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दिल्ली विधानसभा सत्र शुरू: पेपरलेस कामकाज, झुग्गी मुद्दे पर हंगामे के आसार

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 04 अगस्त: दिल्ली विधानसभा का मानसून सत्र सोमवार, 4 अगस्त से शुरू हो गया है। यह सत्र कई मायनों में ऐतिहासिक और विवादास्पद दोनों रहने वाला है। एक ओर जहाँ सरकार पूरी तरह से पेपरलेस ई-विधानसभा के रूप में इस सत्र की शुरुआत कर रही है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष खासकर कांग्रेस, झुग्गी तोड़े जाने के मुद्दे पर सरकार को घेरने की तैयारी में है।

पेपरलेस विधानसभा की शुरुआत
इस बार दिल्ली विधानसभा का पूरा कार्य डिजिटल माध्यम से होगा। यह पहली बार है जब पूरी दिल्ली विधानसभा को ई-विधानसभा के रूप में पेश किया गया है। न तो कोई फाइल, न प्रिंटेड दस्तावेज—हर चीज अब टैबलेट और डिजिटल स्क्रीन पर। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बताया कि विधानसभा परिसर में 500 किलोवाट का सोलर पावर प्लांट भी लगाया गया है, जिससे अब यह पूरी तरह से सौर ऊर्जा आधारित हो गया है।

उन्होंने कहा कि यह बदलाव केंद्र सरकार के सहयोग और दिल्ली सरकार की प्रतिबद्धता से संभव हो सका है। यह कदम सुशासन और पारदर्शिता की दिशा में मील का पत्थर माना जा रहा है।

महत्वपूर्ण विधेयक और रिपोर्टें
इस सत्र के दौरान मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए राज्य वित्त की कैग रिपोर्ट पेश करेंगी। इसके अलावा, ‘भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिकों के कल्याण’ संबंधी एक अन्य कैग रिपोर्ट भी प्रस्तुत की जाएगी। साथ ही, निजी स्कूलों की फीस नियंत्रण पर आधारित एक विधेयक भी पारित हो सकता है।

विपक्ष का हमला और कांग्रेस का घेराव
जहाँ सरकार अपनी तकनीकी उपलब्धियों और पिछली योजनाओं का रिपोर्ट कार्ड पेश करेगी, वहीं विपक्षी दल, विशेषकर कांग्रेस, झुग्गियों को तोड़े जाने को लेकर हमलावर रुख अपना रही है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष देवेंद्र यादव ने सोमवार को विधानसभा का घेराव करने की घोषणा की है।

देवेंद्र यादव ने आरोप लगाया कि हाल के महीनों में 15,000 से ज्यादा झुग्गियाँ तोड़ी जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि सरकार “गरीब विरोधी” रवैया अपना रही है और कोई स्पष्ट पुनर्वास योजना नहीं दिखा रही। इसके जवाब में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आश्वासन दिया कि जब तक झुग्गीवासियों को घर नहीं मिलते, तब तक कोई झुग्गी नहीं तोड़ी जाएगी। उन्होंने यह भी ऐलान किया कि जल्द ही 50,000 मकान झुग्गीवासियों को आवंटित किए जाएँगे।

राजनीतिक तापमान में उबाल
झुग्गी मुद्दे पर जहां कांग्रेस मुखर हो रही है, वहीं आम आदमी पार्टी ने इसे राजनीतिक ड्रामा करार दिया है। दूसरी ओर भाजपा ने भी निजी स्कूलों की फीस को लेकर सत्ताधारी पार्टी को घेरने की योजना बनाई है।

आगे क्या होगा?
चार दिवसीय यह मानसून सत्र 8 अगस्त तक चलेगा। इन चार दिनों में सरकार अपनी योजनाओं को जनता तक पहुँचाने की कोशिश करेगी, जबकि विपक्ष जनता के मुद्दों को सत्र की कार्यसूची में प्रमुखता दिलाने की कोशिश करेगा। सत्र में गरमागरमी तय मानी जा रही है।

 

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