समग्र समाचार सेवा
पटना, 23 अगस्त: चुनाव आयोग ने शनिवार को बताया कि बिहार में मतदाता सूची संशोधन प्रक्रिया के दौरान अब तक 99,656 आवेदन प्राप्त हुए हैं। इनमें से अधिकांश आवेदन नाम जोड़ने या हटाने से संबंधित हैं। दिलचस्प बात यह है कि इतने बड़े स्तर पर आवेदन आने के बावजूद अब तक सिर्फ़ नौ आपत्तियाँ दर्ज हुई हैं।
आयोग के अनुसार, अब तक प्राप्त आवेदनों में से 7,367 मामलों का निपटारा निर्वाचन रजिस्ट्रेशन अधिकारियों द्वारा पहले ही किया जा चुका है। आयोग ने कहा कि दावे और आपत्तियों की अवधि 1 अगस्त से शुरू हुई थी और यह 1 सितंबर तक चलेगी।
राजनीतिक दलों की निष्क्रियता
आयोग ने बताया कि अभी तक केवल सीपीआई(एमएल) लिबरेशन ने ड्राफ्ट रजिस्ट्रेशन पर आपत्तियाँ दर्ज कराई हैं, जबकि अन्य दलों ने सक्रियता नहीं दिखाई। आयोग ने राजनीतिक दलों से बार-बार अपील की थी कि वे इस प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल हों, लेकिन अब तक अपेक्षित भागीदारी नहीं दिखी है।
नए मतदाता
विशेष गहन संशोधन (एसआईआर) के तहत 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले 2,83,042 नए मतदाताओं ने पंजीकरण के लिए आवेदन किया है। यह संख्या बताती है कि बिहार में युवा मतदाता लोकतांत्रिक प्रक्रिया में तेजी से जुड़ रहे हैं।
बीएलए की नियुक्ति
आयोग ने बताया कि राज्यभर में करीब 1.6 लाख बूथ स्तर एजेंट (बीएलए) नियुक्त किए गए हैं ताकि वे त्रुटियों की पहचान कर सकें।
- राजद ने 47,506 बीएलए,
- कांग्रेस ने 17,549 बीएलए,
- और वामपंथी दलों ने 2,000 से अधिक प्रतिनिधि नियुक्त किए हैं।
कुल मिलाकर 67,000 से अधिक प्रतिनिधि इस प्रक्रिया में शामिल हुए हैं।
दावे और आपत्तियों की प्रक्रिया
नियमों के अनुसार, किसी भी दावे या आपत्ति का निपटारा केवल 7 दिन की नोटिस अवधि पूरी होने के बाद और ईआरओ/एईआरओ द्वारा पात्रता की जांच के बाद ही किया जा सकता है।
आयोग ने स्पष्ट किया कि ड्राफ्ट रजिस्ट्रेशन से किसी भी नाम को बिना औपचारिक आदेश के हटाया नहीं जा सकता। संबंधित मतदाता को सुनवाई का अवसर देना अनिवार्य है।
पारदर्शिता और तकनीकी सुविधा
ड्राफ्ट सूची से हटाए गए नामों की जानकारी और कारण डीईओ, डीएम और सीईओ की आधिकारिक वेबसाइटों पर उपलब्ध हैं। प्रभावित व्यक्ति अपने आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज़ों के साथ ऑनलाइन या ऑफलाइन फॉर्म 6 (समावेश के लिए) और फॉर्म 7 (विलोपन या आपत्ति के लिए) दाखिल कर सकते हैं।
आयोग का संदेश
आयोग ने दोहराया कि त्रुटिरहित मतदाता सूची लोकतंत्र की बुनियाद है। हर मतदान केंद्र की सूची चुनावी कानूनों के अनुरूप तैयार की जाती है। बिहार में यह प्रक्रिया 24 जून से शुरू हुई थी और 1 अगस्त को ड्राफ्ट सूची प्रकाशित कर सभी 12 मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को उपलब्ध कराई गई थी।
आयोग ने अपील की है कि छूटे हुए पात्र मतदाता 1 सितंबर तक आवेदन दाखिल करें, ताकि वे आगामी चुनावों में वोट डालने से वंचित न रह जाएं।