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प्रधान मंत्री मोदी ने सावित्रीबाई फुले और रानी वेलु नचियार को जयंती पर किया नमन

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली | 03 जनवरी: एक्स पर साझा संदेश में प्रधानमंत्री ने कहा कि सावित्रीबाई फुले का जीवन सेवा और शिक्षा के ज़रिये समाज को बदलने के लिए समर्पित रहा। समानता, न्याय और करुणा उनके विचारों के केंद्र में थे। पीएम मोदी ने कहा कि सावित्रीबाई फुले मानती थीं कि शिक्षा सामाजिक परिवर्तन का सबसे सशक्त माध्यम है और उन्होंने ज्ञान के प्रसार से जीवन बदलने पर विशेष ज़ोर दिया।

महिला शिक्षा और अधिकारों के लिए ऐतिहासिक योगदान

सावित्रीबाई फुले महाराष्ट्र की प्रख्यात समाज सुधारक, शिक्षाविद् और कवयित्री थीं। उन्हें भारत की पहली महिला शिक्षिका माना जाता है। अपने पति ज्योतिराव फुले के साथ उन्होंने महिलाओं और वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।

वर्ष 1848 में पुणे के भिडे वाड़ा में उन्होंने देश का पहला बालिका विद्यालय स्थापित किया। जाति और लिंग आधारित भेदभाव के खिलाफ उनका सतत संघर्ष उन्हें सामाजिक सुधार आंदोलन की प्रमुख हस्ती बनाता है। वे एक परोपकारी व्यक्तित्व होने के साथ-साथ मराठी साहित्य की महत्वपूर्ण लेखिका भी थीं।

औपनिवेशिक उत्पीड़न के विरुद्ध साहस की मिसाल: रानी वेलु नचियार

रानी वेलु नचियार को नमन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि औपनिवेशिक शासन के खिलाफ खड़े होकर उन्होंने यह सिद्ध किया कि भारत पर शासन करने का अधिकार केवल भारतीयों का है। साहस, रणनीतिक कौशल, सुशासन और सांस्कृतिक गौरव के प्रति उनकी प्रतिबद्धता आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

अंग्रेजों को चुनौती देने वाली पहली महिला शासक

रानी वेलु नचियार शाही परिवार की पहली महिला थीं जिन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य को खुली चुनौती दी। पति और उनकी दूसरी पत्नी की हत्या के बाद उन्होंने हथियार उठाए और अपनी बेटी के साथ विरुपाची (डिंडीगुल के पास) में शरण ली।

वहां उन्होंने सेना संगठित की और गोपाल नायकर तथा हैदर अली के साथ गठबंधन किया। वर्ष 1780 में रानी वेलु नचियार ने अंग्रेजों के खिलाफ निर्णायक लड़ाई लड़ी और विजय हासिल की, जो भारतीय इतिहास में महिला नेतृत्व के साहसिक अध्याय के रूप में दर्ज है।

प्रधानमंत्री के संदेश में दोनों महान महिलाओं के जीवन और संघर्ष को याद करते हुए यह स्पष्ट किया गया कि शिक्षा, समानता और स्वाभिमान के उनके आदर्श आज भी भारत को मार्गदर्शन देते हैं।

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