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सीमापार आतंकवाद पर संसदीय समिति की अहम बैठक, सरकार ने साझा की रणनीति

समग्र समाचार सेवा,

नई दिल्ली, 26 मई: सीमापार आतंकवाद के मुद्दे पर आज संसद की सलाहकार समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें केंद्र सरकार ने पाकिस्तान स्थित आतंकी ठिकानों और उन पर की गई कार्रवाई को लेकर अपनी रणनीति साझा की। सरकार ने समिति को बताया कि आतंकवाद के खिलाफ चलाए जा रहे अभियानों के तहत पाकिस्तान के भीतर मौजूद आतंकी शिविरों को सटीक निशाना बनाकर ध्वस्त किया गया, जिससे वहां की सेना का मनोबल भी प्रभावित हुआ क्योंकि वह इन शिविरों की रक्षा करने में विफल रही।

बैठक में सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि यह अभियान भारत की आतंकरोधी नीति का हिस्सा है, और इसे वैश्विक मंच पर भरपूर समर्थन भी मिला है। सरकार के मुताबिक, पाकिस्तान को तुर्किये, अजरबैजान और चीन को छोड़कर कोई अंतरराष्ट्रीय समर्थन नहीं मिला, जिससे उसकी कूटनीतिक स्थिति कमजोर हुई है।

कांग्रेस ने विदेश मंत्री पर उठाया सवाल, सरकार का जवाब

बैठक में कांग्रेस सांसदों ने यह सवाल उठाया कि क्या विदेश मंत्री ने पाकिस्तान को हमले की पूर्व सूचना दी थी, जैसा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक आरोपों में कहा गया था। इस पर सरकार ने जोर देकर कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच कोई भी आधिकारिक संपर्क डीजीएमओ (Director General of Military Operations) स्तर पर ही हुआ था, और वह भी हमले के बाद

सरकारी सूत्रों के मुताबिक, पहले आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की गई, इसके बाद PIB (प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो) द्वारा प्रेस विज्ञप्ति जारी की गई, और फिर भारत के डीजीएमओ ने पाकिस्तानी समकक्ष से बात की। विदेश मंत्री ने कांग्रेस के आरोपों को “बेईमानी और तथ्यात्मक रूप से गलत” करार देते हुए कहा कि यह राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित हैं।

सिंधु जल समझौते पर भी उठा सवाल

बैठक में एक और बड़ा मुद्दा सिंधु जल समझौते को लेकर उठाया गया। संसदीय समिति ने सरकार से यह पूछा कि क्या सिंधु जल समझौते को स्थगित करने का फैसला प्रतीकात्मक था या यह वास्तविक नीति बदलाव है। इस पर सरकार ने स्पष्ट किया कि फिलहाल सिंधु जल समझौता स्थगित है और भविष्य में जो भी कदम उठाया जाएगा, उसकी जानकारी समय रहते सांसदों को दी जाएगी

आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति पर वैश्विक समर्थन

बैठक में सरकार ने यह भी बताया कि भारत द्वारा की गई आतंकरोधी कार्रवाई को अमेरिका, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया, जापान समेत कई बड़े देशों का सीधा समर्थन प्राप्त हुआ है। इसके चलते भारत की राजनयिक स्थिति मजबूत हुई है, जबकि पाकिस्तान को आतंकवाद का समर्थन करने वाले देश के रूप में देखा जा रहा है।

यह बैठक ऐसे समय में हुई है जब भारत में आगामी महीनों में संसद का मानसून सत्र प्रस्तावित है और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दों पर विपक्ष सरकार से स्पष्ट जवाब मांग रहा है। आज की बैठक से स्पष्ट है कि भारत की नीति अब केवल प्रतिक्रिया देने तक सीमित नहीं है, बल्कि सक्रिय आक्रामक रणनीति का हिस्सा बन चुकी है।

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