Tag: बिजली (संशोधन) विधेयक 2025 पर
मुफ्त बिजली से न्यायपूर्ण बिजली तक: बिजली (संशोधन) विधेयक 2025 पर नीडोनॉमिक्स का परिप्रेक्ष्य
प्रो. मदन मोहन गोयल प्रवर्तक, नीडोनॉमिक्स एवं पूर्व कुलपति (तीन बार) नीडोनॉमिक्स स्कूल ऑफ थॉट (एनएसटी) का मानना है कि बिजली (संशोधन) विधेयक 2025 भारत के ऊर्जा क्षेत्र में सुधार का एक समयोचित और महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है—बशर्ते इस पर खुली, नैतिक और दूरदर्शी मानसिकता के साथ चर्चा की जाए। इस सुधार का मूल तत्व एक बुनियादी परिवर्तन है: मुफ्त बिजली से न्यायपूर्ण बिजली की ओर संक्रमण, जो नीडोनॉमिक्स के सिद्धांत “आवश्यकताओं की अर्थशास्त्र, लोभ की नहीं” पर आधारित है। यह दृष्टिकोण ऊर्जा नीति को लोकलुभावन वादों से हटाकर उद्देश्यपूर्ण शासन की ओर ले जाने का आह्वान करता है—जहाँ सब्सिडी विवेकपूर्ण हो, उपभोक्ता जिम्मेदार हों, और स्थिरता नीति का केंद्रबिंदु बने। 1. बिजली सब्सिडी की खामियां कई दशकों से बिजली सब्सिडी राजनीतिक रूप से आकर्षक रही है, परंतु आर्थिक रूप से विनाशकारी सिद्ध हुई है। प्रारंभ में किसानों और कमजोर वर्गों की सहायता हेतु शुरू की गई ये रियायतें धीरे-धीरे बिजली की कीमतों में विकृति, अत्यधिक खपत और राजकोषीय असंतुलन का कारण बन गईं। राज्य सरकारें आज भी वितरण कंपनियों (DISCOMs) के बकाया भुगतान के बोझ से दबी हुई हैं, जो वित्तीय संकट में लगातार जूझ रही हैं। जब बिजली “मुफ्त” हो जाती है, तो उसका मूल्यबोध भी समाप्त हो जाता है—परिणामस्वरूप अपव्यय बढ़ता है और जवाबदेही घटती है। यह स्थिति विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा जैसे राज्यों में स्पष्ट दिखती है, जहाँ कृषि के लिए मुफ्त बिजली ने भूजल के अत्यधिक दोहन को बढ़ावा दिया है, जिससे पारिस्थितिक और जल संकट गहराया है। जो नीति कल्याण के उद्देश्य से शुरू हुई थी, वह आज अस्थिर आर्थिक और पर्यावरणीय मॉडल में बदल चुकी है। 2. नीडोनॉमिक्स: एक नैतिक विकल्प नीडोनॉमिक्स एक नैतिक और जन-केन्द्रित आर्थिक ढांचा है जो सब्सिडी-आधारित दृष्टिकोण का सतत विकल्प प्रस्तुत करता है। यह तीन स्तंभों पर आधारित है—लोकलुभावनवाद पर संतुलन, अवसरवाद पर नैतिकता, और राजनीतिक लाभ पर सामान्य ज्ञान। ऊर्जा क्षेत्र में सुधार के संदर्भ में नीडोनॉमिक्स वास्तविक आवश्यकता के अनुसार बिजली के मूल्य निर्धारण की वकालत करता है। उपभोक्ताओं को अपनी खपत के अनुरूप उचित और वहनीय मूल्य देना चाहिए, जिससे जिम्मेदारी, दक्षता और स्थिरता को बढ़ावा मिले। नीडोनॉमिक्स का “उपयोगकर्ता-भुगतान सिद्धांत ” गरीब विरोधी नहीं, बल्कि जनहितकारी है। जब व्यक्ति बिजली की लागत में थोड़ा भी योगदान देता है, तो वह उसका महत्व समझता है, उसे संयमपूर्वक उपयोग करता है, और आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था की दिशा में योगदान देता है। इसलिए, सार्वभौमिक सब्सिडी के बजाय केवल वास्तविक रूप से जरूरतमंदों को लक्षित सहायता दी जानी चाहिए—जिससे वित्तीय अनुशासन और पर्यावरणीय संतुलन बना रहे। 3. बिजली (संशोधन) विधेयक 2025 के माध्यम से सुधार बिजली (संशोधन) विधेयक 2025 पारदर्शिता, प्रतिस्पर्धा और दक्षता पर अपने ध्यान के लिए सराहनीय है। वितरण में अनेक लाइसेंसधारकों की अनुमति और निजी भागीदारी को प्रोत्साहन देना आधुनिकीकरण और जवाबदेही की दिशा में सही कदम है। परंतु, निजीकरण का अर्थ कॉर्पोरेट नियंत्रण नहीं होना चाहिए। इसे नैतिकता और समानता द्वारा निर्देशित होना चाहिए, शोषण द्वारा नहीं। नीडोनॉमिक्स के आवश्यकता-वहनीयता-मूल्य (एनएडब्ल्यू) दृष्टिकोण पर आधारित विपणन ढांचा व्यावहारिक और नैतिक दिशा प्रदान करता है: Need (आवश्यकता): प्रत्येक नागरिक को बिजली की मूलभूत मानवीय अधिकार के रूप में उपलब्धता सुनिश्चित करें।...
- By Global Governance News
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- October 21, 2025







