समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 15 जुलाई: लोकसभा में इस मानसून सत्र से सांसदों की उपस्थिति दर्ज कराने के लिए नई डिजिटल व्यवस्था लागू होने जा रही है। लेकिन कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने इस नए सिस्टम पर सवाल उठाते हुए पूछा है कि अगर यह पारदर्शिता और जवाबदेही के लिए है तो प्रधानमंत्री और मंत्रियों को इससे छूट क्यों दी गई है?
सीट पर दर्ज होगी उपस्थिति
लोकसभा में अब सांसदों को लॉबी में जाकर अटेंडेंस दर्ज कराने की बजाय अपनी आवंटित सीट से ही उपस्थिति दर्ज कराने की सुविधा दी जा रही है। इस नई व्यवस्था के तहत सांसदों को अब हस्ताक्षर करने की भी जरूरत नहीं होगी। लेकिन मंत्रियों और नेता प्रतिपक्ष को पहले की तरह ही इस प्रक्रिया से छूट दी गई है।
टैगोर ने क्या कहा
कांग्रेस के सचेतक मणिकम टैगोर ने एक्स पर लिखा कि वक्फ विधेयक के दौरान यह सिस्टम पहले ही फेल हो चुका है। उस समय मत विभाजन में तकनीकी खामी आ गई थी। उन्होंने पूछा कि जब सिस्टम पहले विफल हो चुका है तो उसी को दोहराने का क्या मतलब है? टैगोर ने कहा कि अगर यह सिस्टम पारदर्शिता के लिए है तो प्रधानमंत्री को इससे बाहर क्यों रखा गया है?
प्रधानमंत्री को उदाहरण बनना चाहिए
टैगोर ने सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री और मंत्रियों को उपस्थिति दर्ज कराने से छूट देना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री को खुद नेतृत्व कर उदाहरण पेश करना चाहिए ताकि देश को पता चले कि वे कितने दिन संसद में उपस्थित रहते हैं। टैगोर ने कहा कि केवल डिजिटल सिस्टम लगाकर जवाबदेही नहीं बढ़ेगी, इसके लिए सभी सांसदों के लिए अनिवार्य उपस्थिति और बोलने के रिकॉर्ड का स्वत: प्रकाशन जरूरी है।
सिस्टम में सुधार की जरूरत
कांग्रेस सांसद ने जोर दिया कि डिजिटल सिस्टम तभी सफल होंगे जब उनके पीछे सही मंशा और सख्त नियम होंगे। उन्होंने मांग की कि संसद में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए केवल अटेंडेंस ही नहीं बल्कि मतदान और भाषणों का रिकॉर्ड भी सार्वजनिक होना चाहिए।