भारत-न्यूजीलैंड : फ्री ट्रेड डील ,पीएम मोदी–पीएम लक्सन की बनी सहमति
समग्र समाचार सेवा नई दिल्ली 22 दिसंबर -भारत और न्यूजीलैंड के बीच मुक्त व्यापार समझौते (Free Trade Agreement–FTA) को लेकर चल रही बातचीत अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गई है।...
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अमित शाह ने वीर सावरकर को अद्वितीय देशभक्त, समाज-सुधारक और सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का प्रणेता बताया ‘सागरा प्राण तळमळला’ को देशभक्ति की अभिव्यक्ति की पराकाष्ठा करार दिया अंडमान-निकोबार को स्वतंत्रता सेनानियों...
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समग्र समाचार सेवा इंफाल, मणिपुर | 11 दिसंबर: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गुरुवार से मणिपुर के दो दिन के दौरे पर जाएंगी। इस दौरान वह इंफाल में आयोजित 86वें नुपी लाल...
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PM मोदी ने पुरानी तस्वीर साझा कर प्रणब मुखर्जी को नमन किया अमित शाह ने कहा– संविधान की समझ ने उन्हें खास बनाया जेपी नड्डा ने लिखा– उनकी विनम्रता और...
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यूनेस्को ने दीपावली को अमूर्त सांस्कृतिक धरोहर सूची में शामिल किया पीएम मोदी ने इसे भारतीय संस्कृति की वैश्विक पहचान बताया विदेश मंत्रालय और एस. जयशंकर ने भी निर्णय का...
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नई दिल्ली के केशव कुञ्ज में ‘लाचित बरफुकन’ पुस्तक का भव्य विमोचन विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा और आईसीएसएसआर के सदस्य सचिव प्रो. धनंजय सिंह रहे मुख्य अतिथि लेखक डॉ....
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परोमिता दास समग्र समाचार सेवा नई दिल्ली, 5 अक्टूबर: बिहार की सियासत एक बार फिर करवट लेने को तैयार है। विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर जारी ओपिनियन पोल्स में स्पष्ट...
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प्रो. मदन मोहन गोयल, प्रवर्तक नीडोनॉमिक्स एवं पूर्व कुलपति (तीन बार) विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ ) की विश्व व्यापार रिपोर्ट 2025 जिसका शीर्षक है “Making Trade and AI Work Together to the Benefit of All” ( सभी के लाभ के लिए व्यापार और एआई को एक साथ काम करना -परिशिष्ट और ग्रंथसूची को छोड़कर 114 पृष्ठ), कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई ) और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के अंतर्संबंध पर वैश्विक संवाद में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह रिपोर्ट न केवल एआई और व्यापार के तेजी से विकसित होते संबंध का विश्लेषण करती है बल्कि इस पर बल देती है कि यदि सही नीतियाँ और वैश्विक सहयोग सुनिश्चित हो तो इन्हें समावेशी विकास के लिए उपयोग किया जा सकता है। नीडोनॉमिक्स स्कूल ऑफ थॉट (एनएसटी ), जिसकी मूल दर्शनशिला आवश्यकताओं और संसाधनों में संतुलन बनाने और अर्थशास्त्र में नैतिकता का समावेश करने की है, ने इस रिपोर्ट की आलोचनात्मक किंतु रचनात्मक दृष्टि से समीक्षा की है। चुनौती केवल तकनीकी या आर्थिक नहीं है—यह गहराई से मानवीय और नैतिक भी है। एआई या तो “बंदर मन” बना रह सकता है, जो दुरुपयोग और असमानता की ओर झुका हो, या “साधु मन” बन सकता है, जो आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता (एसआई ) से संचालित होकर सतत और समावेशी विकास की ओर अग्रसर हो। एआई और व्यापार: अवसर एवं चुनौतियाँ एआई वैश्विक अर्थव्यवस्था को नया रूप दे रहा है—व्यापार लागत घटाकर, उत्पादकता बढ़ाकर, और छोटे उद्यमों को भी वैश्विक बाजार में भागीदारी का अवसर देकर। डब्ल्यूटीओ के सिमुलेशन बताते हैं कि एआई वैश्विक व्यापार बढ़ाने और विभिन्न अर्थव्यवस्थाओं में वास्तविक आय बढ़ाने की महत्वपूर्ण क्षमता रखता है। एआई -सक्षम सेवाएँ—डिजिटल और स्केलेबल होने के कारण—व्यापार, नवाचार और उद्यमिता के नए द्वार खोल सकती हैं। फिर भी, इसका रूपांतरण स्वतः सुनिश्चित नहीं है। डिजिटल विभाजन अब भी कायम है, जो बुनियादी ढाँचे, हार्डवेयर और मानव क्षमताओं की असमानताओं में निहित है। यदि सुधारात्मक कदम न उठाए गए, तो AI असमानता को और गहरा करेगा, तुलनात्मक लाभों को बदल देगा और कमजोर अर्थव्यवस्थाओं को हाशिये पर धकेल देगा। श्रम बाजार में अव्यवस्था यदि अनसुलझी रही, तो उच्च-कुशल और अल्प-कुशल श्रमिकों के बीच की खाई और बढ़ेगी। एनएसटी का मानना है कि एआई -आधारित व्यापार से समावेशी विकास स्वतः नहीं होगा। इसके लिए व्यापार और व्यापार-संबंधी नीतियों को सचेत रूप से इस तरह गढ़ना होगा कि वे पहुँच, न्याय और स्थिरता सुनिश्चित करें। डब्ल्यूटीओ की रिपोर्ट से नीतिगत अंतर्दृष्टियाँ डब्ल्यूटीओ का नया एआई ट्रेड पॉलिसी ओपेननेस इंडेक्स (एआई - टीपीओआई ) देशों और आय समूहों के बीच एआई से संबंधित नीतियों में तीव्र अंतर दिखाता है। यह संकेत है कि केवल खुलेपन से काम नहीं चलेगा—प्रतिस्पर्धा कानून, बौद्धिक संपदा अधिकार, शिक्षा और डिजिटल अवसंरचना जैसी पूरक नीतियाँ भी उतनी ही आवश्यक हैं। मुख्य निष्कर्ष इस प्रकार हैं: शिक्षा और कौशल विकास: उच्च और निम्न आय वाली अर्थव्यवस्थाओं के बीच एआई अपनाने हेतु कार्यबल की तैयारी में असमानता बनी हुई है। अवसंरचना निवेश: ऊर्जा और डिजिटल प्रणालियों के लिए भारी पूँजी प्रवाह की आवश्यकता है। असमान पहुँच से असमानता और गहरी होगी। अंतरराष्ट्रीय सहयोग: वर्तमान प्रयास अभी आकांक्षात्मक हैं। क्षेत्रीय व्यापार समझौते (आरटीए ) कुछ कदम आगे हैं, पर डब्ल्यूटीओ ने अभी तक एआई शासन के लिए व्यापक ढाँचा विकसित नहीं किया है। पारदर्शिता और संवाद: यदि खुले संवाद, क्षमता निर्माण और विश्वास निर्माण तंत्र मौजूद हों तो व्यापार एआई के प्रसार का साधन बन सकता है। रिपोर्ट इस बात पर जोर देती है कि भविष्य में एआई का प्रभाव आज लिए गए निर्णयों पर निर्भर करेगा। नीडोनॉमिक्स दृष्टिकोण: बंदर मन से साधु मन की ओर एनएसटी इन निष्कर्षों को दार्शनिक और नैतिक दृष्टि से देखता है। “बंदर मन” एआई के दुरुपयोग का प्रतीक है—लापरवाह शोषण, लाभ-लोलुप एकाधिकार और असमान पहुँच। एआई से वास्तविक “संपत्ति” अर्जित करने के लिए मानवता को “साधु मन” की ओर बढ़ना होगा—जहाँ आत्म-अनुशासन, निष्पक्षता और आध्यात्मिक बुद्धिमत्ता (एस.आई) मार्गदर्शक हों। व्यावहारिक स्तर पर यह रूपांतरण इस प्रकार संभव है: स्ट्रीट स्मार्ट डब्ल्यूटीओ सदस्य – नीति निर्माण में...
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समग्र समाचार सेवा काठमांडू, 26 अगस्त-नेपाल में एक सनसनीखेज खुलासा हुआ है। जानकारी के अनुसार तुर्की और कुछ विदेशी नागरिक गुप्त रूप से तराई क्षेत्र के किशोरों को कुरान पढ़ा...
