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हमारा देश अमृत काल से स्वर्णिम काल की ओर बढ़ रहा है। हमारी इस यात्रा में युवाओं को एक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है: अनुराग सिंह ठाकुर

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,12मार्च।भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के सहयोग से पुणे में सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी (एसआईयू) में चौथी वाई-20 परामर्श बैठक आयोजित की गई। केन्द्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर उद्घाटन समारोह के मुख्य अतिथि थे। स्ट्रेटेजिक फोरसाइट ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. संदीप वास्लेकर मुख्य वक्ता थे। इस अवसर पर सिम्बायोसिस के संस्थापक एवं अध्यक्ष तथा एसआईयू के चांसलर प्रोफेसर (डॉ.) एस.बी मजूमदार, एसआईयू के प्रो चांसलर डॉ. विद्या येरवडेकर, युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के निदेशक पंकज सिंह, वाई-20 इंडिया के अध्यक्ष अनमोल सोवित और एसआईयू के वाइस चांसलर रजनी गुप्ते भी उपस्थित थे।

इस अवसर पर बोलते हुए, केन्द्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल तथा सूचना एवं प्रसारण मंत्री अनुराग सिंह ठाकुर ने कहा, “मैं पुणे में आकर बेहद खुश हूं। यह एक ऐसा शहर है, जो अपने समृद्ध विनिर्माण उद्योग के लिए जाना जाता है और दुनिया के कुछ सबसे बड़ी ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनियों का केन्द्र है। महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी और शिक्षा के एक प्रमुख केन्द्र के रूप में पुणे की प्रतिष्ठा के बारे में ज्यादा कुछ कहने की जरूरत नहीं है। 10 से अधिक विश्वविद्यालयों और 100 संस्थानों के साथ, यह शहर पीढ़ियों से ज्ञान एवं संस्कृति का एक प्रकाश स्तंभ रहा है, जो दुनिया भर के छात्रों और विद्वानों को आकर्षित करता है। सिम्बायोसिस जैसे संस्थान दुनिया भर के हजारों छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करते हैं। इस वाई-20 कार्यक्रम को आयोजित करने के लिए इससे बेहतर जगह और कोई नहीं हो सकती थी। ऐसी संस्थाएं परिवर्तन के बीज बोती हैं और उन्हें पोषित करती हैं।”

इस कार्यक्रम में व्यापक भागीदारी पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए, उन्होंने कहा, “इस परामर्श के लिए, मुझे खुशी है कि हमारे पास 44 से अधिक देशों का प्रतिनिधित्व है और इन देशों के 97 छात्र शामिल हुए हैं। हमारे पास 72 छात्र मौजूद हैं, जो महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से ऐसे 36 आयोजनों के विजेता बने हैं।

भारत और विश्व के विकास में युवाओं के योगदान के महत्व पर मंत्री ने कहा, “युवा लोग वर्तमान के समान हितधारक हैं, उनकी भूमिका आज, अभी और यहां है। चारों ओर देखिए, भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने के नाते दुनिया भर में सुर्खियां बटोर रहा है। 2014 में कमजोर पांच अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने के बाद अब हम दुनिया की पहली पांच अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो गए हैं। आठ वर्षों की अवधि में, हम 77000 से अधिक स्टार्टअप और 107 से अधिक यूनिकॉर्न के साथ स्टार्टअप्स में विश्व स्तर पर तीसरे स्थान पर आ गए हैं। चाहे सोशल मीडिया के नेतृत्व वाले सामाजिक कारण हों या अरबों डॉलर के स्टार्टअप, हमारे युवा आगे बढ़कर नेतृत्व कर रहे हैं। हमारे युवाओं की नए मार्ग अपनाने की कहानियां दुनिया भर के लोगों के लिए अपने मनोभाव के अनुरूप कार्य करने और अपने क्षेत्रों में सकारात्मक प्रभाव डालने के लिए प्रेरणा स्रोत का काम करती हैं।

