समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 19 जून: इजरायल और ईरान के बीच छिड़ी जंग ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया है। हालात इतने गंभीर हो गए हैं कि कई देश अब खुले तौर पर एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हो गए हैं। अमेरिका ने साफ कर दिया है कि वह इजरायल के साथ खड़ा है और जरूरत पड़ी तो ईरान पर सैन्य कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा। अमेरिकी प्रशासन की ओर से संकेत मिल चुके हैं कि रणनीतिक स्तर पर हमले की तैयारियां भी की जा चुकी हैं।
इसके अलावा फ्रांस, ब्राजील, मैक्सिको, इंग्लैंड, अजरबैजान और ब्रिटेन जैसे देश भी इजरायल के समर्थन में आने को तैयार हैं। इस गठबंधन का मुख्य उद्देश्य ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने से रोकना है, जिसे अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के लिए सीधा खतरा माना जा रहा है।
ईरान को मिला रूस और चीन का समर्थन
दूसरी तरफ ईरान को भी अकेला नहीं छोड़ा गया है। रूस ने सबसे पहले खुलकर ईरान के पक्ष में बयान दिया है और उसे अपना रणनीतिक सहयोगी बताया है। चीन, पाकिस्तान, नॉर्थ कोरिया, आर्मेनिया, बेलारूस, लेबनान और यमन जैसे देश भी ईरान के पक्ष में खड़े नजर आ रहे हैं। इन देशों का मानना है कि अमेरिका और इजरायल क्षेत्रीय संतुलन को बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं।
रूस और चीन के इस समर्थन ने हालात को और जटिल बना दिया है। जहां एक ओर पश्चिमी देशों का एक मोर्चा तैयार हो रहा है, वहीं पूर्वी देशों का एक दूसरा धड़ा सामने आ चुका है।
भारत की तटस्थ भूमिका, पर बढ़ते दबाव
भारत के लिए स्थिति बेहद संवेदनशील है। दोनों ही देशों, इजरायल और ईरान, से भारत के ऐतिहासिक और कूटनीतिक संबंध मजबूत रहे हैं। ऐसे में भारत ने फिलहाल तटस्थ रुख अपनाया है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबावों के बीच भारत पर भी जल्द कोई पक्ष चुनने का दबाव बन सकता है।
अब तक भारत सरकार की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है कि वह इस संकट में किसका समर्थन करेगा। लेकिन अगर अमेरिका ने वास्तव में ईरान पर हमला किया और हालात युद्ध में बदल गए, तो भारत को अपनी नीति स्पष्ट करनी होगी।
तीसरे विश्व युद्ध की संभावना और वैश्विक शांति पर संकट
स्थिति इतनी नाजुक हो चुकी है कि विश्व स्तर पर तीसरे विश्व युद्ध की संभावनाएं भी व्यक्त की जा रही हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव अपने चरम पर है। हालांकि संयुक्त राष्ट्र और अन्य शांति संस्थान तनाव को खत्म करने की कोशिशों में लगे हुए हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
ईरान ने साफ कर दिया है कि वह सरेंडर नहीं करेगा और अपने आत्मसम्मान की रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाएगा। वहीं इजरायल भी पीछे हटने को तैयार नहीं है और अमेरिकी समर्थन से उसे और ताकत मिली है।