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 भारत में काजू का रकबा दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा – नरेंद्र सिंह तोमर

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 31मार्च। भारतीय काजू अनुसंधान संस्थान, पुत्तूर (कर्नाटक) के रजत जयंती भवन का शुभारंभ आज केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री नरेंद्र सिंह तोमर ने, देश की आजादी के अमृत महोत्सव के अंतर्गत किया। इस अवसर पर श्री तोमर ने कहा कि देश में काजू लगभग सवा 11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में उगाया जाता है, जिसका वार्षिक उत्पादन साढ़े 7 लाख टन है। देश में काजू का रकबा दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा है। भारत दुनिया में कच्चे काजू उत्पादन में दूसरा सबसे बड़ा देश है। श्री तोमर ने कहा कि भारत में काजू की खपत देश में दिनों-दिन बढ़ रही है तो उत्पादन और खपत के बीच की गैप भरना लक्ष्य होना चाहिए। काजू का आयात घटाकर निर्यातक बनने पर योजनाबद्ध काम किया जाना चाहिए।

मुख्य अतिथि श्री तोमर ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आत्मनिर्भर भारत व न्यू इंडिया की बात कही है। नए व पुराने भारत में यहीं अंतर है कि पहले बहुत-से क्षेत्रों में हमारी निर्भरता दुनिया पर थी लेकिन न्यू इंडिया में हम हर मामले में आत्मनिर्भर हो, इसी लक्ष्य को लेकर हम सब लोगों को मिलकर काम करने की जरूरत है। कृषि के क्षेत्र में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) तथा उसके सभी संगठन महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन कर रहे हैं। हमारे कृषि वैज्ञानिक फसलों की उत्पादकता और गुणवत्ता बढ़ाने में लगे हुए हैं, जिसका सद्परिणाम भी देश के सामने निरंतर आता रहता है।

श्री तोमर ने कहा कि काजू की खेती के तहत अधिक क्षेत्र लाकर उत्पादन बढ़ाना व उत्पादकता में वृद्धि करना आवश्यक है। क्षेत्र विस्तार के लिए सभी संभावित उपयुक्त क्षेत्र का पता लगाया जाना चाहिए। श्री तोमर ने प्रसन्नता जताते हुए कहा कि भारतीय काजू अनुसंधान संस्थान ने काजू की 26 किस्में जारी की हैं तथा कृषकों के ज्ञान, प्रौद्योगिकियों के तेजी से प्रसार हेतु ऑनलाइन सॉफ्टवेयर व मोबाइल एप “काजू इंडिया” विकसित किया गया है। काजू प्रसंस्करण क्षेत्र कृषि में ज्यादा रोजगार पैदा करता है, जिनमें 95 प्र.श. से अधिक महिलाएं हैं, वहीं काजू प्रसंस्करण कारखाने 15 लाख लोगों को रोजगार प्रदान करते हैं।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि संस्थान का नया रजत जयंती भवन नए आयाम के रूप में जुड़ा है। इसके माध्यम से काजू की खेती व शोध को आगे बढ़ाने में सहूलियत होगी और इसका फायदा हमारे किसानों को मिलेगा। आईसीआर ने टेक्नालाजी को बढ़ावा देते हुए अपने कामकाज से किसानों को जोड़ा है, जिसका फायदा किसानों को मिल रहा है, आगे भी ज्यादा से ज्यादा लाभ मिलेगा। श्री तोमर ने भारतीय काजू अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिकों से किसानों की हर बातों का शीघ्रता से समाधान करने को कहा। उन्होंने कहा कि भारत सरकार कृषि क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है, इस दृष्टि से अपनी योजनाओं के माध्यम से किसानों को आय सहायता देने से लेकर फसल बीमा सुविधा, अधोसंरचना के लिए एक लाख करोड़ रुपये का फंड, किसानों के दस हजार नए एफपीओ बनाने, हर किसान को किसान क्रेडिट कार्ड उपलब्ध कराने जैसे काम करते हुए किसानों के साथ कंधे से कंधा व कदम से कदम मिलाकर काम कर रही है।

विशेष अतिथि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री कैलाश चौधरी ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की सोच के अनुरूप काजू का उत्पादन व क्षेत्रफल बढ़ाने पर भी काम होना चाहिए। केंद्र सरकार की थीम लैब टू लैंड के तहत काजू उत्पादक किसानों को भी लाभ मिलना चाहिए। काजू की नई किस्मों को ज्यादा से ज्यादा किसानों तक पहुंचाया जाना चाहिए।

विशिष्ट अतिथि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि काजू उत्पादक किसानों की समस्याओं को समझते हुए उन्हें लाभ पहुंचाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि काजू की खेती के क्षेत्र में वृहद अनुसंधान करके, अधिक फल देने वाले पौधे विकसित करने की जरूरत है, साथ ही अधिकाधिक किसानों को काजू उत्पादन से जोड़ने की दिशा में काम करना चाहिए।

अध्यक्षीय उद्बोधन में डेयर के सचिव व आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. त्रिलोचन महापात्र ने काजू का आयात घटाने के लिए इस फसल को बढ़ावा देते हुए नए क्षेत्रों में प्रसार पर जोर दिया। आईसीएआर के उप महानिदेशक (बागवानी) डॉ. आनंद कुमार सिंह ने स्वागत उद्बोधन दिया। संचालन एडीजी श्री विक्रमादित्य पांडे व आभार प्रदर्शन काजू अनुसंधान संस्थान के कार्यकारी निदेशक डॉ. टी.एन. रविप्रसाद ने किया। कार्यक्रम में मैंगलोर के सांसद श्री नलिन कुमार कटिल, क्षेत्रीय विधायक श्री संजीव मतन्दूर, डेयर के अतिरिक्त सचिव व आईसीएआर के सचिव श्री संजय गर्ग, उप महानिदेशक (प्रसार) डा. ए.के. सिंह, सहायक महानिदेशक डा. ब्रजेश कुमार पांडे, आईसीएआर के अन्य अधिकारी, वैज्ञानिक व किसान मौजूद थे।

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