
‘काम के नेता’: राजद का नया चुनावी एंथम, तेजस्वी यादव की छवि को साधने की कोशिश
समग्र समाचार सेवा
पटना, 24 सितंबर: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए चुनावी माहौल गरमाने लगा है। नवंबर में होने वाले मतदान से पहले राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने बुधवार को अपना नया और आकर्षक चुनावी एंथम ‘काम के नेता बा भैया काम के नेता’ जारी किया। यह गाना सीधे तौर पर जनता, खासकर गरीब और वंचित तबके को साधने की कोशिश करता है।
गरीबों और आम जनता पर फोकस
वीडियो सॉन्ग की शुरुआत एक पोस्टर से होती है, जिस पर लिखा है—“तेजस्वी बिहार की प्रगति की छवि।” गाने के बोल ‘काम के नेता’ पार्टी को जनता के करीब लाने और यह संदेश देने की कोशिश करते हैं कि राजद सत्ता में आने पर जमीनी स्तर पर काम करेगी। गाने में गरीबों और जरूरतमंदों के लिए योजनाएं लाने का वादा किया गया है।
‘जुबान के पक्के’ का संदेश
एंथम में ‘जुबान के पक्के’ जैसी लाइनों के जरिए पार्टी अपनी विश्वसनीयता जताने का प्रयास कर रही है। तेजस्वी यादव को गाने में ‘जनता के बेटा’ कहकर संबोधित किया गया है। वीडियो में उनकी रैलियों और जनता से जुड़ाव की झलक दिखाई गई है, जिससे उनकी लोकप्रियता को उजागर करने की कोशिश हुई है।
पहले भी लॉन्च हुए थे चुनावी गाने
यह पहली बार नहीं है जब राजद ने संगीत के जरिये जनता को आकर्षित करने की कोशिश की है। हाल के दिनों में पार्टी ने दो और चुनावी गाने जारी किए थे—
- ‘आई-आई-आई RJD… आई’ (16 सितंबर 2025): युवाओं को ध्यान में रखकर लॉन्च किया गया था।
- ‘बिहार यात्रा’ (19 सितंबर 2025): तेजस्वी यादव की राज्यभर की यात्रा और जनसंपर्क अभियान को बढ़ावा देने वाला गाना था।
चुनावी रणनीति में संगीत का महत्व
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में चुनाव प्रचार के लिए गाने और एंथम का बड़ा महत्व है। ऐसे गाने न केवल पार्टी की छवि गढ़ते हैं बल्कि युवाओं और ग्रामीण मतदाताओं तक पहुंचने का भी सशक्त माध्यम बनते हैं।
नतीजा क्या निकलेगा?
राजद का नया एंथम ‘काम के नेता’ चुनावी रणभेरी के बीच जनता को लुभाने का प्रयास है। यह गाना तेजस्वी यादव को एक मेहनती और विश्वसनीय नेता के रूप में पेश करता है, जबकि संदेश यह है कि पार्टी गरीबों और आम जनता के मुद्दों पर फोकस कर रही है। अब देखना होगा कि यह चुनावी धुन जनता के दिलों में कितनी गूंज पाती है।







