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स्तम्भ

डोभाल बनाम जयशंकर : दो रानियों की शतरंज

अनिल त्यागी यह एक अनोखा खेल है। चौंसठ खानों के इस पट पर केवल सफ़ेद मोहरे सजे हैं। स्वाभाविक है, एक राजा साहब भी हैं जो बाकी सबसे ज़रा ऊँचे और कद्दावर दिखते हैं। पर इस बोर्ड की असली अजूबाई यह है कि यहाँ एक नहीं, दो-दो रानियाँ (वज़ीर) हैं।…

अमेरिकी में संघ प्रमुख के संबोधन का निहितार्थ

निशिकांत ठाकुर भारत का इतिहास बताता है कि आर्य, यवन, शक, गुर्जर, जट्ट, हूण, अरब, तुर्क आदि कितनी ही जातियां समय-समय पर यहां आईं। उन्होंने पहले अपना अलग शासक या उपनिवेशवादी समाज कायम कर यहां की राष्ट्रीयता लेनी चाही; लेकिन जब शासन हाथ से…

कांग्रेस अमर है, वह मर नहीं सकती, उसके दोष बने रहेंगे और गुण लौट-लौट कर आएंगे

शरद जोशी कांग्रेस को राज करते-करते 30 साल बीत गए. कुछ कहते हैं, तीन सौ साल बीत गए. गलत है. सिर्फ तीस साल बीते. इन तीस सालों में कभी देश आगे बढ़ा, कभी कांग्रेस आगे बढ़ी. कभी दोनों आगे बढ़ गए, कभी दोनों नहीं बढ़ पाए. फिर यों हुआ कि देश आगे…

राजा, पगड़ी और शोषण

एक राजा ने दरबार में सुबह ही सुबह दरबारियों को बुलाया । उसका दरबार भरता ही जाना था की एक अजनबी यात्री वहा आया । वह किसी दूर देश का रहने वाला होगा । उसके वस्त्र पहचाने हुए से नही मालूम पड़ते थे । उसकी शक्ल भी अपरिचित थी , लेकिन…

पीढ़ियों के फासले में संवाद की जरूरत

डॉ. प्रियदर्शिनी पुरोहित परिवर्तन प्रकृति का नियम है और इस नियम के अनुसार वीडियो की सोच में बदलाव भी एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, परंतु आज की युवा पीढ़ी में परिवर्तन के रूप में संस्कारों और जीवन-मूल्यों में गिरावट आज हमारे देश के…

शिक्षक : बदलते समय में बदलते अर्थ

डॉ. विनय कुमार वर्मा मनुष्य जब इस पृथ्वी पर आया, तब उसके पास न विद्यालय थे, न विश्वविद्यालय, न पाठ्यपुस्तकें और न ही डिग्रियाँ। फिर भी वह सीखता था। प्रकृति उसकी पहली पाठशाला थी, अनुभव उसकी पहली पुस्तक और जीवन उसका पहला शिक्षक। धीरे-धीरे…

गोदी मीडिया’ के मौजूदा शोर के बीच नेहरू-इंदिरा दौर की कुछ भूली- बिसरी यादें

सुरेंद्र किशोर प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरू ने दिल्ली के एक बड़े अखबार के संपादक दुर्गा दास को उनके पद से हटवा दिया था। नेहरू के निजी सचिव ने अखबार के मालिक का फोन करके हटवा दिया। दुर्गादास प्रधान मंत्री नेहरू की आलोचना लिख रहे थे।…

ज़ी टीवी के सुभाष चंद्रा का सच और ज़रूरी विमर्श

मनीष खेमका ज़ी टीवी और एस्सेल ग्रुप के संस्थापक सुभाष चंद्रा का ₹22,000 करोड़ का कर्ज सिर्फ ₹6.5 करोड़ में माफ़ कर दिया गया। पिछले दिनों प्रकाशित यह खबर वाक़ई सनसनीख़ेज़ थी। आंकड़े इतने बड़े और आश्चर्यजनक थे जिसने सभी को सोचने पर…

मनु स्मृति की गलत विवेचना के साथ राहुल का हिंदुत्व पर हमला

अतुल सिंह राजपूत चित्र में पहली ईसाई है, दूसरी मुस्लिम, और तीसरी साड़ी में मनुस्मृति द्वारा गुलाम बनाई हुई महिला है। मनुस्मृति पर ये लेख राहुल विंची के मुंह पर एक थप्पड़ है।। " मनुस्मृति " मनुस्मृति कहती है कि कन्या का अविवाहित रह जाना…

आस्था नागरिक की, प्रशासन संविधान का

ज्योतिका कालरा प्रशासन के पास कभी-कभी स्कूल बंद करने के उचित कारण हो सकते हैं। कोई धार्मिक यात्रा या जुलूस सड़कों पर भारी भीड़ पैदा कर सकता है, पुलिस व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है और बच्चों की आवाजाही को वास्तव में असुरक्षित बना…