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Union Home and Cooperation Minister Shri Amit Shah addressed the 75th Foundation Year celebrations of Amul at Anand, Gujarat on 31st October.

अमूल के 75वें स्थापना वर्ष समारोह में बोले गृहमंत्री, आंदोलन समस्या का समाधान करने के लिए होते हैं, इसे बढ़ाने के लिए नहीं होते

समग्र समाचार सेवा
अहमदाबाद, 1 नवंबर। केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने 31 अक्टूबर को गुजरात के आणंद में अमूल के 75वें स्थापना वर्ष समारोह को संबोधित किया। इस अवसर पर केन्द्रीय मंत्री श्री पुरुषोत्तम रूपाला, श्री बी एल वर्मा और श्री देव सिंह चौहान, गुजरात के मुख्यमंत्री श्री भूपेन्द्र पटेल और अमूल के अध्यक्ष श्री राम सिंह परमार सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आज सरदार साहब की जन्मजयंती है और आज अमूल का भी अमृत महोत्सव का कार्यक्रम है। सरदार पटेल का अमूल से गहरा रिश्ता है। निजी डेयरी के अन्याय के ख़िलाफ़ किसानों के संघर्ष को सरदार पटेल की प्रेरणा और कर्मठ सहकारी नेता त्रिभुवन दास पटेल ने अच्छे तरीक़े से इसे सकारात्मक सोच की ओर मोड़ने का काम किया। ये ना केवल सहकारिता के लिए एक अनूठा उदाहरण है बल्कि सामाजिक जीवन में लोगों के प्रश्नों को आवाज़ देने के लिए आंदोलन करने वाले समाजसेवियों के लिए भी बहुत बड़ा उदाहरण है। आंदोलन समस्या का समाधान करने के लिए होते हैं, इसे बढ़ाने के लिए नहीं होते। खेड़ा ज़िले में किसानों का शोषण होता था उसके ख़िलाफ़ आंदोलन किया, असहकार का आंदोलन किया और इसे ऐसे आंदोलन में परिवर्तित किया जिसमें जो बीज बोया गया था वो आज वट वृक्ष बनकर 36 लाख परिवारों के रोज़ग़ार का ज़रिया बना है। आंदोलन से शोषण तो रूका ही परंतु एक रचनात्मक अभिगम लेकर आंदोलन को मोड़ने की क्षमता जो सरदार साहब और विशेषकर त्रिभुवन दास पटेल में थी, इसके कारण ये वट वृक्ष आज हमारे सामने खड़ा है।

श्री अमित शाह ने कहा कि स्वर्गीय त्रिभुवन दास जी से, सरदार साहब की प्रेरणा से लेकर आज छोटे से छोटे गांव में अमूल के लिए दूध उत्पादन करने वाली ग़रीब से ग़रीब महिला तक सबने पुरूषार्थ की पराकाष्ठा की है और 75 साल में पूरे विश्व में अमूल के ब्रांड को बनाया है। ये एक ऐसा उदाहरण है कि कई लोग एक साथ जब अपनी क्षमता का योग बनाते हैं तो कितनी बड़ी ताकत बन सकती है और यही सहकारिता का मूल मंत्र है। हम छोटे हो सकते हैं, लेकिन संख्या में बहुत अधिक हैं। अगर छोटे लोगों की बड़ी संख्या एकजुट हो जाए और एक दिशा में चल पड़े, तो बड़ी से बड़ी ताक़त बन सकती है और उसी को सहकारिता कहते हैं। उन्होंने कहा कि आज अमूल के आंदोलन ने ये करके दिखाया है। जब इसकी कल्पना की गई तब 200 लीटर के आस-पास दूध एकत्रित होता था और आज अमूल का वार्षिक टर्नओवर 2020-21 में 53 हज़ार करोड़ को पार कर चुका है। हर रोज़ 30 मिलियन लीटर दूध की प्रोसेसिंग और भंडारण करने की क्षमता अमूल ने विकसित की है। 36 लाख किसान परिवार इसे अपना व्यवसाय बनाकर इसके साथ जुड़े हुए हैं और सम्मान के साथ अपना जीवनयापन कर रहे हैं। 18600 से ज़्यादा गांव की छोटी छोटी दुग्ध उत्पादक कॉपरेटिव्स आज इसके साथ जुड़ी हैं और अमूल को एक वट वृक्ष बनाने में अपना योगदान दे रही हैं। 18 ज़िलास्तरीय डेयरी हैं और पूरे देश में 87 स्थानों पर दुग्ध प्रसंस्करण प्लांट लगाए हैं। 200 लीटर दुग्ध एकत्रित करने से लेकर 30 मिलियन लीटर दुग्ध एकत्रित करने तक की यात्रा बड़ी यात्रा होती है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आज यहां कई योजनाओं की शुरूआत हुई है जिनमें सरदार पटेल सभागार का उद्घाटन, अमूल के सभी दुग्ध उत्पादकों की स्मृति में भारत सरकार ने डाक टिकट जारी किया, कोरोना के सौ करोड़ टीके के लिए भी एक विशेष कवर का उद्घाटन हुआ और 5000 करोड़ रूपए एनसीडीसी, भारत सरकार के माध्यम से डेयरी क्षेत्र को देने वाली योजना का भी शुभारंभ हुआ।

श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने सहकारिता मंत्रालय की स्थापना की है और सहकारिता आंदोलन को समय पर नई दृष्टि के साथ आगे बढ़ाने का निर्णय किया है। कोई भी क़ानून या आंदोलन हो, अगर 75 साल तक उसके काम की समीक्षा नहीं होती है, ज़रूरी बदलाव, सुधार और व्यव्थाएं जोड़ी नहीं जाती हैं, तो वो कालबाह्य हो जाता है। सहकारिता आंदोलन में भी ढेर सारे परिवर्तन करने की ज़रूरत थी और मोदी जी ने इसे समय रहते देखा। श्री शाह ने कहा कि अभी भी हमारा सहकारिता आंदोलन देश में कई सफल प्रकल्पों के साथ चल रहा है और उसी वक़्त मोदी जी ने नया सहकारिता मंत्रालय बनाने का निर्णय किया और मेरे लिए सौभाग्य और आनंद का विषय है कि उन्होंने इसकी ज़िम्मेदारी मुझे दी। सहकारिता मंत्रालय सहकार से समृद्धि के सूत्र वाक्य के साथ बनाया गया है और इसके चार्टर का ध्येय वाक्य भी सहकार से समृद्धि होगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था में सहकारिता बहुत बड़ा योगदान दे सकती है और आत्मनिर्भर भारत के स्वप्न को सिद्ध करने के लिए सहकारिता से बड़ा कोई मार्ग नहीं हो सकता।
श्री अमित शाह ने कहा कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने में भी अमूल ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। प्राकृतिक आपदाओं और न्यूट्रिशन प्रोग्राम को बढ़ावा देने में भी अमूल ने बहुत सहयोग दिया है। श्री शाह ने कहा कि आज सरदार पटेल की जयंती है और आज सहकारिता आंदोलन से जुड़े प्रत्येक व्यक्ति के लिए संकल्प लेने का दिन है कि हम सहकारिता आंदोलन को फिर से एक जज्बे के साथ भारत की आर्थिक व्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बनाएँ। श्री शाह ने कहा कि मुझे पूरा विश्वास है कि एक बार फिर से नए और आधुनिक बीज डाले जाएंगे और जो फसल होगी वह एक बार फिर हरियाली और श्वेत क्रांति लाएगी।

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