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प्रो. मदन मोहन गोयल, नीडोनॉमिक्स के प्रवर्तक एवं पूर्व कुलपति आधुनिक युग, जो तीव्र शहरीकरण, सुविधा-संस्कृति और जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के बढ़ते प्रकोप से चिन्हित है, ने हमारे भोजन के प्रति दृष्टिकोण को पूरी तरह बदल दिया है। जो भोजन पोषण का स्रोत होना चाहिए था, वह आज दिखावे और स्वाद का साधन बन गया है। इस बदलाव ने मधुमेह, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और मोटापे जैसी गैर-संक्रामक बीमारियों की महामारी को जन्म दिया है। ये केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य को नहीं, बल्कि राष्ट्रीय उत्पादकता और सार्वजनिक वित्त को भी प्रभावित कर रही हैं। इस परिप्रेक्ष्य में नीडोनॉमिक्स स्कूल ऑफ थॉट (एनएसटी), जिसे प्रो. एम.एम. गोयल द्वारा विकसित और प्रचारित किया गया है, भोजन संबंधी उपभोग को आवश्यकता-आधारित बनाने का आह्वान करता है। एनएसटी इस बात पर बल देता है कि भोजन को औषधि के रूप में लिया जाए — यह सिद्धांत प्रिवेंटिव हेल्थ, आर्थिक विवेक और आध्यात्मिक संतुलन पर आधारित है। "भोजन पहले, गोलियाँ बाद में" का नारा इस तर्क को संक्षेप में प्रस्तुत करता है। यदि आज हम अपने भोजन को औषधि नहीं बनाएंगे, तो कल हमें औषधियों को भोजन बनाना पड़ेगा। नीडोनॉमिक्स के दृष्टिकोण से भोजन पर पुनर्विचार नीडोनॉमिक्स एक समग्र आर्थिक दर्शन है जो व्यक्तिगत, सामाजिक और संस्थागत आचरण में आवश्यकता को लालच पर प्राथमिकता देने की वकालत करता है। यह उपभोक्तावाद और अंधाधुंध भौतिकवाद की आलोचना करता है और हर क्षेत्र में विचारशील, नैतिक विकल्पों को बढ़ावा देता है। जब इसे खान-पान पर लागू किया जाता है, तो यह पोषणीय अनुशासन, संयम और सजगता की मांग करता है। जब भोजन को शरीर और मस्तिष्क के ईंधन के रूप में समझा जाता है, तब यह बीमारी के विरुद्ध पहली रक्षा रेखा बनता है। लेकिन जब स्वाद, चलन या प्रलोभन के अनुसार उपभोग किया जाता है, तब यही भोजन धीरे-धीरे विष बन जाता है। नीडोनॉमिक्स हमें यह नैतिक और दार्शनिक ढांचा प्रदान करता है कि हम अपने आहार संबंधी विकल्पों पर नियंत्रण वापस पाएं और समझें कि अच्छा स्वास्थ्य विलासिता नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। आहार की उपेक्षा के आर्थिक परिणाम खानपान से जुड़ी बीमारियाँ व्यक्तियों और समाज दोनों पर भारी आर्थिक बोझ डालती हैं। परिवारों की आय का बड़ा हिस्सा दवाओं और इलाज पर खर्च होता है, जिसे उचित खानपान से टाला जा सकता था। सरकारें भी भारी मात्रा में संसाधन स्वास्थ्य सेवा में लगाती हैं, जो अक्सर जीवनशैली जनित बीमारियों से निपटने में लगी होती हैं। एनएसटी सिखाता है कि अर्थशास्त्र केवल धन का नहीं, बल्कि विवेकपूर्ण और आवश्यक निर्णयों का विज्ञान है। आवश्यकता के अनुसार भोजन करना न केवल चिकित्सा व्यय को कम करता है, बल्कि उत्पादकता बढ़ाता है और जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाता है। यह संसाधनों को उपचारात्मक स्वास्थ्य से प्रिवेंटिव हेल्थ की ओर मोड़ता है— जो कुशल शासन और सतत विकास के लक्ष्यों के अनुरूप है। भारत की प्राचीन परंपराओं की यह उक्ति— “भोजन ही औषधि