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Supreme Court rejects petition filed against 2018 Delhi Jail Rules, relatives and lawyers will be able to meet prisoners only twice a week

सुप्रीम कोर्ट ने 2018 दिल्ली जेल नियमों के खिलाफ दायर की याचिका खारिज, कैदियों से सप्ताह में दो बार ही मिल सकेंगे परिजन-वकील

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 9 जनवरी। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को 2018 दिल्ली जेल नियमों के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया, इसमें परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों, दोस्तों और कानूनी सलाहकारों द्वारा कैदी से मिलने की संख्या की सीमा तय की गई है। न्यायमूर्ति बेला एम. त्रिवेदी और न्यायमूर्ति पंकज मिथल की पीठ ने उठाए गए मुद्दे को नीतिगत मामला बताते हुए कहा कि वह पिछले साल फरवरी में पारित दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश में हस्तक्षेप करने के इच्छुक नहीं हैं। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा था कि कुल दौरे की संख्या को सप्ताह में दो बार सीमित करना पूरी तरह से मनमाना नहीं कहा जा सकता है।

तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एस.सी. शर्मा और सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ ने कहा था, नीति के मामलों में, न्यायालय अपने निष्कर्ष को सरकार द्वारा निकाले गए निष्कर्ष से प्रतिस्थापित नहीं करता है, केवल इसलिए कि एक और दृष्टिकोण संभव है, इसलिए यह न्यायालय परमादेश रिट जारी करने वाला कोई भी आदेश पारित करने के लिए इच्छुक नहीं है। लेक‍िन उच्च न्यायालय ने जनहितयाचिकाकर्ताओं जय ए. देहाद्राई और सिद्धार्थ अरोड़ा को अपने सुझाव प्रदान करते हुए एनसीटी दिल्ली सरकार को एक प्रतिनिधित्व देने के लिए कहा था।

जनहित याचिका में जेल नियमों में संशोधन के लिए प्रार्थना की गई थी कि कानूनी सलाहकारों के साथ मुलाकात सोमवार से शुक्रवार तक उचित आवंटित समय के लिए खुला रहे और प्रति सप्ताह मुलाकात की कोई सीमा न हो। याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया था कि सप्ताह में दो बार मुलाकातों की संख्या सीमित करना भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है क्योंकि यह एक विचाराधीन कैदी के कानूनी प्रतिनिधित्व के लिए पर्याप्त संसाधन रखने के अधिकार को सीमित करता है।

उच्च न्यायालय के समक्ष, राज्य ने तर्क दिया था कि दिल्ली की जेलों में कैदियों की संख्या को देखते हुए, परिवार के सदस्यों, रिश्तेदारों, दोस्तों और कानूनी सलाहकार द्वारा अनुमत मुलाकातों की संख्या पर एक सीमा लगाने का निर्णय लिया गया है।

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