Global Governance News- Asia's First Bilingual News portal for Global News and Updates

We love to bring to life as a developer and I aim the today do this using whatever front end tools of the necessary.

Quick Contact:

Live News

We love to bring to life as a developer and I aim the today do this using whatever front end tools of the necessary.

Quick Contact:

कुशल लॉजिस्टिक्स इको-प्रणाली हमें अमृत काल से होते हुये आत्मनिर्भर भारत की ओर ले जायेगीः पीयूष गोयल

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 22मार्च। पीयूष गोयल ने कहा है कि इंडिया@75 से इंडिया@100 तक की यात्रा को अमृत काल के माध्यम से आत्मनिर्भर भारत बनने के लिए एक कुशल लॉजिस्टिक्स इको-प्रणाली की आवश्यकता है। वे नई दिल्ली में एशियाई विकास बैंक (एडीबी) के सहयोग से वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के संवर्धन एवं आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) द्वारा आयोजित “लॉजिस्टिक्स कॉस्ट फ्रेमवर्क” पर एक दिवसीय कार्यशाला में बोल रहे थे। उन्होंने उल्लेख किया कि भारतमाला, सागरमाला, समर्पित माल गलियारा (डीएफसी) और क्रांतिकारी पीएम गतिशक्ति जैसी पहलों से बुनियादी ढांचे के विकास के प्रयासों से भारत की लॉजिस्टिक्स लागत दो अंक से घटकर एक अंक पर आ जाएगी। उन्होंने लॉजिस्टिक लागत की गणना करते समय भारत के भूगोल, भूभाग, आकार और जटिलताओं, व्यापार की मात्रा और मूल्य आदि पर ध्यान देने का सुझाव दिया।

उन्होंने बताया कि पिछले नौ वर्षों में, सकल घरेलू उत्पाद के मामले में जो भारत पहले 10वां सबसे बड़ा देश था, वह अब दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा देश बन गया है। अप्रैल 2023 से मार्च 2024 तक लागू होने जा रही प्रभावशाली बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के माध्यम से भारत आने वाले दो-तीन वर्षों में तीसरा सबसे बड़ा देश बन जाएगा। उन्होंने आगे कहा कि ई-कॉमर्स, स्मार्ट एफटीए, अंतर्राष्ट्रीय गुणवत्ता मानक, अच्छे विनिर्माण व्यवहार, हमारी सफल स्टार्टअप इको-प्रणाली, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020, ड्रोन प्रौद्योगिकी, कृत्रिम बौद्धिकता, मजबूत पीपीपी सहयोग और केंद्र-राज्य साझेदारी भारत के विकास को गति देने का काम करेंगे। उन्होंने कहा कि नीतिगत उपाय के रूप में लॉजिस्टिक्स के बल पर ‘भारत से विश्व की सेवा’ और ‘विश्व के लिये भारत में निर्माण’ की लक्ष्य हासिल करने में मदद मिलेगी।

डीपीआईआईटी के सचिव अनुराग जैन ने कहा कि सिर्फ चार वर्षों में भारत का बुनियादी ढांचा पहले की तुलना में कई गुना बेहतर हो गया है। उन्होंने यह भी साझा किया कि कैसे पीएम गतिशक्ति राष्ट्रीय मास्टर-प्लान ने डिजिटल सर्वेक्षणों के माध्यम से नियोजन प्रक्रिया में क्रांति ला दी है। इसने डीपीआर तैयार करने और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं, वित्तीय और मानव संसाधनों के इष्टतम उपयोग में समय और लागत को कम करने में मदद की है।

डीपीआईआईटी की लॉजिस्टिक्स प्रभाग की विशेष सचिव सुमिता डावरा ने समापन वक्तव्य के दौरान अंतर्राष्ट्रीय और भारतीय विशेषज्ञों द्वारा प्रस्तुत दृष्टिकोण और कार्यप्रणाली का उल्लेख किया। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि कार्यशाला के परिणामस्वरूप, नीति आयोग, सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (एमओएसपीआई), नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (एनसीएईआर), अकादमिक विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों सहित एक कार्यबल की स्थापना की जाएगी, जो समयबद्ध तरीके से लॉजिस्टिक्स लागत प्रारूप तैयार करेगा।

कार्यशाला में नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य (ईएसी पीएम) डॉ राकेश मोहन; दक्षिण एशिया विभाग, एडीबी के महानिदेशक केनिची योकोयामा, एडीबी के वरिष्ठ पदाधिकारी, अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालयों के वरिष्ठ शिक्षाविद; संबंधित मंत्रालयों/विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और निजी क्षेत्र के प्रतिनिधि उपस्थित थे। कार्यशाला में, लॉजिस्टिक्स लागत गणना के महत्त्व पर विचार प्रस्तुत किए गए। इस सिलसिले में याद रहे कि यही वह समय है, जिसके दौरान भारत निरंतर वृद्धि और विकास के सक्षम कालखंड में प्रवेश कर रहा है। अकादमिक जगत के दिग्गजों ने लॉजिस्टक्स लागत की गणना के लिए मौजूदा वैश्विक ढांचे और मॉडल पेश किये। इस कार्यशाला ने लॉजिस्टक्स क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाले दुनिया भर के सर्वश्रेष्ठ विचारकों को एक मंच पर लाने का अवसर दिया।

कार्यशाला में लॉजिस्टक्स लागत मूल्यांकन के महत्त्वपूर्ण पक्षों पर चर्चा करने वाले प्रमुख वक्ताओं में जापान, थाईलैंड, कोरिया और उद्योग विशेषज्ञ, प्रोफेसर और शिक्षाविद शामिल थे। कार्यशाला के दौरान भारत में लॉजिस्टिक्स लागत पर चर्चा की गई। इस चर्चा में अन्य पक्षों के अलावा, इष्टतम परिवहन मोडल मिक्स, पैकेजिंग, वेयरहाउसिंग और स्टोरेज, अन्य प्रशासनिक और अप्रत्यक्ष लागत जैसे पैमानों को रखा गया था। इस बात पर भी जोर दिया गया कि ई-वे बिल और फास्टैग डेटा जैसे प्रौद्योगिकी संचालित द्वितीयक डेटा स्रोतों के माध्यम से अनुमानों की गणना के लिए एक नई सक्षम प्रणाली की पड़ताल जरूरी है।

Related Post

Tags