भारत की जी-20 की अध्यक्षता और वाई-20 शिखर सम्मेलन का उल्लेख करते हुए, मंत्री ने कहा, “भारत द्वारा प्रतिष्ठित जी-20 की मेजबानी हमारे लिए एक बड़े सम्मान की बात है। प्रतिष्ठित वाई-20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी करना मेरे और हमारे विभाग के लिए भी सौभाग्य की बात है। यह उन मुद्दों पर दुनिया के युवाओं के सामूहिक प्रयासों को शामिल करने का एक असाधारण अवसर प्रस्तुत करता है, जो उनके लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण हैं। इस शिखर सम्मेलन में भारत की भूमिका केवल संबोधन करने तक ही सीमित नहीं है, इसका उद्देश्य युवाओं के विचार सुनना और सक्रियता से वैश्विक एजेंडे को अंतिम रूप देना भी है। इसके अनुरूप वाई-20 शिखर सम्मेलन 2023 ने पांच प्रमुख विषयों की पहचान की है जो हमारे युवाओं के लिए मार्गदर्शक बिंदु के रूप में काम करेंगे। ये प्राथमिकता वाले क्षेत्र उस तात्कालिकता की ओर इशारा करते हैं, जिसके साथ दुनिया को बदलते समय की वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए सामंजस्य बिठाना है, क्योंकि जीवित रहने और आगे बढ़ने के हमारे प्रयास जारी रहेंगे।

आज की परामर्श बैठक के विषय पर बोलते हुए, उन्होंने कहा, “आज का परामर्श ‘शांति निर्माण और सुलह: युद्ध रहित युग की शुरुआत’ के विषय पर है। इस मुद्दे को हम जिस दृष्टिकोण से देखेंगे, वही यह तय करेगा कि आने वाले दशकों में भारत की प्रतिक्रिया कैसी होगी। चाहे वह दो देशों के बीच चल रहा संघर्ष हो, महामारी का दूरगामी प्रभाव हो, या लगातार चलने वाली आर्थिक एवं राजनीतिक अस्थिरता हो, ये मुद्दे क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा के लिए चिंता पैदा करते हैं और प्रभावी सहयोग एवं समन्वित कार्रवाई की तत्काल जरूरत को रेखांकित करते हैं।”

बहुपक्षवाद के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, “डब्ल्यूटीओ में, हम देखते हैं कि कोई भी व्यापक पैमाने पर बहुपक्षवाद का समर्थन नहीं कर रहा है। हमें वाकई बहुपक्षीय संस्थानों और इन्हें सिर्फ खास देशों के लिए नहीं बल्कि संपूर्ण विश्व के लिए अधिक उपयोगी बनाने के बारे में बात करने की जरूरत है। शांति और सुलह की जरूरत इतनी अधिक स्पष्ट कभी नहीं रही। अब जबकि हम एक ऐसी दुनिया के लिए प्रयास कर रहे हैं जहां युद्ध एक व्यावहारिक विकल्प नहीं रह गया है, भारत एक ऐसी संस्कृति में विश्वास करता रहा है जो संवाद, विकास और कूटनीति को बढ़ावा देती है। यही भारत का संदेश है और वसुधैव कुटुम्बकम में निहित हमारा कूटनीतिक दृष्टिकोण अहिंसा से परिभाषित है।”

शांति निर्माण में भारत की भूमिका के बारे में उन्होंने कहा, “भारत ने वैश्विक मंच पर शांति और सुलह को बढ़ावा देने में सक्रिय भूमिका निभाई है। हम निरस्त्रीकरण, परमाणु अप्रसार के प्रबल पक्षधर रहे हैं और हमने संयुक्त राष्ट्र की शांति स्थापना के प्रयासों में योगदान दिया है।”

