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बिहार की बेटी ने लहराया परचम: राष्ट्रीय सम्मान काका साहेब कालेलकर से सम्मानित हुई मशहूर लेखिका और पत्रकार डॉ दर्शनी प्रिय

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 21 जनवरी। काका कालेलकर और विष्णु प्रभाकर की स्मृति में 20 जनवरी 2024 को सन्निधि संगोष्ठी के 100 पूर्ण होने के उपलक्ष्य में शतक संगति का आयोजन गांधी हिंदुस्तानी साहित्य सभा, नई दिल्ली में किया गया.जिसके मुख्य अतिथि के विश्व प्रसिद्ध कवि सुरेंद्र शर्मा रहे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार मुकेश भारद्वाज ने की. विशिष्ठ अतिथि के रूप में डीयू के डॉ.गोपेश्वर सिंह मौजूद रहे.कार्यक्रम का संचालन प्रसून लतांत व अर्चना प्रभाकर ने किया।कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रसिद्ध हास्य कवि सुरेंद्र शर्मा ने कहा कि सन्निधि संगोष्ठी का आयोजन साहित्य की विभिन्न विधाओं से जुड़े विभूतियों को सम्मानित करने के लिए किया जाता रहा है।

आयोजन समिति ने सराहना करते हुए कहा कि इन कार्यक्रमों के जरिए काका कालेलकर और विष्णु प्रभाकर के विचारों के आगे बढ़ाया जा रहा है.साथ ही इनके मार्गदर्शन के लिए अपने समय के स्थापित साहित्यकारों को भी आमंत्रित किया जाता रहा है।.इस तरह पिछले 100 संगोष्ठियों में नए और जाने माने साहित्यकारों ने शिरकत की है.ये इस आयोजन की खास बात है।

इस भव्य कार्यक्रम में डॉ दर्शनी प्रिय को पत्रकारिता और लेखन में सराहनीय योगदान के लिए काका कालेलकर राष्ट्रीय सम्मान से सम्मानित किया गया। वे महिला और समाजिक मुद्दों पर विशेष कॉलम लेखन से जुड़ी है।महिला अधिकारों और समता के लिए गैर सरकारी संस्थानों के साथ मिलकर लगातार काम कर रही है।सार्वजनिक मंचो से वे उनके हक और अधिकारों की पैरोकारी में भी रत है। डॉ दर्शनी प्रिय राष्ट्रीय स्तर की दैनिक पत्र पत्रिकाओं और दिल्ली प्रेस की पत्रिकाओं में निरंतर लेखन कार्य कर रही हैं। उनके हजार से भी अधिक साहित्यिक आलेखों का प्रकाशन हो चुका है। राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठियों,परिचर्चाओं और परिसंवादों में साझेदारी के अनुभव के साथ वे अनेक साहित्यिक सभाओं का संबोधन भी कर चुकी हैं।चार से भी अधिक पुस्तकों के अनुवाद का कार्य उनकी उपलब्धि से जुड़ा है।वर्तमान में वे पद्म श्री सम्मान प्राप्तकर्ताओं के जीवन से संबंधित पुस्तक और वीडियो संकलन का महती कार्य रही है। इस विशेष श्रृंखला के ज़रिए वे देश भर के सम्मानित विशिष्टजनों को एक मंच पर जोड़ रही है जिसकी चहुंओर प्रशंसा हुई है।

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