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वैज्ञानिक विभागों और संस्थानों सहित सभी सरकारी विभागों में हिंदी के प्रयोग में वृद्धि हुई है : डॉ. जितेंद्र सिंह

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 16दिसंबर।विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), पीएमओ, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश भर के वैज्ञानिक विभागों और संस्थानों सहित सभी सरकारी विभागों में हिंदी के प्रयोग में वृद्धि हुई है।

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि संपूर्ण विश्व में हिंदी को बढ़ावा देने के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयास सभी के लिए प्रेरणादायक रहे हैं और इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हिंदी की लोकप्रियता बढ़ी है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय और पृथ्वी विज्ञान विभाग, की संयुक्त हिंदी सलाहकार समिति की 34वीं बैठक की अध्यक्षता करते हुए यह बात कही।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी को हर घर और जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए वैज्ञानिक विषयों का हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं में उचित अनुवाद महत्वपूर्ण है। ऐसे अनुवाद करने के लिए उन विषयों के विशेषज्ञों से परामर्श लेने की आवश्यकता है जो संबंधित भाषाओं के भी विशेषज्ञ हैं और शिक्षा विभाग को भी इसमें शामिल करने की आवश्यकता है।

डॉ जितेंद्र सिंह कहा कि विज्ञान में व्यापक स्वीकृति के लिए किसी भाषा के अनुकूलन में लचीलापन होना चाहिए और शाब्दिक अनुवाद के स्थान अनुवाद को प्रासंगिक बनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक भाषा के अपने शब्द होते हैं, जो उस क्षेत्र पर निर्भर करता है जहां वह प्रचलित है, इसलिए हमें ऐसे शब्दों के लिए किसी भाषा के समकक्ष शब्द खोजने पर कड़ा रुख अपनाने के स्थान पर उन शब्दों को अनुकूलित करने की आवश्यकता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने विभाग के अधिकारियों को आधिकारिक उपयोग में हिंदी को और अधिक बढ़ावा देने के लिए हिंदी सलाहकार समिति के सदस्यों के साथ नियमित रूप से संपर्क में रहने का निर्देश दिया।

समिति के सदस्यों ने हिन्दी के प्रयोग पर अपने बहुमूल्य सुझाव दिये। इस बैठक में समिति के गैर-सरकारी सदस्यों में सांसदों और देश भर के प्रतिष्ठित हिंदी विद्वानों के साथ-साथ विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग, वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान विभाग, जैव प्रौद्योगिकी विभाग और पृथ्वी मंत्रालय के प्रतिनिधि और विज्ञान एवं अधीनस्थ संगठनों ने भी भाग लिया।

समिति के सदस्यों ने इन विभागों में हिंदी के कामकाज की स्थिति की समीक्षा की और सरकारी कार्यालयों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ाने के लिए अपने महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने समिति के सदस्यों से कहा कि वे विज्ञान पत्रिकाओं और अन्य दस्तावेजों के गुणवत्तापूर्ण अनुवाद के लिए कुछ अच्छे अनुवाद विशेषज्ञों को सुझाव देने को कहा जिनकी नियुक्ति इन स्थानों पर की जा सके।

उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने एमबीबीएस पाठ्यक्रम की किताबें हिंदी में लॉन्च की हैं – जिससे मध्य प्रदेश हिन्दी भाषा में चिकित्सा शिक्षा प्रदान करने वाला पहला राज्य बन गया है। उन्होंने कहा कि यह भारत में शिक्षा क्षेत्र के लिए एक पथप्रदर्शक पहल है और एक प्रकार का “पुनर्जागरण” है।

उन्होंने कहा कि भाषाएँ लोगों को जोड़ती हैं और उन्हें तब तक नहीं तोड़तीं जब तक कि उन्हें जबरन लागू न किया जाए। डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, हम सभी को मातृभाषा और राजभाषा हिंदी- दोनों के लिए अथक प्रयास करना चाहिए और अधिक भाषाएं सीखने का प्रयत्न करना चाहिए।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा, गैर-हिंदी भाषी क्षेत्रों के युवा बड़ी संख्या में पर्यटन और विमानन क्षेत्रों में काम कर रहे हैं और हिंदी के ज्ञान ने उन्हें नौकरियां सुरक्षित करने में मदद की है।

उन्होंने कहा कि जब भाषा को नौकरियों या व्यवसायों से जोड़ा जाता है, तो वह अपनी वृद्धि और विकास का रास्ता खुद खोज लेती हैं।

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