युद्ध के नए उभरते आयामों पर विचार करते हुए उन्होंने कहा, “21वीं सदी में शांति को परिभाषित करने वाले सवालों पर विचार करना महत्वपूर्ण होगा। हमें शांति और युद्ध की पारंपरिक धारणाओं से अलग हटना होगा।” केन्द्रीय मंत्री ने पूछा, “क्या सीमा संबंधी युद्ध का न होना ही शांति के युग का सही अर्थ है, या इसके पीछे और भी कुछ है? हम सोशल मीडिया पर होने वाले उस वाकयुद्ध, अव्यवस्था एवं शोर से कैसे निपटेंगे, जो हमारे सोशल मीडिया के स्पेस को बाधित कर रहा है? क्या इस प्लेटफॉर्म की प्रकृति ही ऐसी है कि यह पोस्ट किए जाने के बाद इसी किस्म ही सामग्री को पोषित करता है? आप जीवनशैली से जुड़े विकल्पों के सामने आने वाली उन चुनौतियों का सामना कैसे करेंगे जिन्होंने आपके स्वास्थ्य के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया है? आप एक ऐसे युग में अपनी शांति, जगह और खुशी की भावना को फिर से कैसे हासिल करेंगे जहां हम लगातार प्रौद्योगिकी से जुड़ते और बाधित होते रहते हैं? हम वैश्विक आपात स्थितियों का जवाब कैसे देंगे? क्या हम युद्धस्तर पर जलवायु परिवर्तन के नतीजों और भोजन की कमी से निपट लेंगे? आज जब हम फिर से चंद्रमा को देखते हैं और एक दिन मंगल को देखेंगे, एक सभ्यता के रूप में हम पृथ्वी पर अपनी सीमाओं से परे होने वाले अन्याय का जवाब कैसे देंगे? क्या हम शांति की तलाश में दूसरी तरफ देखेंगे या उन मूल्यों को बढ़ावा देंगे जिनमें हम विश्वास करते हैं? क्या शांति सिर्फ एक प्रतीकमात्र है? क्या यह हिंसा की अनुपस्थिति है? और वह कौन सी बात है जो एक समाज, समुदाय और राष्ट्र को शांतिपूर्ण बनाती है।”

अंत में, केन्द्रीय मंत्री ने कहा, “यहां उपस्थित युवा प्रतिभाओं की सक्रिय भागीदारी हमें एक समाज और मानवता के रूप में हमारे सामने आने वाली चुनौतियों की गहरी समझ विकसित करने और वाई-20 चर्चा के मंच पर उन्हें हल करने के उपायों की ओर ले जाएगी। स्वामी विवेकानंद के सपनों के अनुरूप हमें यह सुनिश्चित करना है कि 21वीं सदी हमारी हो। हम अमृत काल से स्वर्णिम काल की ओर जा रहे हैं। हमारी इस यात्रा में युवाओं को एक महत्वपूर्ण भूमिका निभानी है।”

अपने मुख्य भाषण में श्रोताओं को संबोधित करते हुए, स्ट्रेटेजिक फोरसाइट ग्रुप के अध्यक्ष डॉ. संदीप वास्लेकर ने कहा, “युवा भविष्य का निर्माण करेंगे। हमारे समाज और पृथ्वी का भविष्य कैसा होगा यह इस बात से तय होगा कि युवा क्या सोचते हैं। आज युद्ध रहित दुनिया एक आदर्शवादी सपना नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक वास्तविकता है। सभ्यता को विकसित होने में बारह हजार वर्ष लगे हैं। यह सब एक वैश्विक युद्ध से गायब हो सकता है। शांतिपूर्ण दुनिया सुनिश्चित करने की महती जिम्मेदारी युवाओं पर है। सिर्फ वसुधैव कुटुम्बकम का दर्शन ही यह सुनिश्चित कर सकता है।”

