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मोदी सरकार के पिछले 7-8 वर्षों में देश में कार्य संस्कृति में भारी बदलाव आया है- केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 15मई। केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) एवं पीएमओ, कार्मिक और लोक शिकायत एवं पेंशन राज्यमंत्री मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज जम्मू के कठुआ में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत रिकॉर्ड 68 सड़कों के निर्माण कार्य पूरे होने की समीक्षा की और संयुक्त अरब अमीरात के राष्ट्रपति शेख खलीफा बिन जायद अल-नाहयान के निधन के सम्मान में आज मनाए गए राजकीय शोक के कारण औपचारिक उद्घाटन को टाल दिया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि 547 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से निर्मित 526 किलोमीटर तक की हर मौसम उपयुक्त सड़कों से एक लाख 20,000 से अधिक लोगों को लाभ हो सकता है, जिनमें से अधिकांश दूर-दराज के पहाड़ी इलाकों में रहते हैं। उन्होंने कहा कि कोविड-19 महामारी से उत्पन्न गंभीर चुनौतियों के बावजूद कुछ को छोड़कर सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि महामारी से उत्पन्न चुनौतियों के बावजूद देश में विकास की रफ्तार से, विशेष रूप से केंद्र शासित प्रदेश जम्मू और कश्मीर में, समझौता में नहीं किया गया है।

उन्होंने कहा कि सड़कें एक विकासशील राष्ट्र की जीवन रेखा होती हैं जिनसे शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि उत्पादों के विपणन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में लाभ मिलता है और साथ ही इससे समाज को अनेक फायदे मिलते हैं।

मंत्री ने 29.50 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित 22 पुलों के पूरा होने के कार्य की भी समीक्षा की जिनका जल्द ही लोकार्पण किया जाएगा।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि मोदी सरकार के पिछले 7-8 वर्षों में देश में कार्य संस्कृति में भारी बदलाव आया है और परियोजनाओं को अब किसी अन्य बातों के बजाय आवश्यकता-आधारित जरूरतों को देखते हुए मंजूरी दी जा रही है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नई सड़क परियोजनाओं की स्वीकृति में स्थानीय सांसदों या विधायकों द्वारा किए गए अनुरोध के बजाय सरपंचों और अन्य स्थानीय निर्वाचित प्रतिनिधियों के विचारों को प्राथमिकता दी जाती है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि उनके संसदीय क्षेत्र उधमपुर-कठुआ-डोडा को 2014 के बाद से जम्मू-कश्मीर में पीएमजीएसवाई अनुदान का सबसे अधिक आवंटन प्राप्त हुआ है। उन्होंने कहा कि नई परियोजनाओं के लिए पीएमजीएसवाई की केंद्रीय निधि के 4,175 करोड़ रुपये में से करीब 3,884 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, जो उधमपुर-कठुआ-डोडा के पहाड़ी और दुर्गम इलाकों की निधि का लगभग दो-तिहाई है।

समीक्षा बैठक में डॉ. जितेंद्र ने केंद्रशासित प्रदेश में सड़क संपर्क को मजबूत करने की दिशा में सरकार की पहल पर प्रकाश डाला और कहा कि वर्तमान सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता है कि जम्मू और कश्मीर के हर हिस्से को तेजी से विकास के लिए एक टिकाऊ सड़क नेटवर्क मिले। उन्होंने कहा कि सरकार पीएमएवाई, पीएमजीएसवाई और मनरेगा जैसी योजनाओं का लाभ दूरस्थ पंचायतों और ब्लॉकों और जम्मू-कश्मीर के अन्य कठिन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने विभिन्न विभागों के अधिकारियों से पीआरआई सदस्यों के साथ समन्वय में काम करने और बेहतर समन्वय व तालमेल के लिए एसओपी बनाने का आग्रह किया ताकि समावेशी विकास के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।

डीडीसी अध्यक्ष, उधमपुर श्री लाल चंद, डीडीसी अध्यक्ष, डोडा श्री. धनतेर सिंह, डीडीसी अध्यक्ष, किश्तवाड़ पूजा ठाकुर, डीडीसी अध्यक्ष, रामबन डॉ. शमशाद शान, डीडीसी अध्यक्ष सांबा, श्री. केशव शर्मा, डीडीसी अध्यक्ष रजौरी एडवोकेट नसीम लियाकत और डीडीसी अध्यक्ष, रियासी श्री सराफ सिंह नाग भी बैठक में शामिल हुए।

बैठक में कठुआ के डीसी श्री राहुल पांडे, उधमपुर की डीसी कृतिका ज्योत्सना, सांबा की डीसी अनुराधा गुप्ता, रामबन के डीसी श्री मुसरत इस्लाम, किश्तवाड़ के डीसी श्री अशोक कुमार शर्मा, डोडा के डीसी श्री विकास शर्मा और रियासी डीसी बबीला रखवाल ने भी हिस्सा लिया।

गौरतलब है कि सितंबर, 2020 में डॉ. जितेंद्र सिंह ने जम्मू क्षेत्र के कठुआ, डोडा, उधमपुर और रियासी जिलों में 23 सड़कों और पुलों की परियोजनाओं का अनावरण किया था। लगभग 73 करोड़ रुपये की लागत और 111 किलोमीटर की लंबाई वाली परियोजनाओं से इस क्षेत्र के 35,000 से अधिक लोगों को लाभ मिला। 23 परियोजनाओं में पीएमजीएसवाई के तहत संपर्क के लिए हर मौसम में उपयुक्त 15 सड़कें और लोगों को बेहतर संपर्क के लिए 8 पुल शामिल हैं।

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