से नेताओं तक: चुनाव लड़ने की उम्र कम करने हेतु नीडोनॉमिक्स का तर्क
प्रो. मदन मोहन गोयल, नीडोनॉमिक्स के प्रवर्तक एवं पूर्व कुलपति भारत में लोकतंत्र की ताकत केवल मतदान के अधिकार में ही नहीं, बल्कि शासन में भागीदारी के अधिकार में भी निहित है। जबकि 18 वर्ष के नागरिकों को कानूनी रूप से मतदान का अधिकार प्राप्त है, वे लोकसभा और राज्य विधानसभाओं के चुनाव लड़ने के लिए 25 वर्ष तथा राज्यसभा के लिए 30 वर्ष की आयु तक वंचित रहते हैं। यह विरोधाभास लोकतांत्रिक भागीदारी में एक खाई को उजागर करता है, जिसे नीडोनॉमिक्स स्कूल ऑफ थॉट (एनएसटी) लोकतंत्र की कमजोरी के रूप में देखता है। एनएसटी का तर्क है कि चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु कम से कम 21 वर्ष, यदि संभव हो तो 18 वर्ष कर दी जानी चाहिए, ताकि यह वयस्कता की आयु और मतदान अधिकार के अनुरूप हो। यदि भारत वास्तव में 2047 तक विक्सित भारत बनने के लक्ष्य को लेकर गंभीर है, तो ऐसी संरचनात्मक सुधार आवश्यक हैं, जहाँ समावेशिता, न्याय और वास्तविक युवा सशक्तिकरण शासन के स्तंभ बनें। आयु का विरोधाभास और लैंगिक अंतर आज भारत में 18 वर्ष की आयु मतदान करने, सेना में शामिल होने, अनुबंध करने, और लड़कियों के विवाह की कानूनी आयु के रूप में मान्यता प्राप्त है। किन्तु लड़कों को विवाह के लिए 21 वर्ष और चुनाव लड़ने के लिए 25 वर्ष तक प्रतीक्षा करनी पड़ती है। यह असंगतता किसी ठोस तर्क पर आधारित नहीं है। एनएसटी का कहना है कि परिपक्व लोकतंत्र की ओर बढ़ते भारत के लिए यह असमानता अनावश्यक और प्रतिकूल है। यदि नागरिक 18 वर्ष की आयु में वोट देने के लिए सक्षम माने जाते हैं, तो उन्हें अन्य लोगों का प्रतिनिधित्व करने योग्य भी माना जाना चाहिए। संसदीय सिफारिश और राजनीतिक हिचकिचाहट लोकसभा की कार्मिक, लोक शिकायत, कानून और न्याय संबंधी स्थायी समिति ने अपनी 132वीं रिपोर्ट (17वीं लोकसभा) में चुनाव लड़ने की न्यूनतम आयु 18 वर्ष करने की सिफारिश की थी। लेकिन इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। विडंबना यह है कि अधिकांश राजनीतिक दल “युवा प्रकोष्ठ” का दावा करते हैं, लेकिन उन्हें वास्तविक अधिकार नहीं देते। ये प्रकोष्ठ केवल दिखावटी मंच बनकर रह गए हैं। इस हिचकिचाहट की जड़ यथास्थिति बनाए रखने का डर है। स्थापित नेता युवा दावेदारों के साथ सत्ता साझा करने से बचते हैं, जो स्थापित प्रथाएँ को चुनौती दे सकते हैं। लेकिन लोकतंत्र को गतिशील और प्रतिनिधि बने रहने के लिए विकासशील होना ही पड़ेगा। भारत में युवा: जनसांख्यिकीय हकीकत भारत की मध्य आयु केवल 28 वर्ष है, जबकि विधायकों की औसत आयु 52 से 57 वर्ष है। 18वीं लोकसभा (2024) में 55 वर्ष से अधिक आयु के सांसदों की संख्या अत्यधिक है, जबकि केवल 3 सांसद 25 वर्ष की आयु में निर्वाचित हुए। यह विरोधाभास “जनसांख्यिकीय लाभांश” की अनदेखी को दर्शाता है, जिसका गुणगान तो बहुत किया जाता है परंतु व्यवहार में कम दिखता है। एनएसटी का तर्क है कि चुनाव लड़ने की आयु घटाने से युवा सहभागिता बढ़ेगी और धीरे-धीरे विधायी सदनों की संरचना में संतुलन आएगा। युवा नेताओं के पक्ष में तर्क युवा राजनीतिज्ञ अक्सर कम स्वार्थों और कम राजनीतिक बोझ के साथ सार्वजनिक जीवन में आते हैं। वे अधिक नैतिक मानदंडों, नवीन सोच और दीर्घकालिक दृष्टिकोण के प्रति संवेदनशील होते हैं। एनएसटी का मानना है कि निर्णय-प्रक्रिया में युवाओं को शामिल करने से शासन में नए विचार, ऊर्जा और प्रतिबद्धता आएगी। इससे संसद और विधानसभाओं की बहसों को नई दिशा मिलेगी, खासकर शिक्षा, रोजगार, पर्यावरण और प्रौद्योगिकी जैसे विषयों पर।...
- By Global Governance News
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- August 28, 2025