हो और औषधि ही भोजन बने”— नीडोनॉमिक्स के दर्शन में पूरी तरह गूंजती है। इसका आधुनिक रूप है: सही खाओ, हल्का रहो, उज्ज्वल जियो। आहार में नीडो-अनुशासन की आवश्यकता अनुशासन, एनएसटी का मूलभूत सिद्धांत है। यह हमें यह देखने का आग्रह करता है: • क्या खाएं: प्राकृतिक, मौसमी, स्थानीय और बिना प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ को प्राथमिकता दें। •कितना खाएं: संयम के सिद्धांत का पालन करें—आधा पेट भरें। • कब खाएं: जैविक घड़ी का सम्मान करें और देर रात या अचानक खाने से बचें। यह नीडो-अनुशासन प्रतिबंधात्मक नहीं, बल्कि मुक्ति दायक है। यह व्यक्ति को भावनात्मक भोजन, सामाजिक दबाव और आदतन अति-भोजन से मुक्त करता है। सोच-समझकर किए गए आहार विकल्प भोजन की बर्बादी को भी कम करते हैं—जो NST का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत है। सात्त्विक भोजन का सेवन (शुद्ध, संतुलित और उत्तेजना रहित) न केवल शारीरिक स्वास्थ्य को, बल्कि मानसिक स्पष्टता और भावनात्मक स्थिरता को भी सुधारता है। यह शरीर, मस्तिष्क और आत्मा के बीच समरसता बनाता है—जो व्यक्तिगत कल्याण और नागरिक जिम्मेदारी दोनों के लिए आवश्यक है। नैतिक कर्तव्य: स्वयं और समाज के लिए स्वास्थ्य का चयन नीडोनॉमिक्स के ढांचे में स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत लक्ष्य नहीं, बल्कि नैतिक उत्तरदायित्व है। जब व्यक्ति जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों के कारण बीमार पड़ते हैं, तो इसका प्रभाव केवल उन्हीं पर नहीं, बल्कि पूरे समाज पर पड़ता है—परिवार पीड़ित होते हैं, कार्यस्थल की उत्पादकता घटती है और राष्ट्र संसाधनों से वंचित होता है। इसलिए, विवेकपूर्ण भोजन करना नागरिकता का नैतिक कार्य है। यह दवाओं पर निर्भरता कम करता है, संसाधनों के दुरुपयोग को रोकता है, और पीढ़ी-दर-पीढ़ी कल्याण को बढ़ावा देता है। जब सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यक्तिगत संयम और जागरूकता पर आधारित होता है, तब वह एक साझा राष्ट्रीय उपलब्धि बन जाता है। तुरंत संतुष्टि के युग में, नीडो-नैतिकता को अपनाना—यानी पोषण के लिए खाना, न कि विलासिता के लिए—एक क्रांतिकारी कदम है। यह भोजन को कॉर्पोरेट नियंत्रण से मुक्त कर सजग नागरिकों के हाथों में वापस सौंपता है। रसोईघर को बनाएं औषधालय: स्वस्थ भारत की दृष्टि जैसा कि भारत 2047 तक विकसित राष्ट्र (विकसित भारत @2047) बनने की ओर अग्रसर है, स्वस्थ भारत (सशक्त भारत) को इसकी आधारशिला बनाना होगा। इसी उद्देश्य की पूर्ति में नीडोनॉमिक्स का प्रिवेंटिव हेल्थ मॉडल अत्यंत आवश्यक है। नीति-निर्माताओं को एनएसटी के सिद्धांतों को स्वास्थ्य, पोषण और शिक्षा नीति में शामिल करना चाहिए: • स्वस्थ भोजन की जागरूकता को पाठ्यक्रम और जन-संचार माध्यमों के जरिए फैलाना। • जंक फूड के भ्रामक विज्ञापनों को नियंत्रित करना, विशेषकर जो बच्चों को लक्षित करते हैं। • परंपरागत भोजन ज्ञान को पुनर्जीवित करना, स्थानीय कृषि, आयुर्वेद और घर के बने भोजन को प्रोत्साहित करना। • सामुदायिक रसोई घरों को बढ़ावा देना, जो सादा और सात्त्विक भोजन सुलभ दरों पर उपलब्ध कराएं।...
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