सिम्बायोसिस के संस्थापक और अध्यक्ष तथा एसआईयू के चांसलर प्रोफेसर (डॉ.) एसबी मजूमदार ने एक वैश्विक परिवार के विकसित होने के प्रति अपनी आशा व्यक्त करते हुए कहा, “सिम्बायोसिस की शुरुआत विदेशी और भारतीय छात्रों को एक साथ लाने के उद्देश्य से की गयी थी। शिक्षा, ऐसा करने का एकमात्र साधन है। यह भारतीय और विदेशी छात्रों के बीच अंतर्राष्ट्रीय समझ को बढ़ावा देगा। एक दिन आएगा, जब विभिन्न राष्ट्र एक साथ आएंगे, एक साथ रहेंगे और एक-दूसरे को समझेंगे। कोई युद्ध नहीं होगा। मेरा मानना है कि वसुधैव कुटुम्बकम, मानव जाति की अंतिम नियति है। सिम्बायोसिस में हम शिक्षा के माध्यम से इसे वास्तविकता में बदलने की कोशिश करते हैं।”

परामर्श बैठक के दौरान और अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की भावना का उत्सव मनाने के प्रयास के तहत, 18-35 आयु वर्ग की पच्चीस महिलाओं को भागीदारी का प्रमाण पत्र प्रदान किया गया, जिन्होंने 9 और 10 मार्च को सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया एंड कम्युनिकेशन की मोबाइल फिल्म निर्माण कार्यशाला में भाग लिया था। इस कार्यशाला का आयोजन सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ मास कम्युनिकेशन, प्रेस सूचना ब्यूरो, मुंबई और राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम, सूचना और प्रसारण मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से किया गया था। युवा महिला प्रतिभागी, पुणे के आस-पास के ग्रामीण क्षेत्रों से हैं, जिन्हें सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी ने अपने आउटरीच कार्यक्रम के तहत शामिल किया है।

वाई-20 युवाओं को, भविष्य के नेताओं के रूप में वैश्विक मुद्दों के बारे में जागरूकता बढ़ाने, विचारों का आदान-प्रदान करने, बहस करने, बातचीत करने और आम सहमति तक पहुंचने के लिए प्रोत्साहित करता है। जी-20 की अध्यक्षता पर युवा शिखर सम्मेलन की मेजबानी की जिम्मेदारी होती है, जो आमतौर पर पारंपरिक मंच से कुछ सप्ताह पहले होती है, यह जानने के लिए कि युवा क्या सोच रहे हैं। युवा शिखर सम्मेलन इनके सुझावों को अपने स्वयं के नीति प्रस्तावों में शामिल करता है। यह जी-20 सरकारों और उनके स्थानीय युवाओं के बीच आपसी संपर्क बनाने का प्रयास है। 2023 में वाई-20 भारत शिखर सम्मेलन, भारत के युवा-केंद्रित प्रयासों को सामने रखेगा और देश को दुनिया भर के युवाओं के समक्ष अपने मूल्यों और नीतिगत उपायों को प्रदर्शित करने का अवसर प्रदान करेगा। भारत की अध्यक्षता के दौरान वाई-20 के बारे में अधिक जानकारी यहां प्राप्त करें।

जी-20 या 20 का समूह, एक अंतर-सरकारी मंच है, जिसमें 19 देश और यूरोपीय संघ शामिल हैं। यह वैश्विक अर्थव्यवस्था से संबंधित प्रमुख मुद्दों, जैसे अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय स्थिरता, जलवायु परिवर्तन शमन, और सतत विकास आदि के समाधान के लिए काम करता है। आप यहां क्लिक करके जी-20 के बारे और अधिक जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।

भारत ने इस वर्ष 1 दिसंबर को इंडोनेशिया से जी-20 की अध्यक्षता ग्रहण की है। भारत 2023 में देश में पहली बार जी-20 नेताओं का शिखर सम्मेलन आयोजित करेगा। लोकतंत्र और बहुपक्षवाद के लिए प्रतिबद्ध राष्ट्र, भारत के लिए जी-20 अध्यक्षता, देश के इतिहास के लिए एक ऐतिहासिक क्षण होगा। भारत सभी के कल्याण के लिए व्यावहारिक वैश्विक समाधान ढूंढकर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाना चाहता है, और ऐसा करने के क्रम में, ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ या ‘विश्व एक परिवार है’ की सच्ची भावना को प्रकट करता है।

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