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पूर्व मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने राष्ट्रपति को लिखा पत्र, कहा- राजमुंदरी सेंट्रल जेल में उनकी जान को खतरा

समग्र समाचार सेवा
नई दिल्ली, 27अक्टूबर। जेल में आंध्र प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू की जान को खतरा है. ये बात खुद नायडू ने जज को पत्र लिखकर कही है. नायडू ने विजयवाड़ा एसीबी कोर्ट में शिकायत की है कि राजमुंदरी सेंट्रल जेल में उनकी जान को खतरा है, जहां वह कौशल विकास निगम मामले में न्यायिक हिरासत में हैं. एसीबी कोर्ट विजयवाड़ा के विशेष न्यायाधीश को लिखे एक पत्र में, उन्होंने जेल के अंदर और उसके आसपास हुई कुछ अप्रिय घटनाओं को अदालत के ध्यान में लाया, जो ‘जेड प्‍लस श्रेणी सुरक्षा प्राप्त होने के बावजूद उनके जीवन और अंग को खतरे में डाल सकती हैं.

यह आरोप लगाते हुए कि वर्तमान सरकार और सत्ताधारी दल के नेताओं के कृत्यों के कारण उनकी सुरक्षा गंभीर खतरे में है, उन्होंने न्यायाधीश से जेल के अंदर और उसके आसपास उन्हें प्रदान की गई जेड प्‍लस श्रेणी सुरक्षा कवर के अनुरूप अचूक सुरक्षा व्यवस्था करने का अनुरोध किया. उन्होंने लिखा कि यह उनके संज्ञान में आया कि कुछ अज्ञात बदमाशों ने ‘सत्ता में बैठे लोगों के इशारे पर एक भयावह योजना’ के साथ उनकी गतिविधियों को पकड़ने के लिए जेल के ऊपर एक ड्रोन उड़ाया था.

25 अक्टूबर को लिखे गए पत्र में यह कहा गया है,

“ड्रोन खुली जेल के पास आया जहां कुछ कैदी बंद थे. इस चिंताजनक घटना के बावजूद स्थानीय पुलिस ने सच्चाई सामने लाने या उक्त घटना के पीछे के मास्टरमाइंड को पकड़ने के लिए अब तक कोई कदम नहीं उठाया है. यह घटना इस नग्न सच्चाई को स्पष्ट रूप से उजागर करती है कि जेल अधिकारी असहाय हैं.”

इसे तेलुगु देशम पार्टी (टीडीपी) ने 27 अक्टूबर को मीडिया में जारी किया है.

नायडू ने लिखा कि उनके परिवार के सदस्यों की तस्वीरें लेने के लिए 6 अक्टूबर को केंद्रीय कारागार के मुख्य द्वार पर एक और ड्रोन उड़ाया गया था, जब वे उनसे मिलने के बाद बाहर आ रहे थे. उन्होंने कहा कि उनके संज्ञान में यह भी आया है कि कुछ शरारती तत्वों द्वारा जेल में गांजा के पैकेट फेंके गये थे और बागवानी कर रहे कुछ कैदियों ने उन्हें रंगे हाथों पकड़ लिया था.
उन्होंने पत्र में कहा,

“केंद्रीय जेल, राजामहेंद्रवरम के अंदर बंद कुल 2,200 कैदियों में से 750 कथित एनडीपीएस अपराधों में हैं, जो मेरी सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा है.”

टीडीपी सुप्रीमो ने न्यायाधीश को सूचित किया कि यह उनके संज्ञान में आया है कि एस कोटा से एनडीपीएस मामले में एक रिमांड कैदी जेल में पेन कैमरा के साथ घूम रहा था, और अंदर कैदियों की तस्वीरें कैद कर रहा था. नायडू ने यह भी लिखा कि जब उन्हें 10 और 11 अक्टूबर की मध्यरात्रि को जेल में लाया गया, तो जेल में प्रवेश करते समय और जेल परिसर में रहते हुए उनकी अनधिकृत रूप से वीडियोग्राफी और तस्वीरें ली गईं.

पत्र में लिखा है,

“उक्त फुटेज पुलिस द्वारा स्वयं लीक किया गया था. उन तस्वीरों को सत्ताधारी पार्टी द्वारा लोगों की नजरों में मेरी प्रतिष्ठा और छवि को नुकसान पहुंचाने के दुर्भावनापूर्ण इरादे से, मेरी सुरक्षा संबंधी चिंताओं को हवा देकर, मेरी जान जोखिम में डालने की प्रवृत्ति के साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर व्यापक रूप से प्रचारित किया गया था.”

टीडीपी प्रमुख ने कहा कि यह भी उनके संज्ञान में आया है कि पूर्वी गोदावरी के पुलिस अधीक्षक (एसपी) और जेल अधिकारियों को एक गुमनाम पत्र मिला था, इसमें लिखा था कि कुछ वामपंथी चरमपंथी मेरी और करोड़ों लोगों की हत्या की योजना बना रहे हैं. उस हत्या की कोशिश को अंजाम देने के लिए रुपयों का आदान-प्रदान हुआ. पुलिस अधिकारियों ने अब तक उक्त पत्र की सत्यता की जांच करने का कोई प्रयास नहीं किया और न ही किसी अप्रत्याशित घटना को रोकने के लिए कोई कदम उठाया है.

पूर्व मुख्यमंत्री ने लिखा कि साढ़े चार वर्षों में, सत्ताधारी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने अपने नेताओं के इशारे पर और पुलिस के खुले समर्थन से विरोधियों को बेनकाब करने के लिए विभिन्न स्थानों के दौरे के दौरान उन पर कई बार शारीरिक हमला करने की कोशिश की. उन्होंने इस तथ्य को स्पष्ट करने के लिए घटनाओं को सूचीबद्ध किया कि वर्तमान सरकार और सत्तारूढ़ दल के नेताओं के कृत्यों के कारण मेरी सुरक्षा गंभीर खतरे में है. नायडू ने कहा कि वर्तमान सरकार ने सत्ता संभालने के तुरंत बाद 25 जून, 2019 से उनके मौजूदा सुरक्षा कवर को कम कर दिया. उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद ही उनका सुरक्षा कवर बहाल किया गया था.

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