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मल्लिकार्जुन खड़गे vs शशि थरूर:कौन होगा कांग्रेस का अध्यक्ष? समर्थकों का इंतजार आज होगा खत्म

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली,19 अक्टूबर।आखिरकार कौन बनेगा कांग्रेस पार्टी का अध्यक्ष, बेताब कांग्रेस वर्करों और समर्थकों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। आज होगी वोटों की गिनती होगी। मतगणना शुरू होने से पहले मतपत्रों को मिलाया जाएगा ताकि किसी को पता न चले कि किसी उम्मीदवार को किसी राज्य विशेष से कितने वोट मिले हैं।

कांग्रेस मुख्यालय पर 87 डेलिगेट्स ने मतदान डाला था। वोटिंग के बाद सोनिया गांधी ने कहा कि नए अध्यक्ष का इंतजार लंबे वक्त से था। वोटिंग खत्म होने के बाद चुनाव प्रभारी मधुसूदन मिस्त्री ने बताया कि 9900 में से 9500 डेलिगेट्स ने वोट डाले। यानी कुल पोलिंग 96% रही।

आखिरी बार 1998 में वोटिंग से हुआ था चुनाव
कांग्रेस में अध्यक्ष पद के लिए आखिरी बार साल 1998 में वोटिंग हुई थी। तब सोनिया गांधी के सामने जितेंद्र प्रसाद थे। सोनिया गांधी को करीब 7,448 वोट मिले, लेकिन जितेंद्र प्रसाद 94 वोटों पर ही सिमट गए। सोनिया गांधी के अध्यक्ष बनने पर गांधी परिवार को कभी कोई चुनौती नहीं मिली।

खड़गे-थरूर के बीच सीधा मुकाबला
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए 24 साल बाद आज वोटिंग हुई। इस पद के लिए मल्लिकार्जुन खड़गे और शशि थरूर के बीच सीधा मुकाबला रहा। देशभर में प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) ऑफिस में 9900 में से 9500 डेलिगेट्स ने वोट डाले थे।

बता दें कि मल्लिकार्जुन अपने राज्य कर्नाटका में कभी न हारने वाले नेता के रूप में जाने जाते हैं। यदि खडग़े चुनाव जीतते हैं, तो वह अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) के अध्यक्ष बनने वाले एस निजालिंगप्पा के बाद कर्नाटक के दूसरे नेता होंगे। जीतने पर वह जगजीवन राम के बाद इस पद पर आसीन होने वाले दूसरे दलित नेता भी होंगे। लगातार 9 बार विधायक चुने गये खडग़े 50 साल से अधिक समय से राजनीति में सक्रिय हैं। 80 वर्षीय खडग़े के सियासी सफर का ग्राफ उत्तरोत्तर चढ़ाव दिखाता है। उन्होंने अपना सियासी सफर गृह जिले गुलबर्ग (कलबुर्गी) में एक यूनियन नेता के रूप में किया। वर्ष 1969 में वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल हुए और गुलबर्ग शहरी कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने। चुनावी मैदान में खडग़े अजेय रहे और वर्ष 2014 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने कर्नाटक (खासकर हैदराबाद-कर्नाटक क्षेत्र)को अपने चपेट में लेने वाली नरेंद्र मोदी लहर के बावजूद गुलबर्ग से 74 हजार मतों के अंतर से जीत हासिल की। उन्होंने वर्ष 2009 में लोकसभा चुनाव के मैदान में कूदने से पहले गुरुमितकल विधानसभा चुनाव से 9 बार जीत दर्ज की। वह गुलबर्ग से दो बार लोकसभा सदस्य रहे। लोकसभा में वर्ष 2014 से 2019 तक खडग़े कांग्रेस पार्टी के नेता रहे, हालांकि वह लोकसभा में प्रतिपक्ष के नेता नहीं बन सके क्योंकि कांग्रेस सांसदों की संख्या सदन की कुल संख्या की 10 प्रतिशत से कम थी।

मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार में खडग़े ने केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के रूप में श्रम एवं रोजगार, रेलवे और सामाजिक न्याय एवं सशक्तिकरण विभाग संभाला। जून, 2020 में उन्हें कर्नाटक से राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित किया गया और वह फिलहाल उच्च सदन में विपक्ष के 17वें नेता हैं, उन्होंने पिछले साल फरवरी में गुलाम नबी आजाद की जगह ली। कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव के लिये कांग्रेस के भीतर जो भी हो रहा है वह एक औपचारिकता मात्र ही है फिर भी यह एक अच्छा कदम है क्योंकि यह लोकतांत्रिक कदम ही है।

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